हरावक दिन अगो सावन महिन रे, ओ आमा ओ बूबू, ओ दाजू खूब मनया त्योहार रे

आज उत्तराखंड अपना प्रमुख पर्व हरेला मना रहा है। हरेला उत्तराखंड के कुमाऊं का एक प्रमुख त्यौहार है। यह त्यौहार सामाजिक सौहार्द के साथ ही कृषि और मौसम से भी संबंधित है। हरेला का अर्थ है हरियाली। इसके साथ ही हरेला पर्व को भगवान शिव के विवाह से जोड़कर भी देखा जाता है।
अल्मोड़ा (उत्तराखंड पोस्ट) आज उत्तराखंड अपना प्रमुख पर्व हरेला मना रहा है। हरेला उत्तराखंड के कुमाऊं का एक प्रमुख त्यौहार है। यह त्यौहार सामाजिक सौहार्द के साथ ही कृषि और मौसम से भी संबंधित है। हरेला का अर्थ है हरियाली। इसके साथ ही हरेला पर्व को भगवान शिव के विवाह से जोड़कर भी देखा जाता है।
इस पर्व पर उत्तराखंड पोस्ट के सहयोगी भाष्कर तिवारी ने एक सुंदर कविता लिखी है-
हरावक दिन अगो सावन महिन रे
ओ आमा ओ बूबू, ओ दाजू खूब मनया त्योहार रे
पैल दिन डिकार बनाया, शिव पार्वत, गणेशा रे
दूसर दिन हराव चड़ाया ,खूब बड़या पकवान रे, खूब खिलया पकवान रे
गो- घर मे बाटने रया ओ दाजू पकवान रे
जी रया जागी रया, दिन- रात भेट्ने रया य दिया आशीर्वाद रे
सिल पीसने खाने रया य दिया आशीर्वाद रे
ओ दाजू ओ बूबू य अगोछो हरावक दिना रे
सावन आयो भादों आयो खूब खेलिया- कुदियाँ रे
हरियाली बुने रया पुर दुनि-संसार रे
हरावक दिन अगो सावन महिन रे
पर हमसे जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करे , साथ ही और भी Hindi News (हिंदी समाचार ) के अपडेट के लिए हमे गूगल न्यूज़
पर फॉलो करे