उत्तराखंड पर मेहरबान हुए इंद्रदेव, शांत हुआ अग्निदेव का गुस्सा

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imagesउत्तराखंड के वनों में आग के तांडव के बीच इंद्रदेव की मेहरबानी हुई है। प्रदेश के पौड़ी, उत्तरकाशी, हल्द्वानी, नैनीताल, पिथौरागढ, अल्मोड़ा, चमोली व देहरादून जनपदों में बारिश ने राहत दे दी। बुधवार शाम हुई इस झमाझाम बारीश ने जहां वनों की आग को शांत कर दिया है, वहीं लोगों को गर्मी से भी राहत मिली है। इससे पहले मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह ने बताया कि बुधवार को प्रदेश में 90 वनाग्नि की घटनाएं हुई, जिनमें से 76 पर काबू पा लिया गया है और उनमें से 14 को बुझाने का कार्य अभी भी जारी है।

शत्रुघन सिंह ने बताया कि सरकार वनाग्नि की घटनाओं पर काबू पाने के लिए तत्कालिक प्रयासों के साथ-साथ दीर्घकालिक उपायों के लिए भी गम्भीरता से विचार कर रही है। इसके लिए विशषज्ञों से बातचीत चल रही है। सरकार भारतीय मौसम विज्ञान विभाग से जारी पूर्वानुमान पर भी लगातार नजर रखी जा रही है। साथ ही उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा की तैयारियां भी लगातार चल रही हैं और वनाग्नि की घटनाओं से चारधाम यात्रा की तैयारियों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

नहीं उड़े M-17 हैलिकॉप्टर

मुख्य सचिव ने बताया कि जंगल की आग का दायरा कम होने के चलते बुधवार को वायुसेना के एमआई-17 हैलिकॉप्टर का उपयोग आग को बुझाने के लिए नहीं किया गया लेकिन जरूरत पड़ने पर फिर से वायुसेना के चौपर की मदद आग बुझाने के लिए ली जाएगी।

अब तक 7 की गई जान

अपर मुख्य सचिव एस रामास्वामी ने बताया कि वर्तमान फायर सीजन में सात लोगों (पौड़ी-1, बागेश्वर-1, नैनीताल-3, कान्स्टेबल पंकज चैहान एवं एक फायर वॉचर चैत सिंह) की जान जा चुकी है। उन्होंने बताया कि वन विभाग के फायर वाचर चैत सिंह की मृत्यु होने पर उसकी पत्नी को दो लाख रूपये की धनराशि दी जा रही है। चार लाख रूपये एसडीआरएफ से दिए जाने के लिए प्रभागीय वनाधिकारी एवं जिलाधिकारी, देहरादून को निर्देश दिए गए है। राज्यपाल डॉ. कृष्ण कांत पॉल ने भी अपने विवेकाधीन कोष से भी दो लाख रूपये की धनराशि चैत सिंह के आश्रित को दिए जाने की स्वीकृति प्रदान की है। इसके साथ ही स्वर्गीय चैत सिंह की पत्नी को फायर वॉचर के रूप में रखने हेतु प्रभागीय वनाधिकारी को निर्देश दिये गये है।

3739 हेक्टेयर वन क्षेत्र तबाह

रामास्वामी ने बताया कि इस फायर सीजन में उत्तराखंडमें अभी तक कुल 1681 वनाग्नि की घटनाएं हुई हैं और वनाग्नि की घटनाओं से 3739 हेक्टेयर वनक्षेत्र प्राभावित हुआ है।