हाईकमान के सामने जाने से पहले हरीश रावत का बड़ा पोस्ट, पुलिस व्यवस्था पर उठाए सवाल
देहरादून(उत्तराखंड पोस्ट) उत्तराखंड कांग्रेस में चल रही अंदरूनी सियासी हलचल के बीच पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के एक के बाद एक सोशल मीडिया पोस्ट ने राजनीतिक चर्चाओं को तेज कर दिया है। कांग्रेस नेतृत्व से मुलाकात से पहले रावत ने अपने करीब छह दशक लंबे राजनीतिक सफर का जिक्र किया और संकेत दिया कि पार्टी की ओर से उनसे कुछ मुद्दों पर जवाब मांगा जा सकता है।
हरीश रावत ने कहा कि कांग्रेस के साथ उनका औपचारिक रिश्ता 14 अक्टूबर को 58 साल पूरा करेगा, जबकि युवा कांग्रेस के कार्यक्रमों से जुड़ने के कारण उनका पार्टी से संबंध करीब 60 साल पुराना है। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए कहा कि इतने लंबे समय में उनसे कई गलतियां हुई होंगी, लेकिन पार्टी ने कभी औपचारिक रूप से उनसे जवाब नहीं मांगा।
कांग्रेस नेतृत्व के सामने अपनी बात रखने को तैयार रावत
रावत ने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि उनके कुछ हालिया कदमों को लेकर कांग्रेस हाईकमान उनसे स्पष्टीकरण मांग सकता है। उनका कहना है कि वह खुद पार्टी नेतृत्व से मिलना चाहते थे, ताकि अपने पक्ष को सीधे सामने रख सकें। उन्होंने इस मुलाकात को अपने राजनीतिक जीवन की एक ऐसी प्रक्रिया बताया, जिसकी कमी अब पूरी होने जा रही है। रावत के इस बयान को उत्तराखंड कांग्रेस में चल रही गुटबाजी और राजनीतिक खींचतान के बीच काफी अहम माना जा रहा है।
धन्यवाद यात्रा को लेकर पुलिस व्यवस्था पर सवाल
हरीश रावत ने अपनी धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा के दौरान पुलिस व्यवस्था का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया। उन्होंने कहा कि उनका विरोध व्यक्तिगत रूप से एस्कॉर्ट मिलने या न मिलने को लेकर नहीं है। उनकी शिकायत यात्रा के दौरान यातायात और काफिले के प्रबंधन को लेकर है।
रावत के मुताबिक, बड़ी संख्या में वाहनों के साथ यात्रा होने के कारण पुलिस की मदद जरूरी थी, ताकि काफिला सुरक्षित और बिना ट्रैफिक बाधा के आगे बढ़ सके। उन्होंने उत्तर प्रदेश के अफजलगढ़ में मिली पुलिस व्यवस्था की तुलना उत्तराखंड के कुछ क्षेत्रों से की।
उनका आरोप है कि जसपुर और काशीपुर में व्यवस्था ठीक नहीं रही। काफिले की गाड़ियों को अलग-अलग रास्तों पर भेजे जाने के कारण यात्रा प्रभावित हुई और काफी समय अतिरिक्त लग गया।
'विपक्ष में होने की वजह से सुविधाओं से वंचित'
पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि राज्य में कई पूर्व मुख्यमंत्रियों और भाजपा से जुड़े प्रमुख नेताओं को पुलिस एस्कॉर्ट सहित दूसरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं, जबकि वह विपक्ष से जुड़े पूर्व मुख्यमंत्री होने के कारण इन सुविधाओं से वंचित हैं। इसी दौरान उन्होंने एक भाजपा विधायक को लेकर भी तीखी टिप्पणी की। रावत ने आरोप लगाया कि एक 'चहेते विधायक' को पुलिस समेत कई सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने अपने बयान में उस विधायक के लिए 'सुपारी किलर' जैसे तीखे शब्दों का इस्तेमाल किया।
नैनीताल SSP पर भी लगाए आरोप
रावत ने नैनीताल के SSP की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े किए। उनका आरोप है कि यात्रा के दौरान पुलिस से सहयोग मांगे जाने के बावजूद अपेक्षित मदद नहीं मिली। उन्होंने कहा कि रामनगर में काफिले की आवाजाही प्रभावित हुई, जिसका असर आगे की यात्रा पर भी पड़ा।
रावत के अनुसार, इस वजह से उनका काफिला कालाढूंगी और हल्द्वानी तक पहुंचने में लगभग साढ़े तीन घंटे देरी से पहुंचा। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यात्रा के दूसरे हिस्सों में उन्हें पुलिस की ओर से बेहतर सहयोग मिला था।
हरीश रावत के इन बयानों के बाद उत्तराखंड कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं। अब सबकी नजर कांग्रेस हाईकमान के साथ होने वाली उनकी मुलाकात और उसके बाद सामने आने वाले घटनाक्रम पर है।
पर हमसे जुड़ने के लिए
यहाँ क्लिक
करे , साथ ही और भी Hindi News (हिंदी समाचार ) के
अपडेट के लिए हमे गूगल
न्यूज़
पर फॉलो करे






