केंद्रीय गृह व सहकारिता मंत्री अमित शाह से मिले सीएम धामी, किया ये अनुरोध

  1. Home
  2. Country

केंद्रीय गृह व सहकारिता मंत्री अमित शाह से मिले सीएम धामी, किया ये अनुरोध

uuuuuuuuuuu

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह व सहकारिता मंत्री अमित शाह से शिष्टाचार भेंट की। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री से हिमालयी एवं पूर्वोत्तर राज्यों के लिए राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम के सीएसआईएसएसी (कम्पोनेंट-1)  में अनुमन्य अनुदान को 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत किये जाने का अनुरोध किया।


 

नई दिल्ली (उत्तराखंड पोस्ट) मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह व सहकारिता मंत्री अमित शाह से शिष्टाचार भेंट की। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री से हिमालयी एवं पूर्वोत्तर राज्यों के लिए राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम के सीएसआईएसएसी (कम्पोनेंट-1)  में अनुमन्य अनुदान को 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत किये जाने का अनुरोध किया।

  मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य में राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम द्वारा सहायतित एवं सहकारिता द्वारा अनुदानित CSISAC (Component-1) के तहत राज्य समेकित सहकारी विकास परियोजना संचालित की जा रही है। राज्य में सहकारी क्षेत्र में गठित विभिन्न सहकारी संस्थाओं को व्यवसायिक रूप से शुद्ध इकाई बनाने के लिए राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम को प्रदेश सरकार द्वारा एक महत्वाकांक्षी योजना प्रस्तुत की गयी है। 

इसमें संयुक्त सहकारी खेती व अन्य कृषि एवं सहवर्ती व्यवसायों को सामूहिक रूप से उत्पादन वृद्धि तथा उनका मूल्य संवर्द्धन कराते हुए किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने की व्यवस्था की गयी। इसकी सैद्धान्तिक एवं वित्तीय स्वीकृति राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम द्वारा प्रदान की थी।  उक्त स्वीकृत योजना का शुभारम्भ प्रधानमंत्री जी द्वारा किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विषम भौगोलिक परिस्थितियां होने के फलस्वरूप सहकारी समितियों को व्यावसायिक इकाई के रूप में स्थापित किया जाना अत्यन्त चुनौतीपूर्ण है तथा इसके लिए अतिरिक्त सहायता की आवश्यकता होगी।

 मुख्यमंत्री ने केंद्रीय गृह व सहकारिता मंत्री से हिमालयी एवं पूर्वोत्तर राज्यों के लिए राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम के CSISAC (Component-1) में अनुमन्य अनुदान को 20 प्रतिशत के स्थान पर 40 प्रतिशत किये जाने का अनुरोध किया। जिससे कि राज्य की सहकारी संस्थायें ऋण धनराशि वहन करने में समर्थ हो सके।