विपक्ष पर बरसे मोदी, कहा- देश को लूटने वालों को मोदी डराकर रखेगा, उन्हें डरना ही होगा

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नई दिल्ली (उत्तराखंड पोस्ट) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को लोकसभा में विपक्ष पर जमकर हमले किए। उन्होंने अपने भाषण में रोजगार से लेकर राफेल डील तक तमाम मुद्दों पर विपक्ष के हमलों का जवाब दिया।

भ्रष्टाचार पर अपनी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने दो टूक कहा कि देश को लूटने वालों को मोदी डराकर रखेगा, उन्हें डरना ही होगा।

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘आप चिंता मत करें। देश को लूटने वालों को मोदी डरा कर रखेगा, देश ने मुझे इसीलिए बैठाकर रखा है। जिन्होंने देश को लूटा है, उन्हें डरना ही होगा। देश में चोर, लुटेरे, बदमाशों का डर खत्म हो गया था। उनके मन में डर बैठाने के लिए ही हमें यहां बैठाया गया है। देश ने मुझे यह काम सौंपा है, मुझे फिर यहां बैठाएगा।’ उन्होंने अपने भाषण का समापन सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की इस मशहूर कविता से की- ‘सूरज जाएगा भी तो कहां, उसे यहीं रहना होगा, यहीं हमारी सांसों में, हमारी रगों में, हमारे संकल्पों में, हमारे रतजगों में, तुम उदास मत होओ, अब मैं किसी भी सूरज को नहीं डूबने दूंगा।’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण के दौरान यह विश्वास व्यक्त किया कि 2019 में एक बार फिर उनकी ही सरकार बनेगी। पीएम मोदी ने कहा, ‘2014 में जिस मंजिल को लेकर हम निकले, उसकी तरफ हम बढ़ते रहेंगे। 2018 में अविश्वास प्रस्ताव के दौरान देखा कि मेरी आवाज को दबाने का भरपूर प्रयास किया गया था। विपक्ष को शुभकामनाएं देता हूं कि 2023 में फिर से आपको अविश्वास प्रस्ताव लाने का मौका मिले। यह अहंकार नहीं, समर्पण भाव है।’ इस दौरान उन्होंने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि आपके अहंकार का परिणाम है कि आप 400 से 40 हो गए।

प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस पर कर्जमाफी के नाम पर किसानों को धोखा देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जो गरीब किसान कर्जमाफी के हकदार थे उनका कर्ज माफ नहीं हुआ, अपात्रों का कर्ज माफ हो गया। पीएम ने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा, ‘2009 का चुनाव जीतने के लिए आपने कर्जमाफी की घोषणा की। किसानों का कर्ज 6 लाख करोड़ रुपये था लेकिन आपने 52 हजार करोड़ रुपये का कर्ज माफ किया। वह भी बैंक से कर्ज लेने वाले बड़े लोगों का माफ हुआ, गरीब किसानों का नहीं। उस समय भ्रष्टाचार के इतने बड़े-बड़े कारोबार चल रहे थे कि कई पर तो ध्यान ही नहीं जाता था। सीएजी की रिपोर्ट के मुताबिक उन 52 हजार में से 35 हजार तो ऐसे थे जो कर्जमाफी के हकदार ही नहीं थे।’

प्रधानमंत्री मोदी ने अंतरिम बजट में छोटे किसानों के लिए 6 हजार रुपये सालाना वित्तीय मदद के प्रावधान का जिक्र करते हुए कहा कि हम सभी किसानों को फायदा पहुंचाना चाहते हैं। हम किसानों का सशक्तीकरण चाहते हैं। पीएम ने कहा, ‘हम भी कर्जमाफी के रास्ते पर जा सकते थे, लेकिन हम उनका (किसानों का) सशक्तीकरण करना चाहते थे। 99 सिंचाईं परियोजनाएं लटकी पड़ी थी, उन्हें हजारों करोड़ से पूरा किया है। मेगा फूड पार्क बनाए हैं। हमने किसानों को 6 हजार रुपये वार्षिक देने का फैसला किया है, जिसका दूरगामी असर पड़ेगा। देश के 85 प्रतिशत किसानों को इसका लाभ मिलने वाला है। करीब 12 करोड़ किसानों को इसका सीधा फायदा मिलेगा, उनके खाते में पैसे आएंगे।’

