मुख्यमंत्री पहुंचे तो चमोली के इन तीन गांवों की खुली किस्मत

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चमोली  (उत्तराखंड पोस्ट) मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारी चमोली को घेस, बलाण व हिमनी गांवों के सुनियोजित विकास के लिए डीपीआर बनाने के निर्देश दिए। वहां के स्थानीय संसाधनों का उपयोग करते हुए स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप किस तरह से स्थानीय लोगों की आय को दोगुना किया जा सकता, विशेषज्ञों की सहायता से विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाए। इन गांवों को मॉडल विलेज के तौर पर विकसित किया जाना है। इसमें ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है।

मुख्यमंत्री ने क्षेत्र में जैविक खेती प्रमाणन की प्रक्रिया शुरू करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जैविक खेती से उत्पादों की अच्छी कीमत मिलती है। परंतु इसकी प्रक्रिया में 3 वर्ष लगते हैं। इसलिए इसकी शुरूआत जल्द से जल्द की जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बांस, हैम्प आदि से भी काश्तकारों की आय को कई गुना बढ़ाया जा सकता है। आज जरूरत है ऐसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने की जिनकी वैश्विक मांग हो।

मुख्यमंत्री ने कहा कि घेस में मटर की खेती को प्रोत्साहित किया गया था जिससे लाखों रूपए के मटर की बिक्री की गई थी। कुटकी जैसी जड़ी बुटियों से भी लोगों की आर्थिकी में सुधार किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय लोगों के हित को देखते हुए कीड़ा जड़ी नीति बनाकर इसे वैधानिक रूप दिया गया है। नेटवर्क की समस्या के बारे में बताए जाने पर मुख्यमंत्री ने कहा कि आप्टिकल फाईबर के लिए बिजली के खम्भों के प्रयोग को अनुमति दी गई है। मुख्यमंत्री ने बताया कि मुकेश अम्बानी ने उत्तराखण्ड में अस्पताल व स्कूलों में निशुल्क वाई फाई उपलब्ध करवाने की बात कही है।

आजादी के 70 वर्षों बाद उत्तराखंड के इस गांव में पहुंची बिजली

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