SKT Podcast में गडकरी के बड़े खुलासे, इथेनॉल से लेकर आरोपों तक हर सवाल का जवाब

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SKT Podcast में गडकरी के बड़े खुलासे, इथेनॉल से लेकर आरोपों तक हर सवाल का जवाब

Nitin Gadkari

गडकरी ने अपने परिवार और बेटों पर लगे लाभ पहुँचाने के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है,। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश की 550 इथेनॉल इंडस्ट्रीज में उनके बेटों की कंपनी की हिस्सेदारी केवल 0.05% है,। उन्होंने जोर देकर कहा कि इथेनॉल के टेंडर पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा निकाले जाते हैं और इसकी दरें प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में कैबिनेट मीटिंग में तय होती हैं, जिसमें किसी को 'फेवर' करने की कोई गुंजाइश नहीं होती।


नई दिल्ली (Uttarakhand Post) भारत में एथेनॉल नीति को लेकर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने शालिनी कपूर तिवारी के Podcast में खुलकर बात की। साथ ही उन पर लग रहे आरोपों पर भी बेबाकी से जवाब दिया। नितिन गडकरी ने इथेनॉल को भारत की अर्थव्यवस्था और पर्यावरण के लिए एक क्रांतिकारी समाधान के रूप में प्रस्तुत किया है। 

आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ: गडकरी के अनुसार, भारत हर साल लगभग ₹22 लाख करोड़ का जीवाश्म ईंधन (fossil fuel) आयात करता है। उनका उद्देश्य इस भारी-भरकम राशि को देश से बाहर जाने से रोकना और इसे भारत की जनता, विशेषकर किसानों की जेब में पहुँचाना है। साथ ही, वे बताते हैं कि दिल्ली जैसे शहरों में 40% वायु प्रदूषण का मुख्य कारण जीवाश्म ईंधन है, जिसे इथेनॉल के उपयोग से समाप्त किया जा सकता है।

किसानों की भूमिका (अन्नदाता से ऊर्जा-दाता): गडकरी का दृष्टिकोण है कि देश का किसान अब केवल 'अन्नदाता' नहीं, बल्कि 'ऊर्जा-दाता' और 'ईंधन-दाता' बनेगा। इथेनॉल का उत्पादन गन्ने के रस, मोलासेस, टूटे हुए चावल, मक्के और यहाँ तक कि बाँस से भी किया जा सकता है। उदाहरण के तौर पर, उन्होंने बताया कि मक्के से इथेनॉल बनाने के निर्णय के कारण किसानों को मक्के का भाव ₹1100 से बढ़कर ₹2600-2700 प्रति क्विंटल तक मिलने लगा है।

तकनीकी और वैश्विक उदाहरण: वे ब्राजील का उदाहरण देते हैं जहाँ 1949 से इथेनॉल का उपयोग हो रहा है और वर्तमान में वहाँ 27% इथेनॉल पेट्रोल में मिलाया जाता है, जिससे वाहनों में कोई समस्या नहीं आती। भारत में भी टोयोटा, होंडा और हुंडई जैसी कंपनियाँ इसी तकनीक पर काम कर रही हैं।

विवादों और आरोपों पर स्पष्टीकरण: गडकरी ने अपने परिवार और बेटों पर लगे लाभ पहुँचाने के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है,। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश की 550 इथेनॉल इंडस्ट्रीज में उनके बेटों की कंपनी की हिस्सेदारी केवल 0.05% है,। उन्होंने जोर देकर कहा कि इथेनॉल के टेंडर पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा निकाले जाते हैं और इसकी दरें प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में कैबिनेट मीटिंग में तय होती हैं, जिसमें किसी को 'फेवर' करने की कोई गुंजाइश नहीं होती।

दुष्प्रचार का खंडन: उन्होंने उन सोशल मीडिया रील और दावों को 'पेड न्यूज़' और 'भ्रामक प्रचार' बताया जिनमें कहा गया था कि इथेनॉल से गाड़ियाँ खराब हो रही हैं या इसमें पानी मिलाया जाता है,। उनके अनुसार, ऑटोमोबाइल कंपनियों (OEMs) और ARAI ने खुद इसकी पुष्टि की है कि इथेनॉल सुरक्षित है।

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