उत्तराखंड में सरकारी कर्मचारियों के बदले नियम, अब खर्च और संपत्ति का देना होगा हिसाब
देहरादून(उत्तराखंड पोस्ट) उत्तराखंड में सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए संपत्ति की खरीद-बिक्री और वित्तीय लेन-देन से जुड़े नियमों में बदलाव किया गया है। राज्य शासन ने उत्तराखंड राज्य कर्मचारियों की आचरण नियमावली में संशोधन करते हुए चल संपत्ति के लेन-देन की जानकारी देने की सीमा बढ़ा दी है। नए प्रावधानों से कर्मचारियों को छोटी-मोटी खरीदारी की रिपोर्टिंग से राहत मिलेगी, जबकि संपत्ति से जुड़े अन्य नियमों का पालन करना अनिवार्य रहेगा।
राज्य कर्मचारियों की आचरण नियमावली में संशोधन
राज्यपाल की मंजूरी के बाद कार्मिक एवं सतर्कता विभाग ने संशोधित नियमों की अधिसूचना जारी कर दी है। इस संशोधन के तहत कर्मचारियों के लिए चल संपत्ति के क्रय-विक्रय की सूचना देने की सीमा में बदलाव किया गया है। इसका उद्देश्य पुराने नियमों के कारण होने वाली अनावश्यक कागजी कार्रवाई को कम करना है।
अब दो महीने के मूल वेतन से अधिक के लेन-देन की देनी होगी जानकारी
पुराने नियमों के अनुसार, यदि कोई सरकारी कर्मचारी अपने एक महीने के वेतन या 5,000 रुपये, जो भी कम हो, से अधिक मूल्य की चल संपत्ति खरीदता या बेचता था, तो उसे इसकी सूचना संबंधित विभाग को देनी पड़ती थी। मोबाइल, लैपटॉप, टीवी और अन्य घरेलू सामान की खरीद-बिक्री भी इस प्रावधान के दायरे में आ सकती थी।
इस सीमा को लेकर कर्मचारी संगठनों ने आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि मौजूदा समय में बढ़ती महंगाई और वेतनमान को देखते हुए यह सीमा व्यावहारिक नहीं रह गई थी।
अब नियम 22(2) में संशोधन के बाद सरकारी कर्मचारियों को अपने दो महीने के मूल वेतन से अधिक मूल्य की चल संपत्ति के लेन-देन की सूचना एक महीने के भीतर अपने नियुक्ति प्राधिकारी या संबंधित सक्षम प्राधिकारी को देनी होगी।
सरकारी कर्मचारियों के लिए ये नियम भी रहेंगे लागू
1. सरकार से जुड़े लोगों के साथ लेन-देन पर नजर
नियमावली के नियम 2 में नया खंड जोड़कर सरकार के साथ वित्तीय या प्रशासनिक मामलों में जुड़े व्यक्तियों की परिभाषा स्पष्ट की गई है। इसमें सरकार के साथ संविदा, निविदा, आपूर्ति या लाइसेंस संबंधी मामलों में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से जुड़े व्यक्ति, फर्म, कंपनी और ठेकेदार शामिल हैं।
2. संपत्ति के लेन-देन से पहले लेनी होगी मंजूरी
यदि कोई सरकारी कर्मचारी सरकार से लेन-देन करने वाले व्यक्ति के साथ चल या अचल संपत्ति का लेन-देन करता है, तो उसे निर्धारित नियमों के तहत पहले संबंधित प्राधिकारी से स्वीकृति लेनी होगी।
3. संपत्ति का विवरण देना अनिवार्य
नियमों के अनुसार, समूह क, ख और ग के कर्मचारियों को हर साल अपनी संपत्ति का विवरण देना होगा। वहीं, समूह घ के कर्मचारियों को प्रत्येक पांच साल में संपत्ति का ब्योरा प्रस्तुत करना होगा।
4. तैनाती वाले जिले में बीमा एजेंसी को लेकर प्रतिबंध
नियमावली में यह प्रावधान भी है कि कोई सरकारी कर्मचारी अपनी पत्नी या आश्रित रिश्तेदार को उस जिले में बीमा एजेंट के रूप में काम करने की अनुमति नहीं देगा, जहां वह स्वयं तैनात है।
कर्मचारियों को क्या होगा फायदा?
आचरण नियमावली में किए गए संशोधन से सरकारी कर्मचारियों को सामान्य चल संपत्ति की खरीद-बिक्री के मामलों में राहत मिलने की उम्मीद है। अब रिपोर्टिंग की सीमा बढ़ने से कम मूल्य के सामान के लेन-देन पर अनावश्यक कागजी कार्रवाई कम होगी। हालांकि, निर्धारित सीमा से अधिक मूल्य की चल संपत्ति के लेन-देन की सूचना समय पर देना और संपत्ति संबंधी अन्य नियमों का पालन करना जरूरी रहेगा।
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