भारत के पास 60 दिन का कच्चे तेल का भंडार, अमेरिका-रूस-ऑस्ट्रेलिया से 8 लाख मीट्रिक टन LPG की खरीद
दिल्ली ( उत्तराखंड पोस्ट) भारत ने ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर एक अहम उपलब्धि हासिल की है। सरकार के अनुसार, देश के पास अब करीब 60 दिनों की कच्चे तेल की आपूर्ति को संभालने लायक भंडार मौजूद है। इसके साथ ही, भारत ने अमेरिका, रूस और ऑस्ट्रेलिया से 8 लाख मीट्रिक टन LPG कार्गो भी सुरक्षित कर लिया है। यह कदम ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है जब वैश्विक ऊर्जा बाजार लगातार उतार-चढ़ाव का सामना कर रहे हैं।
ऊर्जा सुरक्षा पर सरकार का फोकस
सरकार ने साफ संकेत दिया है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को लेकर पहले से ज्यादा सतर्क और तैयार है। कच्चे तेल के भंडार का 60 दिनों तक पहुंचना देश की रणनीतिक क्षमता को मजबूत करता है। इससे किसी भी अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति बाधा या कीमतों में अचानक वृद्धि की स्थिति में भारत को राहत मिल सकती है। भारत अपनी बड़ी आबादी और तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था की वजह से ऊर्जा आयात पर काफी हद तक निर्भर है। ऐसे में पर्याप्त भंडार बनाए रखना आर्थिक स्थिरता के लिए बेहद जरूरी माना जाता है।
अमेरिका, रूस और ऑस्ट्रेलिया से LPG खरीद
सरकार के मुताबिक, 8 लाख मीट्रिक टन LPG कार्गो की सुरक्षा अमेरिका, रूस और ऑस्ट्रेलिया जैसे प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं से की गई है। यह व्यवस्था घरेलू रसोई गैस आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने में मदद करेगी। त्योहारों और बढ़ती मांग के समय में यह कदम खास तौर पर उपयोगी साबित हो सकता है। LPG की उपलब्धता भारत में करोड़ों परिवारों के लिए रोजमर्रा की जरूरत से जुड़ी है। इसलिए इसकी निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल रहा है।
वैश्विक बाजार का असर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और LPG की कीमतें भू-राजनीतिक तनाव, समुद्री परिवहन जोखिम और उत्पादन नीतियों से प्रभावित होती हैं। हाल के वर्षों में कई बार सप्लाई चेन बाधित होने से ऊर्जा आयातक देशों पर दबाव बढ़ा है। भारत द्वारा पहले से भंडार मजबूत करना और विभिन्न देशों से कार्गो सुरक्षित करना इसी जोखिम को कम करने की रणनीति का हिस्सा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत की सौदेबाजी की स्थिति भी बेहतर होगी। विविध स्रोतों से आयात करने की नीति देश को किसी एक क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भर होने से बचाती है।
घरेलू उपभोक्ताओं को राहत
ऊर्जा आपूर्ति का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ता है। अगर भंडार पर्याप्त रहे और आयात चैनल मजबूत हों, तो उपभोक्ताओं को कीमतों में अचानक झटकों से कुछ राहत मिल सकती है। LPG की स्थिर आपूर्ति खासकर मध्यम और निम्न आय वर्ग के लिए अहम है।
सरकार का यह दावा ऐसे समय आया है जब वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। भारत की यह तैयारी बताती है कि वह भविष्य की ऊर्जा चुनौतियों से निपटने के लिए बफर रणनीति अपना रहा है।
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