देहरादून में 25 से 29 अक्टूबर तक साहित्य महाकुंभ, 40 देशों के हिंदी प्रेमी होंगे शामिल

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देहरादून में 25 से 29 अक्टूबर तक साहित्य महाकुंभ, 40 देशों के हिंदी प्रेमी होंगे शामिल

देहरादून में साहित्य महाकुंभ


देहरादून(उत्तराखंड पोस्ट) उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में 25 से 29 अक्टूबर तक पांच दिवसीय लेखक गांव अंतरराष्ट्रीय महोत्सव-2026 का आयोजन किया जाएगा। थानो स्थित लेखक गांव में होने वाले इस महोत्सव में साहित्य, संस्कृति, भारतीय भाषाओं और ज्ञान परंपरा से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा होगी। आयोजन में 40 देशों के हिंदीभाषी विद्यार्थियों की भागीदारी प्रस्तावित है। पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने शुक्रवार को पत्रकार वार्ता कर महोत्सव की औपचारिक घोषणा की।

महोत्सव का मुख्य उद्देश्य हिंदी की वैश्विक पहचान को मजबूत करना, भारतीय भाषाओं की विरासत को संरक्षित करना और भारतीय ज्ञान परंपरा को अंतरराष्ट्रीय मंच पर बढ़ावा देना है। इसमें देश-विदेश के साहित्यकार, शिक्षाविद, कलाकार, पत्रकार और विभिन्न क्षेत्रों की प्रमुख हस्तियां शामिल होंगी।

संयुक्त राष्ट्र में हिंदी को आधिकारिक भाषा बनाने पर होगी चर्चा

महोत्सव की केंद्रीय थीम ‘भारतीय भाषाएं एवं संयुक्त राष्ट्र में हिंदी’ रखी गई है। इसके तहत संयुक्त राष्ट्र में हिंदी को आधिकारिक भाषा का दर्जा दिलाने की संभावनाओं, विदेशों में हिंदी शिक्षण और भारतीय भाषाओं के वैश्विक विस्तार पर मंथन होगा।

रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि भारतीय भाषाएं देश की सांस्कृतिक पहचान और ज्ञान परंपरा का महत्वपूर्ण आधार हैं। इनका संरक्षण करना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना सामूहिक जिम्मेदारी है। महोत्सव के जरिए विभिन्न देशों की भाषाओं और संस्कृतियों के बीच संवाद को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

राज्यपाल करेंगे उद्घाटन, समापन में उपराष्ट्रपति और मुख्यमंत्री की मौजूदगी

कार्यक्रम पुस्तिका के अनुसार, महोत्सव का उद्घाटन 25 अक्टूबर को सुबह 10 बजे होगा। उद्घाटन सत्र में उत्तराखंड के राज्यपाल डॉ. ढाल सिंह बिसेन मुख्य अतिथि होंगे। योगगुरु स्वामी रामदेव की उपस्थिति और मॉरीशस के पूर्व राष्ट्रपति पृथ्वीराज सिंह रूपन की अध्यक्षता निर्धारित है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज सहित अन्य विशिष्ट अतिथियों के भी शामिल होने का कार्यक्रम है।

महोत्सव का समापन 29 अक्टूबर को सुबह 10 बजे होगा। कार्यक्रम पुस्तिका में भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सहभागिता का उल्लेख है।

पहले दिन कला प्रदर्शनी, पुस्तक मेला और बाल सृजन उत्सव

महोत्सव के पहले दिन समकालीन कला, चित्रकला और भारतीय सौंदर्यबोध पर चर्चा होगी। इसके साथ ही चित्रकला प्रदर्शनी और आर्ट गैलरी का शुभारंभ किया जाएगा, जो 29 अक्टूबर तक दर्शकों के लिए खुली रहेगी।

बाल सृजन उत्सव के तहत बच्चों के लिए कविता, कहानी, चित्रकला और निबंध प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। पुस्तक मेले में साहित्य, ज्ञान और रचनात्मकता से संबंधित पुस्तकों को प्रदर्शित किया जाएगा।

पहले दिन समाज और राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की भूमिका, मीडिया एवं डिजिटल संस्कृति, समकालीन कथा साहित्य और साहित्य के डिजिटलीकरण जैसे विषयों पर सत्र होंगे। युवा नेतृत्व, भारतीय भाषाओं के बीच अनुवाद और लेखकों से संवाद के कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। शाम को उत्तराखंड की लोकसंस्कृति को प्रदर्शित करने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे।

एआई, जलवायु परिवर्तन और नई शिक्षा नीति पर भी मंथन

26 अक्टूबर को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के दौर में मानवीय संवेदनाओं, हिंदी कविता, सिनेमा, साहित्य और पत्रकारिता के बदलते स्वरूप तथा भारतीय भाषाओं की राष्ट्रीय पहचान पर चर्चा होगी। विदेशों में हिंदी शिक्षण, जलवायु परिवर्तन, हिमालय के भविष्य, विकसित भारत और भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े विषय भी कार्यक्रम का हिस्सा होंगे। वेद, पुराण और उपनिषद पर आधारित सत्रों के साथ प्रवासी साहित्य और वैश्विक प्रवासी चेतना पर अंतरराष्ट्रीय संवाद भी होगा।

27 अक्टूबर को साहित्य में राष्ट्रबोध, शोध एवं अनुसंधान, युवा लेखन, संस्कृत साहित्य और रमेश पोखरियाल निशंक के रचनात्मक संसार पर चर्चा की जाएगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को विकसित भारत की आधारशिला के रूप में देखने और हिंदी को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने के मुद्दे पर भी विचार-विमर्श होगा। हिंदी को संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक भाषा बनाने से संबंधित विशेष सत्र शाम चार बजे से साढ़े पांच बजे तक प्रस्तावित है।

उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और क्षेत्रीय भाषाओं को मिलेगा मंच

28 अक्टूबर को ‘युवा उत्तराखंड : नई सोच, नई उड़ान’ विषय पर कार्यक्रम की शुरुआत होगी। इसके बाद उत्तराखंड की प्रकृति, संस्कृति, पर्यटन, कुंभ की सांस्कृतिक विरासत, नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन और देवभूमि की लोककला एवं लोकसाहित्य पर चर्चा होगी।

इसी दिन शाम चार से छह बजे तक हिंदी, गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी भाषाओं का कवि सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। वैश्विक युवा संवाद में भारत के विभिन्न राज्यों के चयनित विद्यार्थियों के साथ 30 से अधिक देशों के विद्यार्थियों की भागीदारी भी प्रस्तावित है।

योग, आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा पर होगा विशेष सत्र

महोत्सव के अंतिम दिन 29 अक्टूबर को सुबह आठ से दस बजे तक योग, आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से स्वस्थ जीवन की भारतीय अवधारणा पर विशेष सत्र आयोजित किया जाएगा। इसके बाद सुबह 10 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक समापन समारोह होगा।

पांच दिनों तक चलने वाला यह महोत्सव साहित्य और संस्कृति के साथ भारतीय भाषाओं, युवा प्रतिभाओं, शिक्षा, पर्यावरण और पारंपरिक ज्ञान को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर बनेगा।

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