'हरदा' को क्या आभास हुआ ? क्यों लिखा- खैर देखता हूं, मेरे पास समय कितना बचा है

इस अपील के आखिर में हरीश रावत लिखते हैं- खैर देखता हूं, मेरे पास समय कितना बचा है, जो समझने के लिए काफी है कि कोरोना से जंग के बीच उनके मन में कई आशंकाएं हैं।
 
'हरदा' को क्या आभास हुआ ? क्यों लिखा- खैर देखता हूं, मेरे पास समय कितना बचा है

नई दिल्ली (उत्तराखंड पोस्ट) एम्स दिल्ली में भर्ती कोरोना संक्रमित उत्तराखंड पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सल्ट विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस गंगा पंचोली के समर्थन में सल्ट विधानसभा के मतदाताओं से एक अपील की है।

हरीश रावत ने अपनी इस अपील के माध्यम से न सिर्फ एक तरह से 2022 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव का घोषणापत्र जनता के सामने रख दिया है बल्कि हरीश रावत को उम्मीद है कि उत्तराखंड भी कहेंगे, ‘हरदा हमारा...फिर आला’। इस अपील के आखिर में हरीश रावत लिखते हैं- खैर देखता हूं, मेरे पास समय कितना बचा है, जो समझने के लिए काफी है कि कोरोना से जंग के बीच उनके मन में कई आशंकाएं हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत अपने फेसबुक पेज पर लिखते हैं- प्रातः भोर के सपने के साथ समाचार मिला कि आनन्द रावत, गंगा पंचोली जी के साथ चुनाव प्रचार में लगे हैं। मोहनरी की धार से सल्ट के पीले-पीले, लाल-लाल मिर्च भरे खेत व छतें, लाल-लाल चौलाई, झुंगरा-मडुवा, हल्दी, अदरख, कद्दू, गडेरी, भट्ट, मास, जखिया, तिल, मेथी, चिंतोली के आस-पास भरे-भरे गोल्डन नींबू, माॅ के नथ के कुन्दन से दमकते लाल-लाल माल्टे ,लखचौरा के अखरोट, काफल, लाल-लाल बुरांस, हिंसालू, किल्मोड़े, घिंघारू, केसुवा न जाने क्या-क्या दुमक-दुमक झकझोरने लगे। छोटी-छोटी बद्री गायें, हजारों रूपया किलो घी तथा जैविक मीट के लिये प्रारम्भ की गई मुख्यमंत्री बकरी पालन योजना के घुंघरू भी बजने लगे हैं और न जाने क्या-क्या ध्वनियां मुझे, मेरे सपनों के प्रयासों को याद दिलाने लगी हैं। कब गांव की धार व गाड़ के उत्पाद धान, गेहूं, गन्ना व दूध की तरह बिकेंगे, कब फिर इन उत्पादों का खरीद मूल्य व बोनस मूल्य की टन-टन घंटियां बजेंगी। मुझे खुशी है कि मोहनरी धार का सपना कुछ अच्छी सोच से गुदगुदाया और गुनगुनाया है।


 

हरीश रावत आगे लिखते हैं- मेरा भी हर सपना पूरा नहीं हुआ है, ‘‘मंगव’’ मंगलगीत गायकों तक आज भी पेंशन नहीं मिल रही है। खून की कमी व प्रदर से आज भी सल्ट में मरने वालों की संख्या बच्चा व वृद्ध मृत्यु दर से लड़ने के लिये मुझे सभी महिलाओं के लिये अनिवार्य पौष्टिक आहार योजना व अनिवार्य गरीब पेंशन योजना लागू करवाना, 100 यूनिट बिजली व 25 लीटर पानी मुफ्त देना है, पेंशनों की राशि को 2 हजार रूपये तक बढ़ती हुई देखना है, हर युवा के हाथ में टैक्नोशाली मोबाइल देना है, एक झटके में मार्च 2023 तक देना है।

पूर्व सीएम आगे लिखते हैं- नौकरी की आशा में युवाओं को एक वर्ष से अधिक नहीं रहना पडे़गा, ऐसा होने पर विभागाध्यक्ष जिम्मेदार होंगे। हर दो वर्ष बाद 10 प्रतिशत तक नये पद बढ़ेंगे, जैसे हर बरसात में गेठी की बेल पर लगे दानों की बढ़ती हुई संख्या को देखकर मन ही मन बहुत खुश होता हूं। जीवन के साथ चल रहा कोरोना युद्ध के बावजूद मेरे ये सारे सुनहरे सपने मुझे उल्लासित कर रहे हैं, आओ इन सपनों को देखकर मेरा भी दिल बहलाओ, क्या सैकड़ों उत्तराखण्डी कंठ सामूहिक रूप से समवेत स्वर में गुन-गुनाकर थोड़ा जोर से कहेंगे कि ‘‘हरदा हमारा फिर आला.....हमारा स्वैण को पूरा करने के लिये नये सिरे से लडेंगे..."  खैर देखता हॅू, मेरे पास समय कितना बचा है!

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