बहुमत छोड़िए, क्या इन सीटों पर जमानत बचा पाएंगे BJP उम्मीदवार ?

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में सत्ता परिवर्तन का दावा कर रही भाजपा के सामने इस बार दोहरी चुनौती है। राज्य की 17 विधानसभा सीटों पर बागियों की चुनौती से जूझने रही भाजपा के सामने उन सीटों पर अपनी साख बचाने की भी चुनौती है, जिन सीटों पर 2012 के विधानसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार की जमानत
 

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में सत्ता परिवर्तन का दावा कर रही भाजपा के सामने इस बार दोहरी चुनौती है। राज्य की 17 विधानसभा सीटों पर बागियों की चुनौती से जूझने रही भाजपा के सामने उन सीटों पर अपनी साख बचाने की भी चुनौती है, जिन सीटों पर 2012 के विधानसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार की जमानत तक जब्त हो गई थी। अब ख़बरें एक क्लिक पर इस लिंक पर क्लिक कर Download करें Mobile App –https://play.google.com/store/apps/details?id=app.uttarakhandpost

2012 में राज्य की 70 विधानसभा सीटों मे से 31 सीटें जीतने वाली भाजपा तीन सीटों पर चारों खाने चित हो गई थी। यहां पर भाजपा के उम्मीदवार जीत तो दूर अपनी जमानत तक नहीं बचा पाए थे।

बीजेपी उम्मीदवारों की जमानत | चकराता, भगवानपुर व मंगलौर विधानसभा में भाजपा के उम्मीदवारों को न सिर्फ बड़ी हार का सामना करना पड़ा बल्कि वे अपनी जमानत तक नहीं बचा पाए थे।

बहुमत छोड़िए, क्या इन सीटों पर जमानत बचा पाएंगे BJP उम्मीदवार ?

चकराता विधानसभा सीट पर भाजपा प्रत्याशी कमला चौहान सिर्फ 1943 वोट ही पा सकी और तीसरे नंबर पर रही थी। इस सीट पर जीत दर्ज करने वाले कांग्रेस के प्रीतम सिंह ने 33187 वोट हासिल किए।

बहुमत छोड़िए, क्या इन सीटों पर जमानत बचा पाएंगे BJP उम्मीदवार ?

भगवानपुर विधानसभा में भाजपा उम्मीदवार सुरेश राठौर तीसरे स्थान पर रहे थे। राठौर इस सीट पर सिर्फ 10650 वोट ही हासिल कर पाए थे। वहीं जीतने वाले बसपा के सुरेन्द्र राकेश को 36828 वोट मिले थे।

बहुमत छोड़िए, क्या इन सीटों पर जमानत बचा पाएंगे BJP उम्मीदवार ?

मंगलौर विधानसभा में भाजपा प्रत्याशी कलीम सिर्फ 2061 वोट ही हासिल कर पाए थे और चौथे नंबर पर रहे थे। इस सीट पर जीतने वाले बसपा के सरवत करीम अंसारी ने 24706 वोट हासिल किए थे।

बहुमत छोड़िए, क्या इन सीटों पर जमानत बचा पाएंगे BJP उम्मीदवार ?

इस बार के विधानसभा चुनाव में भाजपा बड़ी जीत के साथ सत्ता परिवर्तन का दम तो भर रही है लेकिन भाजपा को 17 विधानसभा सीटों पर ताल ठोक रहे 18 बागियों की चुनौती के साथ ही इन तीन विधानसभा सीटों पर अपनी साख को बचाने की भी चुनौती है।

बहरहाल जनता ने 15 फऱवरी को नेताओं की किस्मत को ईवीएम में कैद कर दिया है ऐसे में 11 मार्च को आने वाले चुनावी नतीजे ही ये बताएंगी कि जनता ने इस बार किस पर भरोसा किया है।

From around the web