उत्तराखंड को मिलेगी बड़ी सौगात, यहां -यहां पर होगा रेल सुविधाओं का विस्तार

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नई दिल्ली (उत्तराखंड पोस्ट) मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने मंगलवार को सचिवालय में मीडिया से अनौपचारिक वार्ता करते हुए बताया कि सोमवार को उन्होंने दिल्ली में केन्द्रीय रेल मंत्री पियूष गोयल, वन एवं पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के साथ ही केन्द्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) आवासन व शहरी विकास मंत्रालय नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी से भेंट कर राज्य से सम्बन्धित विषयों पर चर्चा की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने रेल मंत्री पीयूष गोयल से आगामी महाकुम्भ के दृष्टिगत हरिद्वार में रेल सुविधाओं के विस्तार पर विचार-विमर्श किया। उन्होंने रेल मंत्री को अवगत कराया है कि हरिद्वार रेलवे स्टेशन पर काफी भीड होने से यहां पर खतरे की आशंका बनी रहती है, अतः हरिद्वार रेलवे स्टेशन के साथ ही ज्वालापुर व मोतीचूर रेलवे स्टेशनों और अधिक विकसित किया जाना जरूरी है। इस पर रेल मंत्री ने अधिकारियों को अविलम्ब डी0पी0आर0 तैयार करने के निर्देश दिये हैं। इसके साथ ही रेल मंत्री ने हरिद्वार-देहरादून रेल लाइन के दोहरीकरण की डी0पी0आर0 भी दो माह में तैयार करने के निर्देश दिये हैं। अभी लक्सर से हरिद्वार के मध्य यह कार्य चल रहा है। लक्सर से देहरादून तक रेल लाइन के दोहरीकरण से शताब्दी जैसी अन्य गाडियों का आवागमन और बढ़ सकेगा तथा अधिक कोच वाली गाडियों की संख्या भी बढ़ेगी।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि उन्होंने केन्द्रीय आवास एवं नगर विकास मंत्री से भेंट के दौरान आग्रह किया कि हरिद्वार महाकुम्भ के लिये 5000 करोड़ की धनराशि उपलब्ध कराने के साथ ही हरिद्वार में स्थान की कमी के दृष्टिगत इंटीग्रेटेड कमाण्ड कन्ट्रोल यूनिट की व्यवस्था करने की भी अपेक्षा की है, ताकि तकनीकि दक्षता के साथ कुम्भ में आने वाले 12 से 15 करोड़ श्रद्धालुओं के लिये आवश्यक व्यवस्थाये सुनिश्चित हो सके।

उन्होंने कहा कि हरिद्वार को स्मार्टसिटी बनाये जाने का भी अनुरोध उन्होंने केन्द्रीय नगर विकास मंत्री से किया है। प्रयागराज सहित अन्य कुम्भ वाले क्षेत्र स्मार्ट सिटी में पहले से ही चयनित है। इससे भी हरिद्वार में आवश्यक व्यवस्थाये सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मंत्री मोदी का उत्तराखण्ड के प्रति विशेष लगाव होने के कारण राज्य में संचालित योजनाओं में गति आयी है। पहले योजनाओं की स्वीकृति में वर्षों लग जाते थे। प्रधानमंत्री जी ने पर्यावरण को विकास से जोड़ा है। उत्तराखण्ड के लोग पर्यावरण के प्रति जागरूक है। स्थानीय लोगों ने इसे संरक्षित किया है। यहां का जीवन वनाधारित रहा है।

प्रदेश में प्राकृतिक जलश्रोतों को संरक्षित करने के लिये प्रयास किये जा रहे है। नीति आयोग ने भी जल संवर्धन को प्रमुखता दी है। इस पर दीर्घकालिक सोच के साथ कार्य किया जा रहा है।हमारा प्रयास हे कि जो योजनाये बने वे सस्टिनेबल हो। प्राकृतिक जल स्त्रोतो की निरन्तरता बनी रहे। इसे डीपीआर में सम्मिलित किया जा रहा है। इस दिशा में दीर्घकालिक सोच के साथ कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य में ठोस अपशिष्ट प्रबन्धन की दिशा में कार्य किया जा रहा है। वेस्ट को बेस्ट में बदलने का हमारा प्रयास है।मुख्यमंत्री ने कहा कि केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री से उन्होंने 5 हेक्टेयर तक वन भूमि हस्तान्तरण का अधिकार राज्य सरकार को देने की मांग की है।

साथ ही 1000 मीटर से उपर पुराने वृझों के पातन तथा उनके स्थान पर नये पेड़ लगाने की अनुमति देने का भी अनुरोध किया है। एफआरआई ने भी माना है कि पुराने पेड़ों को हटाकर नये पेड़ लगाने से जंगलों को बढ़ाने में मदद ही मिलती है। देहरादून हवाई अड्डे के विस्तार के सम्बन्ध में भी उनकी केन्द्रीय मंत्री से वार्ता हुई है। जबकि पिथौरागढ़ हवाई अड्डे का विस्तार में आने वाली समस्याओं के समाधान पर भी उन्होंने केन्द्रीय मंत्री से चर्चा की।

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