लोस चुनाव | उत्तराखंड की वो सीटें जहां हर बार बदल जाती है पार्टी और चेहरा

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देहरादून (उत्तराखंड पोस्ट) लोकसभा के पहले चरण का चुनाव 11 अप्रैल को होना है। इस चरण में उत्तराखंड की पांच लोकसभा सीटों समेत 20 राज्यों की 91 सीटें हैं। इनमें से राज्य गठन के बाद से उत्तराखंड की 5 में से 4 सीटें ऐसी हैं जो हर बार वोटर पार्टी और चेहरे को बदल देते हैं।

अल्मोड़ा | उत्तराखंड की इस सीट पर 2004 में भाजपा के सांसद बची सिंह रावत थे। 2009 में यह कांग्रेस के प्रदीप टाम्टा के खाते में चली गई। 2014 में फिर इस सीट पर भाजपा के अजय टाम्टा ने वापस कब्जा कर लिया। इस बार फिर से अजय टम्टा और प्रदीप टम्टा के बीच इस सीट पर सीधी टक्कर है।

पौड़ी- गढ़वाल | उत्तराखंड की इस सीट पर 2004 में भाजपा के सांसद भुवन चंद्र खंडूरी थे। 2009 में यह कांग्रेस के सतपाल महाराज के खाते में चली गई। 2014 में फिर इस सीट पर भाजपा के भुवन चंद्र खंडूरी ने वापस कब्जा कर लिया। इस बार इस सीट पर भुवन चंद्र खंडूरी के बेटे कांग्रेस के टिकट पर चुनाव मैदान में हैं तो बीजेपी से तीरथ सिंह रावत उनको टक्कर दे रहे हैं।

टिहरी | उत्तराखंड की इस सीट पर 2004 में बीजेपी मानवेंद्र शाह चुनाव जीते तो 2009 में ये सीट कांग्रेस के खाते में चली गई और विजय बहुगुणा सांसद बने। 2014 में ये सीट फिर से बीजेपी के खाते में आ गई और माला राज्य लक्ष्मी शाह यहां से चुनाव जीती। इस बार फिर से यहां बीजेपी से माला राज्य लक्ष्मी शाह मैदान में हैं तो कांग्रेस से प्रीतम सिंह उन्हें टक्कर दे रहे हैं।

हरिद्वार | उत्तराखंड की इस सीट से 2004 में सपा के राजेंद्र कुमार जीते। साल 2009 में यह कांग्रेस के हरीश रावत के पास चली गई। 2014 में फिर इस सीट पर भाजपा के रमेश पोखरियाल निशंक ने वापस कब्जा कर लिया। एक बार फिर इस सीट पर बीजेपी से निशंक तो कांग्रेस से अंबरीश कुमार मैदान में हैं।

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