सुपर एल नीनो 2026: भारत पर मंडराता जलवायु संकट
दिल्ली ( उत्तराखंड पोस्ट) सुपर एल नीनो 2026 प्रशांत महासागर में विकसित हो रही एक शक्तिशाली मौसमी घटना है, जो वैश्विक तापमान रिकॉर्ड तोड़ सकती है। अमेरिकी एजेंसी NOAA और IMD जैसी संस्थाओं ने इसके संकेत दिए हैं, जो भारत के मानसून, कृषि और गर्मी पर गहरा प्रभाव डाल सकता है।
सुपर एल नीनो क्या है?
एल नीनो ENSO चक्र का हिस्सा है, जिसमें प्रशांत महासागर के पूर्वी भाग का समुद्री तापमान सामान्य से 0.5 डिग्री सेल्सियस अधिक रहता है। जब यह तापमान 2.5 डिग्री सेल्सियस या इससे ज्यादा बढ़ जाता है, तो इसे 'सुपर एल नीनो' कहा जाता है, जो हर 10-15 वर्ष में आता है। यह हवा की दिशा बदल देता है, जिससे वैश्विक मौसम पैटर्न अस्त-व्यस्त हो जाते हैं।timesnowhindi+2
2026 में सुपर एल नीनो की स्थिति
NOAA के पूर्वानुमान के अनुसार, 2026 के अंत तक एल नीनो के मजबूत होने की 61% संभावना है, जो सुपर स्तर तक पहुंच सकता है। वर्तमान में प्रशांत का तापमान तेजी से बढ़ रहा है, हालांकि गर्मियों तक न्यूट्रल रहने की उम्मीद है। जलवायु मॉडल्स 2027 तक इसके प्रभाव को रिकॉर्ड गर्मी से जोड़ते हैं।
भारत पर प्रभाव: गर्मी और लू
भारत में 2026 की गर्मियां अभूतपूर्व होंगी, तापमान 45-50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। IMD के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. ई. धर्मराजू के अनुसार, मई-जून में व्यापक लू और सूखे की स्थिति बनेगी। जलाशयों में पानी आधे से कम बचा है, जो गर्मी की मार को और गहरा बनाएगा।
मानसून पर खतरा
एल नीनो वर्षों में भारत का मानसून सामान्य से 92-94% रहता है, खासकर मध्य और पश्चिमी क्षेत्रों में कमी। स्काईमेट ने 6% कम बारिश का अनुमान लगाया है, जिससे जून-सितंबर में सूखा बढ़ेगा। इससे चावल, दालें जैसी फसलों को नुकसान होगा
कृषि और अर्थव्यवस्था को नुकसान
कम मानसून से खाद्य उत्पादन घटेगा, जिससे मुद्रास्फीति और ग्रामीण आय प्रभावित होगी। किसानों को छोटी अवधि की फसलें और जल-संरक्षण तकनीक अपनाने की सलाह दी जा रही है। जल संकट गहराएगा, नदियों-तालाबों में पानी की कमी पेयजल और सिंचाई प्रभावित करेगी।newsx+3
तैयारी के उपाय
सरकार को जल संरक्षण, वैकल्पिक सिंचाई और जलवायु-प्रतिरोधी बीजों पर जोर देना चाहिए। IMD का दूसरा मानसून पूर्वानुमान मई में आएगा, जो स्थिति स्पष्ट करेगा। व्यक्तिगत स्तर पर गर्मी से बचाव और जल बचत जरूरी है।
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