पीएम मोदी ने उन राज्यों की आलोचना की जो आयुष्मान भारत या मोदी सरकार की अन्य लोककल्याणकारी योजनाओं को अपने यहां लागू नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘कुछ राज्य सीना तानकर कह रहे हैं कि मोदी की आयुष्मान योजना नहीं लागू करेंगे, किसानों वाली योजना नहीं लागू करेंगे। जरा लोगों से पूछते, किसानों से पूछते कि वे इसका लाभ लेना चाहते हैं कि नहीं।’

प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी सरकार पर रोजगार के मोर्चे पर नाकामी के आरोपों का भी जवाब दिया। उन्होंने आंकड़ों के जरिए यह साबित करने की कोशिश की कि उनकी सरकार के दौरान रोजगार के मौके बढ़े हैं, बेरोजगारी घटी है। पीएम मोदी ने कहा, ’55 साल की सरकार में रोजगार का कोई अजेंडा ही नहीं था। रोजगार की प्रकृति बदल चुकी है। देश में असंगठित क्षेत्र 85 से 90 प्रतिशत नौकरियां देता है। संगठित क्षेत्र 10 से 15 प्रतिशत ही रोजगार देता है। जो सेक्टर नौकरियों का सिर्फ 10 प्रतिशत योगदान देता है, उसके आंकड़े देते हैं। सितंबर 2017 से नवंबर 2018 तक करीब 1 करोड़ लोगों ने पहली बार पीएफ का पैसा कटाना शुरू किया। इनमें से 64 प्रतिशत की उम्र 28 साल से कम है। हमारे देश में मार्च 2014 में करीब 65 लाख लोगों को एनपीएस में रजिस्टर किया गया था। पिछले साल अक्टूबर में यह संख्या 1 करोड़ 20 लाख हो गई। यह भी क्या बिना नौकरी के हो गई। पिछले 4 सालों में इनकम टैक्स रिटर्न भरने वाले नॉन-कॉर्पोरेट टैक्सपेयर की संख्या 6 लाख 35 हजार बढ़ी है। ये दूसरों को अपने यहां काम पर रखते हैं।’

प्रधानमंत्री ने असंगठित क्षेत्र से जुड़े आंकड़ों को गिनाते हुए कहा, ‘असंगठित क्षेत्र के आंकड़े देखिए। ट्रांसपोर्ट सेक्टर में बहुत ज्यादा लोगों को रोजगार मिलता है। बीते 4 सालों में करीब 36 लाख बड़े ट्रक या व्यावसायिक वाहन, डेढ़ करोड़ कमर्शल वीइकल बिके हैं। क्या ये पार्किंग के लिए खरीदी गई हैं। उन्हें कोई चलाने वाला नहीं होगा क्या, सर्विसिंग नहीं होती होगी क्या। एक अनुमान है कि ट्रांसपोर्ट सेक्टर में ही बीते साढ़े 4 वर्षों में डेढ़ करोड़ लोगों को रोजगार मिली है। होटलों की संख्या में 50 फीसदी बढ़ोतरी हुई है। देश में टैक्सी एग्रीगेटर सर्विस का विस्तार हो रहा है। उसमें भी कोई न कोई गाड़ी चलाता है, वह भी रोजगार है।’ मुद्रा योजना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ‘इसके तहत पहली बार लोन पाने वालों की संख्या सवा 4 करोड़ से ज्यादा है। इन्होंने अपना काम शुरू किया है लेकिन ये लोग जॉब डेटा के अंदर नहीं होते हैं। डेढ़ लाख से ज्यादा कॉमन सर्विस सेंटर ग्रामीण इलाकों में खोले गए हैं। देश में दोगुनी गति से हाइवे बन रहे हैं, नए एयरपोर्ट बन रहे हैं, करोड़ों घर बन रहे हैं। क्या इसमें रोजगार नहीं मिल रहे हैं क्या। स्टार्टअप इंडिया जैसे स्वरोजगार के मजबूत पहलों से युवाओं को फायदा हुआ है।’

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