उत्तराखंड में ई-चालान की वसूली बनी चुनौती, जुर्माना नहीं भरने वालों पर होगी सख्ती

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उत्तराखंड में ई-चालान की वसूली बनी चुनौती, जुर्माना नहीं भरने वालों पर होगी सख्ती

उत्तराखंड में ई-चालान की वसूली बनी चुनौती


देहरादून(उत्तराखंड पोस्ट) उत्तराखंड में सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने और यातायात नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए परिवहन विभाग और पुलिस लगातार कार्रवाई कर रहे हैं। नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के चालान काटने के साथ ही जरूरत पड़ने पर वाहनों को सीज भी किया जा रहा है। वहीं, शहरों और सीमावर्ती क्षेत्रों में लगाए गए एएनपीआर (ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन) कैमरों की मदद से भी यातायात नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों के ई-चालान किए जा रहे हैं।

हालांकि, ई-चालान जारी करने के बाद जुर्माने की वसूली विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। जहां मौके पर किए जाने वाले ऑफलाइन चालान का भुगतान कई वाहन चालक कर देते हैं, वहीं ई-चालान होने के बाद बड़ी संख्या में लोग जुर्माने की रकम जमा नहीं कर रहे हैं। इससे चालानों का बकाया लगातार चिंता का विषय बना हुआ है। यह समस्या केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के कई राज्यों में भी ई-चालान की वसूली लंबित है।

ई-चालान का जुर्माना नहीं भरा तो बढ़ सकती हैं मुश्किलें

ई-चालान की लंबित रकम वसूलने के लिए परिवहन विभाग सख्त कदम उठाने की तैयारी कर रहा है। इसके तहत बकाया जुर्माना जमा नहीं करने वाले वाहन स्वामियों की परिवहन सेवाओं पर प्रतिबंध लगाने और जांच के दौरान बकाया मिलने पर वाहन जब्त करने जैसे उपायों पर विचार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य केवल चालान जारी करना नहीं, बल्कि यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों से जुर्माने की वसूली सुनिश्चित करना भी है।

देहरादून में 5 अक्टूबर को हुई सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में भी ई-चालान की वसूली को लेकर चर्चा की गई थी। बैठक में सड़क सुरक्षा से जुड़े कई अहम मुद्दों पर विचार किया गया। परिवहन विभाग अब ई-चालान की वसूली बढ़ाने और बकायेदार वाहन स्वामियों पर प्रभावी कार्रवाई करने की रणनीति तैयार कर रहा है।

अपर परिवहन आयुक्त सनत कुमार सिंह के मुताबिक, बकाया ई-चालान की वसूली के लिए कई विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। इनमें रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (आरसी) का नवीनीकरण और डुप्लीकेट आरसी जारी करने पर रोक लगाने के साथ ही वाहन स्वामी का पता बदलने और वाहन का स्वामित्व हस्तांतरित करने जैसी सेवाओं पर प्रतिबंध लगाने के विकल्प भी शामिल हैं।

बकाया ई-चालान पर इन सेवाओं पर लग सकती है रोक

ई-चालान का जुर्माना जमा नहीं करने वाले वाहन स्वामियों के लिए भविष्य में कई जरूरी परिवहन सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। प्रस्तावित उपायों के तहत वाहन के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट का नवीनीकरण और डुप्लीकेट आरसी जारी करने पर रोक लगाने पर विचार किया जा रहा है। इसके अलावा वाहन स्वामी का पता बदलने और वाहन के स्वामित्व हस्तांतरण की प्रक्रिया भी रोकी जा सकती है।

इसी तरह, बकाया चालान वाले वाहनों के फिटनेस सर्टिफिकेट और प्रदूषण प्रमाणपत्र से जुड़ी सेवाओं पर प्रतिबंध लगाने, वाहन को परिवहन पोर्टल पर ब्लैकलिस्ट करने और बार-बार यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले मामलों में ड्राइविंग लाइसेंस के नवीनीकरण पर रोक लगाने जैसे विकल्प भी शामिल हैं। इसके साथ ही, सड़क पर जांच के दौरान किसी वाहन पर ई-चालान का जुर्माना बकाया मिलने पर उसे जब्त करने की कार्रवाई भी की जा सकती है। इन उपायों का क्रियान्वयन संबंधित नियमों और आधिकारिक निर्देशों के अनुसार किया जाएगा।

उत्तराखंड में 2 लाख से ज्यादा ई-चालान, वसूली काफी कम

उत्तराखंड में भी ई-चालान की वसूली की स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। उपलब्ध विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2026 में अगस्त तक एएनपीआर कैमरों के जरिए राज्य में कुल 2,01,015 ई-चालान किए गए। इनमें से केवल 37,755 चालानों का ही जुर्माना जमा हुआ। यानी जारी किए गए कुल ई-चालानों की तुलना में भुगतान किए गए चालानों की संख्या काफी कम है। ऐसे में लंबित जुर्माने की वसूली परिवहन विभाग के लिए अहम मुद्दा बन गई है।

देहरादून और ऊधम सिंह नगर में सबसे ज्यादा ई-चालान

जिलावार आंकड़ों पर नजर डालें तो उत्तराखंड में सबसे ज्यादा ई-चालान ऊधम सिंह नगर और देहरादून जिलों में किए गए हैं। ऊधम सिंह नगर में 63,854 चालान जारी हुए, जिनमें से 10,845 का जुर्माना जमा किया गया। वहीं, देहरादून जिले में 61,258 ई-चालान किए गए और इनमें से 13,477 चालानों का भुगतान हुआ।

हरिद्वार जिले में 42,523 चालान किए गए, जिनमें से केवल 4,265 का जुर्माना जमा हुआ। नैनीताल में 22,007 चालानों में से 5,603 का भुगतान किया गया। इसके अलावा चंपावत में 5,962 चालान हुए और 1,431 का जुर्माना जमा हुआ। टिहरी जिले में 3,846 चालानों में से 1,585 का भुगतान किया गया, जबकि पौड़ी गढ़वाल में 1,565 चालानों में से 549 चालानों का जुर्माना जमा हुआ।

इन आंकड़ों से साफ है कि ई-चालान जारी होने के बाद भी बड़ी संख्या में वाहन स्वामी जुर्माने का भुगतान नहीं कर रहे हैं। ऐसे में विभाग के सामने चालान काटने के साथ-साथ बकाया रकम की वसूली सुनिश्चित करने की चुनौती है।

ई-चालान की वसूली बढ़ाने की तैयारी में परिवहन विभाग

उत्तराखंड परिवहन विभाग ई-चालान की वसूली को प्रभावी बनाने के लिए नई रणनीति तैयार कर रहा है। इसमें सड़क सुरक्षा की इलेक्ट्रॉनिक निगरानी और ई-चालान व्यवस्था को मजबूत करने के साथ ही बकाया चालान वाले वाहनों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई करने पर जोर दिया जा रहा है।

विभागीय स्तर पर आरसी, फिटनेस, प्रदूषण प्रमाणपत्र, वाहन के स्वामित्व हस्तांतरण और ड्राइविंग लाइसेंस से संबंधित सेवाओं पर प्रतिबंध लगाने जैसे विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। यदि इन उपायों को संबंधित नियमों के तहत लागू किया जाता है, तो चालान का जुर्माना नहीं भरने वाले वाहन स्वामियों को भविष्य में परिवहन संबंधी जरूरी सेवाएं लेने में परेशानी हो सकती है। विभाग का मुख्य उद्देश्य यातायात नियमों के पालन को बढ़ावा देना, सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाना और लंबित ई-चालान की वसूली सुनिश्चित करना है।

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