धामी सरकार का बड़ा फैसला, उत्तराखंड में कम हुई जमीनों के भू-उपयोग की दरें, पूरी जानकारी यहां

उत्तराखंड में जमीनों के भू-उपयोग (लैंडयूज) परिवर्तन की दरें कम कर दी गई हैं। धामी सरकार के इस फैसले से राज्य में जमीनों पर आवास, औद्योगिक और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बनाने की राह आसान हो गई है।
 
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देहरादून (उत्तराखंड पोस्ट) उत्तराखंड में जमीनों के भू-उपयोग (लैंडयूज) परिवर्तन की दरें कम कर दी गई हैं। धामी सरकार के इस फैसले से राज्य में जमीनों पर आवास, औद्योगिक और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बनाने की राह आसान हो गई है।

इस संबंधी में जारी आदेश के मुताबिक- महायोजना के तहत अब कृषि एवं हरित क्षेत्र की जमीन का मनोरंजन एवं पर्यटन के लिए लैंडयूज बदलने पर सर्किल रेट का 30 के बजाए 10 प्रतिशत, सार्वजनिक एवं अर्द्ध सार्वजनिक में 25 के बजाए 15 प्रतिशत, आवासीय में बदलने पर 50 के बजाए 15 प्रतिशत, औद्योगिक में परिवर्तन के लिए 50 के जाए 15 प्रतिशत और व्यावसायिक लैंडयूज परिवर्तन के लिए 150 के बजाए 15 प्रतिशत लैंडयूज शुल्क लिया जाएगा।

परिवहन एवं संचार की भूमि का मनोरंजन एवं पर्यटन में लैंडयूज बदलने पर 20 के बजाए 10 प्रतिशत, सार्वजनिक एवं अर्द्ध सार्वजनिक में 40 के बजाए 15 प्रतिशत, आवासीय में 60 के बजाए 15 प्रतिशत, औद्योगिक में 50 के बजाए 15 प्रतिशत, व्यावसायिक में 100 के बजाए 15 प्रतिशत शुल्क देना होगा।

वहीं मनोरंजन एवं पर्यटन की भूमि का सार्वजनिक एवं अर्द्ध सार्वजनिक में लैंड यूज बदलने पर सर्किल रेट का 30 के बजाए 15 प्रतिशत, आवासीय में 50 के बजाए 15 प्रतिशत, औद्योगिक में 70 के बजाए 15 प्रतिशत और व्यावसायिक भू-उपयोग परिवर्तन पर 100 के बजाए 15 प्रतिशत शुल्क देना होगा।

सार्वजनिक एवं अर्द्ध सार्वजनिक जमीनों का आवासीय में लैंडयूज परिवर्तन पर 20 के बजाए 15 प्रतिशत, औद्योगिक में परिवर्तन पर 50 के बजाए 15 प्रतिशत, व्यावसायिक में 100 के बजाए 15 प्रतिशत शुल्क देना होगा।

आवासीय जमीनों का औद्योगिक लैंडयूज परिवर्तन पर अब 200 के बजाए 100 प्रतिशत और व्यावसायिक परिवर्तन पर 100 के बजाए 15 प्रतिशत शुल्क देना होगा। औद्योगिक जमीनों का सार्वजनिक एवं अर्द्ध सार्वजनिक में लैंडयूज परिवर्तन पर 15 के बजाए 10 प्रतिशत, आवासीय में परिवर्तन पर 100 के बजाए 15 प्रतिशत, व्यावसायिक में लैंडयूज बदलने पर 100 के बजाए 15 प्रतिशत शुल्क लगेगा। पहले 28 दिसंबर 2016 को सरकार ने महायोजना की भू-उपयोग परिवर्तन की दरें जारी कीं थीं। इनमें कटौती करने के बाद निश्चित तौर पर इसके दूरगामी असर नजर आएंगे।

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