ब्लॉग | मेरे कुछ दोस्तों को मेरे सपनों से बड़ी शिकायतें हैं: मुख्यमंत्री रावत

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harish#Uttarakhand के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने राज्य का मुख्यमंत्री बनने के बाद से अब तक उनके सामने आई चुनौतियों और उत्तराखंड के विकास के लिए अपने सपनों को कागज में उतारा है। आप भी पढ़िए मुख्यमंत्री हरीश रावत ने ‘अमर उजाला’ में अपने आलेख में क्या-क्या लिखा…

मुख्यमंत्री हरीश रावत लिखते हैं कि संभावनाओं में राह तलाशना कई समस्याओं के समाधान को संभव बनाता है। मैं भी कुछ ऐसे ही विश्वास को लेकर आगे बढ़ रहा हूं। राजनीति में महत्वाकांक्षाओं, आस्थाओं तथा संकल्पों का संतुलन जनता के पक्ष में होना चाहिए। जब हम सार्वजनिक जीवन में उतरते हैं, तो सपने एकल नहीं रह जाते, सामजिक होते हैं। जब हम इस बात को समझ कर आगे बढ़ते हैं, तो चुनौतियां आसान हो जाती हैं।

harish rawat sworn in as uttarakhand cmजब में मुख्यमंत्री बना |  वर्ष 2014 में जब मैं मुख्यमंत्री बना, तब मेरे सामने सबसे बड़ी चुनौती थी आपदा से अपने प्रदेश को उबारने की। एक हतोत्साहित राज्य के लोगों और अर्थव्यवस्था में उत्साह पैदा करने की। क्या ऐसा हो पाया? मेरा वर्तमान कार्यकाल अनेक चुनौतियों व व्यवधानों के साथ मार्च, 2017 में पूर्ण हो जाएगा। मैं लोगों से नहीं कहूंगा कि मुझे सफल मुख्यमंत्री मानें। हां, मैं एक प्रयत्नशील, यत्नशील मुख्यमंत्री के रूप में खरा उतर सकूं, इतना चाहूंगा। मेरा सपना कठिन जरूर है, पर मुझे विश्वास है कि एक दिन यह अवश्य पूरा होगा। सपना यह है कि उत्तराखंड देश का एक समृद्ध और अग्रणी राज्य बने। एक ऐसा राज्य, जहां हर क्षेत्र में विकास के नए आयाम स्थापित हों।

harish rwatशायद मेरा प्रयास सामने वाले का भाग्य बदल दे |  मेरे पास अनेक लोग अपनी समस्याएं लेकर आते हैं। बहुत मामलों में मेरी पहली सोच होती है, यह कार्य होने लायक नहीं है। मैं फिर सामने वाले का चेहरा देखता हूं और सोचता हूं, यह व्यक्ति मुझे सक्षम मानकर आया है। शायद मेरा प्रयास और सामने वाले का भाग्य कोई रास्ता निकाल दे। मैं उस व्यक्ति का कागज संभाल कर प्रयत्न करने में जुट जाता हूं। सच मानिए, ऐसे मामलों में मेरी सफलता का आंकड़ा 50 फीसदी से अधिक है।

rawat-harishमैं एक रेस्टलेस मुख्यमंत्री हूं | डॉ. कलाम के शब्दों में, आज मैं जिन सपनों को देखता हूं, वे मुझे सोने नहीं देते। मैं एक रेस्टलेस (अनथक) मुख्यमंत्री हूं। सपनों ने चुनौतीपूर्ण निर्णय लेना सिखा दिया है। जैसे 2014 में चारधाम, खासकर केदारनाथ धाम यात्रा प्रारंभ करना चुनौतीपूर्ण निर्णय था। इस वर्ष चारधाम यात्रा पर 15 लाख से अधिक यात्रियों के आने का आंकड़ा हमारे निर्णय को सही साबित कर रहा है। इस वर्ष हम सफलतापूर्वक अर्धकुंभ व चुनौतीपूर्ण कांवड़ यात्रा को भी संपन्न करवा पाए।

