उत्तराखंड | कुमाऊं से पांचवें मुख्यमंत्री होंगे पुष्कर सिंह धामी, आज लेंगे शपथ

उत्तराखंड में एक बार फिर नेतृत्व परिवर्तन हुआ है। तीरथ सिंह रावत के बाद पुष्कर सिंह धामी को मुख्यमंत्री बनाया गया है। उत्तराखंड के 20 वर्षों के इतिहास में कुमाऊं के पुष्कर सिंह धामी रविवार को 11वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे।
 
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देहरादून (उत्तराखंड पोस्ट) उत्तराखंड में एक बार फिर नेतृत्व परिवर्तन हुआ है। तीरथ सिंह रावत के बाद पुष्कर सिंह धामी को मुख्यमंत्री बनाया गया है। उत्तराखंड के 20 वर्षों के इतिहास में कुमाऊं के पुष्कर सिंह धामी रविवार को 11वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे।

धामी से पहले कुमाऊं ने चार और मुख्यमंत्री दिए हैं। इनमें सबसे पहले भगत सिंह कोश्यारी, दूसरे विजय बहुगुणा, एनडी तिवारी फिर हरीश रावत। बता दें कि अभी तक पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी को छोड़कर कोई भी नेता मुख्यमंत्री के रूप में पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर सका।

उत्तराखंड राज्य गठन के समय भाजपा ने मुख्यमंत्री की कमान नित्यानंद स्वामी के हाथ में सौंपी लेकिन 2002 का चुनाव आते-आते नित्यानंद स्वामी को इस्तीफा देना पड़ा और कुमाऊं के बागेश्वर से ताल्लुक रखने वाले भगत सिंह कोश्यारी विधायक दल के नेता चुने गए। कोश्यारी 30 अक्तूबर 2001 से एक मार्च 2002 तक सीएम रहे। पार्टी 2002 में उनके नेतृत्व में ही चुनाव में गई लेकिन उसे शिकस्त मिली। उन्होंने 123 दिन तक सीएम की कुर्सी संभाली। 

इसके बाद नए CM के रूप में कांग्रेस ने दिग्गज एनडी तिवारी को प्रदेश की कमान सौंपी। तिवारी ने राजनीतिक कौशल का परिचय देते हुए पूरे पांच साल निर्बाध रूप से सरकार चलाई और उनके कार्यकाल में प्रदेश में विकास की गति भी बेहतर रही।

2007 में प्रदेश की जनता ने भाजपा को जनादेश दिया। BJP की सरकार में CM अपनी कुर्सी नही बचा पाए। पहले भुवन चंद्र खंडूरी को CM बनाया गया फिर उनकी जगह रमेश पोखरियाल निशंक आए, लेकिन चुनाव से ठीक पहले फिर खंडूरी को सीएम बनाया गया।

2012 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस हाईकमान ने अप्रत्याशित रूप से यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा के बेटे विजय बहुगुणा को कमान सौंपी। उन्हें छह महीने के भीतर विधानसभा का सदस्य बनना था लिहाजा सितारगंज से भाजपा विधायक चुने गए किरन चंद्र मंडल ने उनके लिए अपनी सीट छोड़ी और कांग्रेस ज्वाइन कर ली।

उपचुनाव में जीतकर बहुगुणा कुमाऊं से तीसरे मुख्यमंत्री बने। केदारनाथ आपदा के बाद प्रदेश की सियासत ने फिर करवट ली और बहुगुणा को 690 दिन बाद ही इस्तीफा देना पड़ा और हरीश रावत ने कुमाऊं से चौथे मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली।

रावत के कार्यकाल में ठीक चुनाव से पहले प्रदेश में सियासी हलचल हुई और पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, यशपाल आर्य, हरक सिंह रावत समेत कई कांग्रेसी क्षत्रपों ने भाजपा का दामन थाम लिया। प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लग गया था। हालांकि कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद हरीश रावत पुन: मुख्यमंत्री बने।

2017 में भाजपा प्रचंड बहुमत से जीती लेकिन चुनाव से एक साल पहले दो बार CM बदल गए, पहले त्रिवेंद्र सिंह रावत और फिर तीरथ सिंह रावत को इस्तीफा देना पड़ा।

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