मलक्का स्ट्रेट भारत के लिए क्यों इतना महत्वपूर्ण है, क्या इसके आसपास भी खतरा मँडरा रहा है?

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मलक्का स्ट्रेट भारत के लिए क्यों इतना महत्वपूर्ण है, क्या इसके आसपास भी खतरा मँडरा रहा है?

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भारत के समुद्र आधारित व्यापार का लगभग 60 प्रतिशत और उसके तरल प्राकृतिक गैस (LNG) आयात का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मलक्का स्ट्रेट से गुजरता है। हाल ही में अमेरिका और इंडोनेशिया के बीच हुई एक डील ने भारत की चिंता और बढ़ा दी है।


 

दिल्ली ( उत्तराखंड पोस्ट) ईरान से युद्ध के दौरान होर्मुज स्ट्रेट बाधित तो हुआ ही था अमेरिका ने अब इंडोनेशिया के साथ मिलकर मलक्का स्ट्रेट की ओर फोकस बढ़ा दिया है, जो दुनिया के कारोबार की मुख्य धमनी मानी  जाती है। बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, मलक्का से हर साल 90,000 जहाज गुजरते हैं। यह स्ट्रेट हिंद महासागर और प्रशांत महासागर को भी जोड़ता है। यह तेल से लेकर हर तरह की वस्तुओं के लिए कारोबारी रास्ता है। यह दुनिया के 40 फीसदी कारोबार का अहम रूट है। ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब भारत के पड़ोस में स्थित मलक्का की खाड़ी पर फोकस कर सकते हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि अगर मलक्का की भी नाकाबंदी हुई तो भारत पर क्या असर पड़ सकता है

       

   अमेरिका-इंडोनेशिया में डील, भारत की बढ़ी चिंता

  • एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के अनुसार, हाल ही में अमेरिका और इंडोनेशिया ने एक बड़े रक्षा सहयोग पर दस्तखत किए हैं। इसके मुताबिक, अमेरिका को अब अपने सैन्य विमानों के ऑपरेशन को इंडोनेशिया के एयरस्पेस तक पहुंच मिल गई है। रिपोर्ट के अनुसार, इस तरह की पहुंच से अमेरिका अब मलक्का की खाड़ी में होने वाली गतिविधियों की निगरानी भी कर सकेगा।
  • अमेरिका-इंडोनेशिया जो रक्षा डील हुई है,
  •  उसकी टाइमिंग बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि अमेरिका ने इस वक्त होर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी भी बढ़ा दी है। वह प्रशांत महासागर की स्ट्रेटेजी पर चल रहा है, जिसके तहत मिडिल ईस्ट के होर्मुज के अलावा दुनिया के बाकी चोक प्वाइंट्स पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। भारत की चिंता इसी बात को लेकर है।

         भारत के लिए कितना महत्वपूर्ण है मलक्का

  • भारत के समुद्र आधारित व्यापार का लगभग 60 प्रतिशत और इसके तरल प्राकृतिक गैस (LNG) आयात का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मलक्का स्ट्रेट से गुजरता है।
  • मलक्का के पास ही भारत का नया रणनीतिक कमांड अंडमान-निकोबार कमांड भी है। भारत निकोबार द्वीप समूह में ही इसीलिए सिंगापुर जैसा एक रणनीतिक शहर बसाने जा रहा है। यह ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट है, जो गलाथिया खाड़ी के पास है।
  • यहां पर सिविल-मिलिट्री दोहरे इस्तेमाल के लिए रणनीतिक एयरपोर्ट है। यहां पर एक एकीकृत शहर बसाया जाएगा, जो करीब 166 वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैला होगा। यह बंगाल की खाड़ी से लेकर हिंद महासागर के इलाके को कवर करता है।

         कहां है मलक्का स्ट्रेट, पहले इसे जानते हैं

  • मलक्का स्ट्रेट भारत के बेहद करीब है। यह अंडमान सागर (हिंद महासागर) और दक्षिण चीन सागर (प्रशांत महासागर) को जोड़ने वाला जलमार्ग है। यह इंडोनेशियाई द्वीप के बीच स्थित है। पश्चिम में सुमात्रा और पूर्व में प्रायद्वीपीय (पश्चिमी) मलेशिया और सुदूर दक्षिणी थाईलैंड से घिरा यह स्ट्रेट करीब 65,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है।
  • यह स्ट्रेट करीब 800 किमी लंबा है, जिसकी चौड़ाई दक्षिण में केवल 65 किमी है। उत्तर की ओर सुमात्रा के तट पर स्थित वे द्वीप और मुख्य भूमि पर स्थित क्रा इस्तमुस के बीच इस स्ट्रेट की चौड़ाई 250 किमी तक बढ़ जाती है।

       भारत कर रहा है मलक्का स्ट्रेट की गश्त!

  • 2-4 सितंबर 2025 में सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वॉन्ग के तीन दिवसीय भारत दौरे ने समुद्री सुरक्षा में एक नया आयाम दिया। पहली बार सिंगापुर ने मलक्का जलसंधि की गश्त में भारत की भूमिका को हरी झंडी दिखाकर क्षेत्रीय सामरिक रिश्तों को और गहरा किया।
  • बढ़ती समुद्री चुनौतियों के बीच यह कदम सिर्फ सुरक्षा को बल्कि भरोसे को भी मजबूत करता नजर आता है। सिंगापुर ने मलक्का स्ट्रेट की गश्त के जरिए भारत की भूमिका को औपचारिक रूप से स्वीकार किया।

        मलक्का को अभी कौन कंट्रोल करता है

  • मलेशिया और सिंगापुर के साथ इंडोनेशिया मलक्का की खाड़ी को कंट्रोल करता है। मलक्का से होकर पूरी दुनिया का 40 फीसदी कारोबार होता है। होर्मुज से जहां दुनिया का 20 फीसदी और भारत का करीब 50 फीसदी तेल-गैस गुजरता है। वहीं, मलक्का से तेल, कार, सेमीकंडक्टर्स और हर तरह की वस्तुओं को लेकर जहाज गुजरते हैं।

 

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