उत्तराखंड में बच्चों पर वायरल अटैक, अस्पतालों में बढ़े HFMD के मामले
देहरादून: उत्तराखंड में मौसम में बदलाव के साथ बच्चों में वायरल संक्रमण के मामले सामने आ रहे हैं। अस्पतालों की ओपीडी में बुखार, सर्दी, खांसी और जुकाम से पीड़ित बच्चों की संख्या बढ़ रही है। इसके साथ ही कुछ बच्चों में हैंड-फुट-माउथ डिजीज (HFMD) के मामले भी सामने आए हैं। डॉक्टरों ने अभिभावकों को बच्चों की सेहत पर विशेष ध्यान देने और संक्रमण के लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की है।
दून मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. अशोक के अनुसार, इन दिनों वायरल संक्रमण से पीड़ित बच्चे इलाज के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं। इनमें प्रतिदिन तीन से चार मामले हैंड-फुट-माउथ डिजीज के भी सामने आ रहे हैं। यह एक संक्रामक वायरल बीमारी है, जो मुख्य रूप से छोटे बच्चों को प्रभावित करती है।
क्या है हैंड-फुट-माउथ डिजीज?
हैंड-फुट-माउथ डिजीज एक वायरल संक्रमण है, जिसमें बच्चों के मुंह के अंदर, हथेलियों और पैरों के तलवों पर लाल दाने, छाले या चकत्ते दिखाई दे सकते हैं। कुछ बच्चों को बुखार और गले में दर्द की शिकायत भी हो सकती है।
यह संक्रमण संक्रमित व्यक्ति के संपर्क, उसकी लार, नाक के स्राव, छालों के तरल पदार्थ या संक्रमित मल के संपर्क से फैल सकता है। स्कूलों और घरों में बच्चों के एक-दूसरे के संपर्क में रहने के कारण संक्रमण फैलने की आशंका रहती है।
मुंह, हाथ और पैरों पर दाने दिखें तो क्या करें?
विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि बच्चे के मुंह के अंदर, हथेलियों या पैरों के तलवों पर लाल दाने अथवा छाले दिखाई दें, तो अभिभावकों को सतर्क हो जाना चाहिए। ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय बाल रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।
बीमारी के दौरान बच्चे को पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ दें और आराम करने दें। मुंह में छाले होने पर खाना-पीना मुश्किल हो सकता है, इसलिए बच्चे को उसकी सहनशीलता के अनुसार तरल और नरम भोजन दिया जा सकता है। बिना डॉक्टर की सलाह के बच्चे को दवा न दें।
यदि बच्चा पानी नहीं पी पा रहा है, पेशाब कम कर रहा है, बहुत सुस्त है या उसकी हालत बिगड़ रही है, तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें।
संक्रमण से बचने के लिए अपनाएं ये सावधानियां
हैंड-फुट-माउथ डिजीज को फैलने से रोकने के लिए साफ-सफाई और संक्रमित बच्चे की उचित देखभाल जरूरी है। अभिभावक इन उपायों को अपना सकते हैं:
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हाथों की सफाई: बच्चों को साबुन और पानी से नियमित रूप से हाथ धोने की आदत डालें, खासकर शौचालय के बाद और खाना खाने से पहले।
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संक्रमित बच्चे की देखभाल: बच्चे के लक्षणों के दौरान उसे स्कूल या डे-केयर भेजने से पहले डॉक्टर और संस्थान के दिशा-निर्देशों का पालन करें।
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सामान साझा करने से बचें: संक्रमित बच्चे के बर्तन, तौलिया और अन्य निजी सामान अलग रखें।
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खिलौनों की सफाई: बच्चों के खिलौनों और बार-बार छुई जाने वाली सतहों को नियमित रूप से साफ करें।
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पर्याप्त तरल और पौष्टिक भोजन: बच्चे को पानी, तरल पदार्थ और उसकी स्थिति के अनुसार पौष्टिक आहार दें।
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लक्षणों पर नजर रखें: बुखार, मुंह में छाले, शरीर पर दाने या पानी की कमी के संकेत दिखने पर डॉक्टर से संपर्क करें।
बदलते मौसम में बच्चों की सेहत का रखें ध्यान
डॉक्टरों का कहना है कि मौसम में बदलाव के दौरान बच्चों में विभिन्न प्रकार के वायरल संक्रमण हो सकते हैं। छोटे बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अभी विकसित हो रही होती है, इसलिए उनकी स्वच्छता, खानपान और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।
दून मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अशोक ने अभिभावकों को सलाह दी है कि वे बीमारी के शुरुआती लक्षणों को गंभीरता से लें और संक्रमण को दूसरे बच्चों तक फैलने से रोकने के लिए जरूरी सावधानियां अपनाएं। बच्चों को अपने स्तर पर दवा देने के बजाय चिकित्सकीय परामर्श के आधार पर उपचार कराना चाहिए।
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