उत्तराखंड | आखिर क्यों चुनावी साल में नेता प्रतिपक्ष नहीं चुन पा रही कांग्रेस ?

चुनावी साल में कांग्रेस सत्ता में वापसी का दावा कर तो रही है लेकिन उत्तराखंड कांग्रेस में नेता प्रतिपक्ष के नाम पर ही एकराय नहीं बन पा रही है। नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश के निधन से खाली इस पद पर नए नेता का नाम का ऐलान कांग्रेस के लिए सिरदर्द बना हुआ है।
 
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देहरादून (उत्तराखंड पोस्ट) चुनावी साल में कांग्रेस सत्ता में वापसी का दावा कर तो रही है लेकिन उत्तराखंड कांग्रेस में नेता प्रतिपक्ष के नाम पर ही एकराय नहीं बन पा रही है। नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश के निधन से खाली इस पद पर नए नेता का नाम का ऐलान कांग्रेस के लिए सिरदर्द बना हुआ है।

पार्टी प्रदेश प्रभारी के सोमवार को पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मिले थे। ऐसे में संकेत मिले थे कि मंगलवार को पार्टी नेता प्रतिपक्ष और संगठन स्तर पर किए जाने वाले बदलावों की घोषणा की जा सकती है लेकिन ऐसा नहीं हुआ और ये मामला अभी भी अटका हुआ है।

आपको बता दें कि कांग्रेस पार्टी ने इसके लिए समन्वय समिति बनाकर हल निकालने का प्रयास किया, लेकिन नेता प्रतिपक्ष के साथ प्रदेश अध्यक्ष पद पर भी चेहरा बदले जाने की बात सामने आने के बाद मामला फंस गया। इसके बाद समन्वय समिति ने अपनी रिपोर्ट बनाकर कांग्रेस हाईकमान को सौंप दी, जिस पर आलाकमान अभी तक फैसला नहीं ले पाया है।

सूत्रों के अनुसार नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृय्देश के निधन के एक महीने के बाद भी कांग्रेस नेता प्रतिपक्ष का नाम तय नहीं कर पा रही है क्योंकि पार्टी के नेताओं में गुटबंदी चरम पर है।

उत्तराखंड में कांग्रेस पार्टी के नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश की मृत्यु के बाद कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद के दो ही मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। इनमें एक हरीश रावत और दूसरे मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह हैं। इसी बीच इन दोनों नेताओं के बीच गुटबाजी की खबरें भी आ रही हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि गुटबाजी के कारण अब तक 10 विधायकों में से कांग्रेस पार्टी नेता प्रतिपक्ष नहीं चुन पाई है।

चर्चा है कि मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह को नेता प्रतिपक्ष बनाया जाना तय हुआ है, लेकिन प्रीतम सिंह अपने किसी खास व्यक्ति को प्रदेश अध्यक्ष की सीट पर चाहते हैं और दूसरी ओर हरीश रावत अपने किसी व्यक्ति के लिए कोशिश कर रहे हैं।

सूत्रों का कहना है कि नेता प्रतिपक्ष के साथ अब पार्टी प्रदेश अध्यक्ष पद पर भी रार फंस गई है। इसलिए इस पद पर फैसला नहीं लिया जा रहा है। माना जा रहा है कि नेता प्रतिपक्ष का पद प्रीतम को दिए जाने और हरीश रावत को पुन: एक बार फिर प्रदेश अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी दिए जाने की बात पर पेच फंसा हुआ है। ऐसा भी न हो तो हरीश प्रदेश अध्यक्ष पद पर अपने किसी विश्वासपात्र को चाहते हैं, लेकिन इसके लिए प्रीतम गुट तैयार नहीं है।

सूत्रों के अनुसार, प्रीतम ने इसके लिए यहां तक कह दिया है कि यदि उन्हें पार्टी प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाया जाता है तो वे किसी अन्य पद को स्वीकार नहीं करेंगे।

बहरहाल उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में सिर्फ 6 महीने का वक्त है, ऐसे में मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस एक तरफ तो सत्ता में वापसी का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ नेता प्रतिपक्ष के नाम पर पार्टी में घमासान मचा हुआ है, ऐसे में देखना ये होगा कि कैसे कांग्रेस एकजुट होकर आगामी विधानसभा चुनाव पूरी ताकत से लड़ पाएगी, जब एक पद के लिए ही पार्टी नेताओं में गहरे मतभेद नजर आ रहे हैं।

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