उत्तराखंड | धधकते वनों के बीच 7 जिलों में ऑरेंज अलर्ट, बरसेंगे बदरा, गिरेंगे ओले

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उत्तराखंड | धधकते वनों के बीच 7 जिलों में ऑरेंज अलर्ट, बरसेंगे बदरा, गिरेंगे ओले

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मौसम विज्ञान केंद्र ने देहरादून, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, टिहरी, पौड़ी और हरिद्वार जिले के कुछ इलाकों में तेज गर्जन के साथ झोंकेदार हवाओं व ओलावृष्टि होने का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।


 

देहरादून (उत्तराखंड पोस्ट) उत्तराखंड में भीषण गर्मी के बीच वनों की आग ने सरकार की भी नींद उड़ा दी है। वनों की आग में जहां करोड़ों की बहुमूल्य वन संपदा जलकर खाक हो रही है, वहीं वन्य जीवों की भी जान पर बन आई है।

इस बीच आग का रिहायशी इलाकों में फैलने का खतरा भी मंडरा रहा है। इस बीच मौसम विभाग ने देहरादून समेत सात जिलों के कुछ इलाकों में तेज गर्जन और आंधी के साथ ओलावृष्टि होने का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

मौसम विज्ञान केंद्र ने देहरादून, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, टिहरी, पौड़ी और हरिद्वार जिले के कुछ इलाकों में तेज गर्जन के साथ झोंकेदार हवाओं व ओलावृष्टि होने का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है जबकि पिथौरागढ़, बागेश्वर, अल्मोड़ा, चंपावत, नैनीताल और ऊधमसिंहनगर में भी कहीं-कहीं बिजली चमकने के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति किलोमीटर की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने के आसार हैं।

धधक रहे हैं जंगल

उत्तराखंड में भीषण गर्मी के बीच वनों की आग ने सरकार की भी नींद उड़ा दी है। वनों की आग में जहां करोड़ों की बहुमूल्य वन संपदा जलकर खाक हो रही है, वहीं वन्य जीवों की भी जान पर बन आई है। इस बीच आग का रिहायशी इलाकों में फैलने का खतरा भी मंडरा रहा है।

उत्तराखंड के जंगलों में लगी आग को बुझाने की कोशिशें अब भी जारी है। इस काम में वायुसेना के हेलीकॉप्टर को लगाया जा चुका है। फिलहाल रुद्रप्रयाग, चमोली पिथौरागढ़, बागेश्वर, अल्मोड़ा, चंपावत, नैनीताल, पौड़ी, टिहरी, देहरादून और उत्तरकाशी में जंगल की आग धधक रही है।

एक्शन में मुख्यमंत्री धामी

आग का विकराल रुप देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी एक्शन में हैं। शनिवार को मुख्यमंत्री ने नैनीताल जिले में वनों में फैली आग का हवाई जायजा लिया और हल्द्वानी में संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक की, इस दौरान धामी ने निर्देश दिए कि आक्समिक परिस्थितियों को छोड़कर सभी वन विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी जाएं। धामी ने वनों में जानबूझकर आग लगाने वालों पर कड़ी कार्रवाई के भी निर्देश दिए हैं।

आग लगने की वजह क्या?

बड़ा सवाल ये है कि उत्तराखंड के जंगल आखिर क्यों धधक रहे हैं। उत्तराखंड में आग इतनी विकराल क्यों हो गई है कि किसी के काबू में ही नहीं आ रही है। एक्सपर्टस के मुताबिक इस बार सर्दियों के सीजन में उत्तराखंड में पर्याप्त बर्फबारी और बरसात नहीं हुई, इसकी वजह से वहां के जंगलों में पर्याप्त नमी नहीं हो पाई। रही-सही कसर तेज होती गर्मी और सूखे ने पूरी कर दी है। अप्रैल का महीना गुजरने के बावजूद उत्तराखंड में उम्मीद के मुताबिक अब तक ढंग की बारिश नहीं हो पाई है, जिसके चलते वहां पर झाड़ियों समेत पेड़-पौधे सूख रहे हैं। इसके चलते वहां पर आग तेजी से फैल रही है।

हवाओं के तेज होने से आग फैलने की स्पीड भी बढ़ रही है और वह तेजी से एक जंगल से होते हुए दूसरे जंगल तक पहुंच रही है, जिसे कंट्रोल कर पाने में वन विभाग के साथ ही अग्निशमन विभाग भी खुद को असहाय पा रहा है।

अब इंद्र देवता की कृपा का इंतजार

आग बुझाने के लिए एयरफोर्स के हेलीकॉप्टर विभिन्न स्रोतों से पानी भरकर जंगलों पर बरसा रहे हैं लेकिन आग इतनी तेजी से फैल रही है कि यह प्रयास नाकाफी साबित हो रहा है। ऐसे में अब सबको इस मुसीबत से राहत पाने के लिए इंद्र देवता की कृपा का इंतजार है। अगर बीच में ढंग की बारिश हो जाती है, तभी यह आग पूरी तरह बुझ पाएगी। शनिवार को देहरादून में बदरा जमकर बरसे लेकिन जिन इलाकों में जंगल धधक रहे हैं वहां अब भी बारिश का इंतजार है।

छुट्टियों पर रोक का आदेश जारी

जंगलों में लगी आग की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए शासन ने वन विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों की छुट्टियों पर रोक लगा दी है। प्रमुख सचिव वन रमेश कुमार सुधांशु की ओर से इस संबंध में आदेश जारी किया गया है।

आदेश में कहा गया, वर्तमान वनाग्नि सत्र के दौरान यह रोक रहेगी। विशेष परिस्थितियों को छोड़कर छुट्टी मंजूर नहीं की जाएगी। शासन की ओर से यह भी आदेश जारी किया गया कि जंगलों की आग की रोकथाम में लापरवाही पाने पर संबंधित वनाधिकारियों और फील्ड कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

अति संवेदनशील, संवेदनशील वन प्रभागों के क्रू-स्टेशनों पर क्रू-टीमों को आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराए जाएं। किसी भी क्रू-स्टेशनों पर मैन पावर और आवश्यक उपकरण की कमी न रहे। जंगल की आग की रोकथाम के लिए स्थानीय जन समुदाय का सहयोग लिया जाए। स्कूल, कालेजों में बैठकें कर छात्र-छात्राओं को वनाग्नि की रोकथाम के प्रति जागरूक किया जाए। वनाग्नि रोकथाम को लेकर पूर्व में जारी दिशा निर्देशों का भी कड़ाई से पालन किया जाए।

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