अच्छी ख़बर | अब जीवन प्रमाण पत्र के लिए नहीं लगाने पड़ेंगे चक्कर

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Capture2पेंशनधारकों को अब जीवन प्रमाण पत्र के लिए भागदौड़ से मुक्ति मिलेगी। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बुधवार को बीजापुर अतिथि गृह में प्रदेश के पेंशन धारकों की सुविधा के लिए डिजिटल जीवन प्रमाण सेवा का शुभारम्भ किया। उन्होंने कहा कि इस सुविधा के उपलब्ध होने पर पेंशन धारकों को जीवन प्रमाण पत्र के लिए भागदौड़ नहीं करनी पड़ेगी और यह सुविधा उनके क्षेत्र में स्थित देवभूमि जन सेवा केन्द्र(सी.एस.सी.) से ही प्राप्त हो जाएगी। इस प्रकार उन्हें जीवन प्रमाण डिजिटल रूप में केाषागार में स्वतः ही आनलाइन उपलब्ध हो जायेगा।

तैयार हुआ पहला प्रमाणCapture1 पत्र | इस सुविधा का लाईव प्रस्तुतिकरण देते हुए एक पेंशनर से उनकी आधार संख्या व बायोमेट्रिक मशीन पर अगूंठा लेते हुए मुख्यमंत्री ने बटन दबा कर कोषागार में जीवन प्रमाण प्राप्त करवाया गया। इस दौरान मुख्यमंत्री रावत ने इस योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार पर बल देते हुए कहा कि यह योजना अगले 6 माह में पब्लिक डिमाण्ड के रूप में नजर आए, ऐसे प्रयास किए जाने चाहिए। रावत ने कहा कि आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है।

ई-नॉलेज का प्रभावी क्रियान्वयन जरूरी | मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि  ई-नॉलेज के प्रभावी क्रियान्वयन के लिये बेसिक नेटवर्क की मजबूती पर ध्यान देना होगा। एरिया सर्विस सेंटरों के माध्यम से दी जा रही सुविधाओं की जानकारी आम जनता तक पहुंचानी जरूरी है। सरकार के साथ ही इसे सबका कार्यक्रम बनाना होगा ताकि अधिक से अधिक लोग, इसका लाभ उठा सके, इसके लिये जन जागरूकता आवश्यक है। खाद्य सुरक्षा योजना को भी इससे जाड़ा जाय। बिजली, पानी, टेलीफोन आदि के बिल इसके माध्यम से जमा हो।

गांव-गांव तक पहुंचे आईटी का लाभ | मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह ने कहा कि आईटी का लाभ गांव-गांव तक पहुंचे यह हमारा प्रयास है। कोषागार को डिजिटल सेवा से जोड़ने का सराहनीय कार्य प्रदेश में हुआ है। उन्होंने सभी विभागों से इस दिशा में आपसी समन्वय से कार्य करने की अपेक्षा की।

कैसे लें इस योजना का लाभ ? | सचिव आईटी दीपक कुमार ने बताया कि पेंशन धारक नागरिक को देवभूमि जन सेवा केन्द्र में अपना आधार नम्बर देना होगा तथा अपने पहचान स्वरूप बायोमेट्रिक उपकरण पर अंगूठे का छाप देना होगा जिससे पूर्व से ही आधार सर्वर पर उपलब्ध उनके अंगूठे के निशान से मिलान स्वतः हो जाएगा। मिलान होने के उपरान्त कोषागार के सर्वर पर यह सूचना स्वतः चली जायेगी तथा इस सेवा केन्द्र से उपलब्ध कराया जाएगा।

10 रूपए शुल्क | इस योजना के तहत पेंशन धारकों को इस कार्य के लिए कोषागार जाना नहीं पड़ेगा तथा समय के साथ-साथ आने जाने के खर्च की भी बचत होगी। यह सुविधा देवभूमि जन सेवा केन्द्र से मात्र 10 रुपए में प्राप्त हो जाएगी।

प्रदेश में 3000 केंद्र | उन्होंने बताया कि राज्य में इस समय 3000 से भी अधिक देवभूमि जन सेवा केन्द्र स्थापित किये जा चुके है तथा लगभग 2400 केन्द्र अपनी सेवाएं दे रहे है जिसमें ई-जीवन प्रमाण सुविधा के साथ 90 सरकारी व गैर सरकारी सेवाएं दी जा रही है। इस वर्ष सभी ग्राम पंचायतों में देवभूमि जन सेवा केन्द्र प्रारम्भ करने का लक्ष्य रखा गया है।