विशेष | जानिए क्यों शुरु हुआ था ‘चिपको आंदोलन’, कहां से हुई थी शुरुआत

चमोली/ देहरादून (उत्तराखंड पोस्ट ब्यूरो) पर्यावरण संरक्षण के इरादे से आजादी के बाद के सबसे बड़े आंदोलनों में शुमार चिपको आंदोलन की आज 45वीं वर्षगांठ हैं। चिपको आंदोलन की शुरुआत पर्यावरण को बचाने के लिए हुई थी। आंदोलन की शुरुआत उत्तराखंड के चमोली जिले से हुई थी। उस समय उत्तर प्रदेश में पड़ने वाली अलकनंदा
 
विशेष | जानिए क्यों शुरु हुआ था ‘चिपको आंदोलन’, कहां से हुई थी शुरुआत

चमोली/ देहरादून (उत्तराखंड पोस्ट ब्यूरो) पर्यावरण संरक्षण के इरादे से आजादी के बाद के सबसे बड़े आंदोलनों में शुमार चिपको आंदोलन की आज 45वीं वर्षगांठ हैं।

चिपको आंदोलन की शुरुआत पर्यावरण को बचाने के लिए हुई थी। आंदोलन की शुरुआत उत्तराखंड के चमोली जिले से हुई थी। उस समय उत्तर प्रदेश में पड़ने वाली अलकनंदा घाटी के मंडल गांव में लोगों ने यह आंदोलन शुरू किया। 1973 में वन विभाग के ठेकेदारों ने जंगलों के पेड़ों की कटाई शुरू कर दी थी और तभी चिपको आंदोलन ने जन्म लिया। इसके बाद राज्य के सभी पहाड़ी जिलों में यह आंदोलन फैल गया।

इसका विरोध करने के लिए ग्रामीण विशेष रूप से महिलाएं पेड़ों के चारों तरफ घेरा बनाकर उससे चिपक जाती थीं, इससे पेड़ों को काटना मुश्किल हो गया। चिपको आंदोलन की प्रणेता गौरा देवी थीं और उन्हें हम ‘चिपको विमन’ के नाम से भी जानते हैं।

विशेष | जानिए क्यों शुरु हुआ था ‘चिपको आंदोलन’, कहां से हुई थी शुरुआत

इस आंदोलन में भाग लेने वालों में गौरा देवी के अलावा धूम सिंह नेगी, बचनी देवी और सुदेशा देवी भी शामिल थीं। गांधीवादी सुधारक सुंदरलाल बहुगुणा ने भी इस आंदोलन को दिशा दी और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से अपील की। जिसके बाद पेड़ों को काटने पर रोक लगा दी गई।

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