देश में इस गंभीर बीमारी ने छीन ली है लोगों की नींद , 15 करोड़ लोग हो चुके है शिकार

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नई दिल्ली(उत्तराखंड पोस्ट ब्यूरो)  आजकल बढ़ते काम के बोझ से अधिकतर लोग मानसिक बीमारी से पीड़ित है। अधिकतर लोगों को अपने शरीर की देखभाल करने का समय ही नही है। एक जानकारी के मुताबिक राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2015-16 में ये बात सामने आई है  कि भारत में अनुमानित 15 करोड़ लोगों को मानसिक स्वास्थ्य देखभाल की आवश्यकता है।

मानसिक स्वास्थ्य के लक्षणों और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की जागरूकता में कमी के कारण देश में उपचार के बीच अंतर पैदा हुआ है।हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, अधिकतर लोगों को केवल देखभाल की आवश्यकता होती है। कुछ को तनाव, थकान और शरीर में दर्द होता है और किसी से बात करने या बस साथ बैठने का दिल करता है. यह केवल तब होता है जब ये लक्षण विकसित हो जाते हैं और चीजें बदतर होती जाती हैं, जिससे समय के साथ स्थिति गंभीर होती जाती है।

उन्होंने ये भी कहा, कई मामलों में अवसाद सहित मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं गरीबी, घरेलू हिंसा और कम उम्र में विवाह जैसी समस्याओं से जुड़ी हो सकती हैं। इसलिए, इस मुद्दे को समग्र रूप से देखना जरूरी है। हालांकि भारत के 27 प्रतिशत जिलों में मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम हैं, लेकिन कई स्थानों पर पूरी टीम की कमी है। भारतीय लोग मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों के प्रति इम्यून नहीं है, लेकिन इस बात में भरोसा नहीं करते कि उन्हें भी यह समस्या हो सकती है। मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए कुछ ये उपाय करें।

साबुत अनाजों से तैयार आहार का उपभोग करें। इसमें हरी पत्तेदार सब्जियां, गुणवत्ता वाला प्रोटीन, स्वस्थ वसा और जटिल काबोर्हाइड्रेट शामिल हैं। हाइड्रेटेड रहें क्योंकि यह लिम्फैटिक सिस्टम से विषाक्त पदार्थों को दूर करने में मदद करेगा और शरीर से मैटाबोलिज्म कचरे को हटा देगा

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