उत्तराखंड कांग्रेस के दिग्गजों का दिल तोड़ने वाली ख़बर, फार्मूले ने बढ़ाई मुश्किल!

कांग्रेस के इस फार्मूले का सबसे ज्यादा असर पार्टी के दिग्गज नेताओं पर इसलिए पड़ेगा क्योंकि पार्टी के कई बड़े नेता खुद के साथ अपनी पत्नी, बेटा या बेटी को चुनाव लड़ाने के इच्छुक हैं और इसके लिए पार्टी से टिकट की आस लगाए बैठे हैं।
 
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देहरादून (उत्तराखंड पोस्ट) उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो गया है, ऐसे में हर कोई इस इंतजार में है कि राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टियां टिकटों का ऐलान कब करेंगे और किसे अपना उम्मीदवार बनाएंगी।

खबर उत्तराखंड कांग्रेस से मिल रही है कि पार्टी ने टिकटों के बंटवारे से पहले एक बड़ा फैसला लेने की तैयारी कर ली है, जिसका सीधा असर पार्टी के दिग्गज नेताओं पर पड़ने वाला है।

दरअसल उत्तराखंड में कांग्रेस पंजाब की तरह 'एक परिवार, एक टिकट' का फॉर्मूला अपनाने की तैयारी कर रही है। कांग्रेस स्क्रीनिंग कमेटी के अध्यक्ष अविनाश पांडेय ने कहा कि पार्टी ने तय किया है कि एक परिवार को एक ही टिकट मिलेगा।

हालांक इसकी आधिकारिक घोषणा अभी कांग्रेस ने नहीं की है लेकिन माना जा रहा है कि एक दो दिन में पार्टी इसकी घोषणा कर सकती है। कांग्रेस कैंपेन कमेटी के चैयरमैन हरीश रावत पहले ही कह चुके हैं कि राज्य की 70 विधानसभा सीटों में से 45 विधानसभा सीटों पर कांग्रेस के उम्मीदवार तय हैं और जल्द उनके नामों का ऐलान कर दिया जाएगा। ऐसे में माना जा रहा है कि उम्मीदवारों के ऐलान से पहले कांग्रेस साफ कर सकती है कि पंजाब की तरह उत्तराखंड में भी 'एक परिवार, एक टिकट' का फॉर्मूला लागू होगा।

कांग्रेस के इस फार्मूले का सबसे ज्यादा असर पार्टी के दिग्गज नेताओं पर इसलिए पड़ेगा क्योंकि पार्टी के कई बड़े नेता खुद के साथ अपनी पत्नी, बेटा या बेटी को चुनाव लड़ाने के इच्छुक हैं और इसके लिए पार्टी से टिकट की आस लगाए बैठे हैं।

सूत्रों के अनुसार उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत अपने अलावा अपनी बेटी के लिए विधानसभा का टिकट मांग रहे हैं तो वहीं नेता विपक्ष प्रीतम सिंह भी अपने बेटे के लिए टिकट की मांग कर रहे हैं। वहीं उत्तराखंड कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष यशपाल आर्य भी अपने साथ अपने बेटे के लिए टिकट की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा कुछ और नेता हैं जो अपने परिवार के लोगों के लिए टिकट की आस लगाए बैठे हैं और इस जुगत में भी लगे हैं।

हालांकि इस फार्मूले को लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने पूर्व में कहा था- मैं समझता हूं कि जहां एक परिवार से दो व्यक्ति राजनीति क्षेत्र में हैं और टिकट के बाद जीतने की संभावना रखते हैं, तो ऐसे मामले में विचार हो सकता है और ऐसा कोई नियम नहीं होगा कि कोई जन सेवा करें और एक परिवार से हो तो उसे टिकट नहीं मिले। अगर ऐसा कोई नियम बन रहा है या बना है तो इस पर विचार की आवश्यकता है।

बहरहाल गणेश गोदियाल की बात से ये तो साफ है कि जीतने की संभावना रखने वाले और दो लोग एक परिवार से हैं तो उन्हें टिकट देने में कोई गुरेज नहीं होना चाहिए। ऐसे में अगर कांग्रेस पंजाब की तरह उत्तराखंड में भी 'एक परिवार, एक टिकट' का फॉर्मूला लागू करती है तो कांग्रेस के दिग्गज नेताओं के अरमान में पानी फिरना तय है।

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