वन मंत्री हरक ने इन अधिकारियों को बताया पहाड़ विरोधी, जानिए वजह ?

देहरादून [उत्तराखंड पोस्ट ब्यूरो] वन मंत्री हरक सिंह रावत ने विभाग के कुछ आला असफरों को पहाड़ विरोधी बताते हुए उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई का मन बना लिया है।

दरअसल ये विवाद चिल्लरखाल-कोटद्वार मार्ग (कंडी मार्ग) को लेकर खड़ा हुआ है। वन विभाग की सहमति के बाद चिल्लरखाल-कोटद्वार मार्ग के निर्माण का जीओ जारी किया गया।  21 दिसंबर इसका टेंडर खुलना है, लेकिन निर्माण शुरू होने से पहले वन विभाग ने इस पर आपत्ति लगा दी है। विभाग के मुखिया यानी पीसीसीएफ राजेंद्र सिंह महाजन ने शासन को पत्र लिखकर साफ कह दिया कि ये मार्ग नहीं बन सकता। क्योंकि जिस मार्ग पर सहमति बनी थी वह कंडी मार्ग ना होकर हरिद्वार और कोटद्वार के बीच का दूसरा वन मार्ग था। ऐसे में कंडी मार्ग का डामरीकरण और चौड़ीकरण नहीं हो सकता। इससे वन संपदा को नुकसान होगा।

उन्होंने इसके लिए वन संरक्षक शिवालिक और डीएफओ लैंसडाउन की रिपोर्ट का भी हवाला दिया। विभाग के इस पत्र से वन मंत्री बेहद नाराज हैं। उन्होंने साफ कह दिया है कि कंडी मार्ग को लेकर तीन बैठकों में मौजूद विभाग के अफसरों अब तक क्यों चुप थे।

वन मंत्री डा. हरक सिंह रावत का कहना है कि इस मार्ग के डामरीकरण से वन संपदा को कोई नुकसान नहीं होगा। इसे लेकर तीन बार हुई बैठक में पीसीसीएफ राजेंद्र महाजन और संबंधित डीएफओ भी मौजूद रहे। उस वक्त उन्होंने आपत्ति क्यों नहीं की। अब जानबूझकर इसमें अडंगा डाला जा रहा है। कुछ अफसर पहले इसकी जानकारी ना होने की बात कह रहे हैं जोकि घोर लापरवाही है। सरकार इस पत्र का संज्ञान नहीं लेगी और ऐसे अफसरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। पीसीसएफ राजेंद्र महाजन का कहना है कि मुझे इस मामले की ज्यादा जानकारी नहीं। मातहतों ने जो रिपोर्ट दी मैनें शासन को भेज दी। अब शासन को इस पर निर्णय लेना है।

गौरतलब है कि इस मार्ग के बनने से कोटद्वार और हरिद्वार के बीच करीब 30 किलोमीटर दूरी कम हो जाएगी। इसके अलावा इस मार्ग के बनने से हरिद्वार से कोटद्वार के लिए यूपी की सीमा से होकर नहीं गुजरना पड़ेगा।

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