बिखरा-बिखरा-सा सपना संवर रहा है | गांवों से पलायन एक राष्ट्रव्यापी समस्या है। तकनीक व अवसरों की बढ़ती संभावना के चलते गांव खाली हो रहे हैं, शहर अव्यवस्थित स्लम बन रहे हैं। मैंने एक बड़ा सपना गांवों से बेबसी भरे पलायन को रोकने का भी देखा है। मैंने 2022-23 तक ऐसा कर पाने का लक्ष्य रखा है। वर्ष 2018-19 तक प्रत्येक गांव को सड़क से जोड़ने के रोडमैप पर हम कार्य कर रहे हैं। इस वर्ष एक हजार छोटी-बड़ी सड़कों पर काम प्रारंभ हो रहा है। 20 हैलीपैड व चार हवाई पट्टियां सेवा के लिए तैयार है, 40 हैलीपैड और बन रहे हैं। रेल लाइन व मोनो रेल पर काम प्रारंभ होने जा रहा है। बिखरा-बिखरा-सा सपना संवर रहा है। शिक्षा व स्वास्थ्य, दोनों क्षेत्रों में दर्जनों पहलें प्रारंभ की हैं। उम्मीद है, मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना, राज्य खाद्य सुरक्षा योजना तथा पांच सौ से अधिक मॉडल स्कूलों का संचालन, शिक्षकों व प्रधानाचार्यों की कमी दूर कर इस क्षेत्र में भी सुधार का सपना साकार होगा।

harishकुछ दोस्तों को मेरे सपनों से शिकायत है | कहते हैं, सपने सतरंगी होते हैं। मेरे सपने तो अनेकानेक रंगों के हैं। नित एक नया सपना जुड़ता है, हर सपने के साथ एक नए प्रयास की गाथा प्रारंभ होती है। मेरे कुछ दोस्तों को मेरे सपनों से बड़ी शिकायतें हैं। पर वे जानते हैं कि सपनों और सामर्थ्य में साझा कितना है। राज्य गठन से अब तक मैंने मुख्यमंत्री के रूप में की गई जितनी घोषणाएं अभी तक पूर्ण कर दी हैं, सभी पूर्व मुख्यमंत्री कुल मिलाकर उतनी घोषणाएं भी नहीं कर पाए होंगे।

harishसपने देखें, उन्हें साकार करने में जुट जाएं | मार्च, 2016 में कुछ राजनीतिक घटनाएं ऐसी घटीं, जिससे इस यात्रा को थोड़ा ब्रेक लगा है। दलबदल व राष्ट्रपति शासन थोपा गया। मुख्यमंत्री पर सीबीआई की जांच संघीय व्यवस्था पर गहरी चोट थी। विधानसभा द्वारा पारित वार्षिक बजट की स्वीकृति को लटकाकर राज्य के विकास को पीछे धकेला गया। परंतु सभी परिस्थितियों को झेलता हुआ मैं पाता हूं कि न्यायपालिका ने अंततः मेरे संघर्ष को सत्य की शक्ति दी। मैं युवाओं से यही कहूंगा, कि सपने देखें, उन्हें साकार करने में जुट जाएं, फिर चाहें परिस्थितियां कैसी भी क्यों न हो। परिस्थितियों से ही संभावनाएं निकलती हैं। मुझे भी विरासत में जटिलताएं व उलझनें मिली हैं।

harishhशायद इसीलिए हड़तालें झेल रहा हूं | राज्य में वर्षों से नियमित भर्तियां नहीं हुईं। विभागों के ढांचे नहीं बने। सरकारें नीति व नियमों के बजाय तदर्थवाद पर कार्य करती रहीं। एक लोकसेवा आयोग कहां तक गाड़ी खींचता! आज पांच भर्ती बोर्ड काम कर रहे हैं। विभागों में विद्यमान विसंगतियों का निराकरण हो रहा है। शायद इसीलिए हड़तालें भी झेल रहा हूं।

प्रतिभा और सामर्थ्य की कमी नहीं | उत्तराखंड में विकास की असीम संभावनाएं हैं। उत्तराखंड के पास प्रतिभा और सामर्थ्य की कमी नहीं है। हमारी प्रति व्यक्ति औसत आय तेजी से आगे बढ़ रही है और राष्ट्रीय औसत के लगभग दोगुने से ज्यादा है। राज्य की वार्षिक विकास दर भी राष्ट्रीय विकास दर से अधिक है। औद्योगिक विकास दर लगभग 16 प्रतिशत व सेवा क्षेत्र में विकास दर 13 प्रतिशत है।

गरीबी, बेरोजगारी व पलायन से मुक्ति पाने के लिए उत्तराखंड को 2019 तक 18 प्रतिशत की विकास दर प्राप्त करनी आवश्यक है। इसके लिए कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र की विकास दर को आठ प्रतिशत और सर्विस सेक्टर की विकास दर को 20 प्रतिशत पहुंचाना होगा। छोटी-बड़ी पहलों के माध्यम से हमें अपने समग्र समावेशी विकास के रोडमैप पर आगे बढ़ना है और अपने लिए एक बेहतर भविष्य बनाना है। यही राज्य निर्माण की मूल अवधारणा है। मुझे खुशी है कि मेरे सपने भी इसी अवधारणा में रचे-बसे व गुंथे हुए आगे बढ़ रहे हैं। (साभार: अमर उजाला)