उत्तराखंड | चुनावी साल में वादों के बाद अब बड़े- बड़े दावे, किसके दावों में है कितना दम ?

सत्तारुढ़ भाजपा का दावा है कि कुछ गिने चुने नेताओं को छोड़ दिया जाए, तो सारे कांग्रेसी बीजेपी में आना चाहते हैं, तो वहीं कांग्रेस का दावा है कि की कई बीजेपी नेता उनके संपर्क में हैं और आ वाले 15 दिनों में इसका असर देखने को मिलेगा।
 
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देहरादून (उत्तराखंड पोस्ट) उत्तराखंड में आगमी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों में जुबानी जंग तेज हो चली है। बीजेपी हो, कांग्रेस हो या फिर इस चुनाव में पहली बार अपनी किस्मत आजमा रही आम आदमी पार्टी। तीनों का ही दावा है कि विरोधी पार्टी के नेता उनके संपर्क में हैं।

सत्तारुढ़ भाजपा का दावा है कि कुछ गिने चुने नेताओं को छोड़ दिया जाए, तो सारे कांग्रेसी बीजेपी में आना चाहते हैं, तो वहीं कांग्रेस का दावा है कि की कई बीजेपी नेता उनके संपर्क में हैं और आ वाले 15 दिनों में इसका असर देखने को मिलेगा।

पहले बीजेपी की बात करें तो उत्तराखंड से बीजेपी के राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी का दावा है कि पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और उनके कुछ करीबियों को छोड़कर बाकी सभी कांग्रेसी नेता भाजपा में आना चाहते हैं। बलूनी ने आगे कहा कि हम उत्तराखंड चुनाव जीतने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेंगे और हमारा दल हाउसफुल रहेगा।

कांग्रेस कहां पीछे रहने वाली थी। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने तो समय भी बता दिया है। गणेश गोदियल नेदावा किया कि कई बीजेपी नेता उके संपर्क में हैं और आने वाले 15 दिन इंतज़ार करें, सच पता चल जाएगा कि किसके पलड़े में कौन है। साथ ही गोदियाल ने कहा कि यह ज़रूरी नहीं कि भाजपा से आने वाले सभी नेताओं को चुनाव का टिकट मिल जाए। कांग्रेस कार्यकर्ता ही प्राथमिकता पर रहेंगे और टिकट को लेकर महत्वपूर्ण फैसले सामूहिक सहमति से ही लिये जाएंगे।

      

बीजेपी – कांग्रेस के दावों के बीच आम आदमी पार्टी भी पीछे नहीं है। अरविंद केजरीवाल ने तो साफ कहा है कि कांग्रेस और भाजपा में भी कुछ लोग अच्छे हैं और वो अपनी पार्टी के भीतर घुट रहे हैं। अगर वो आप में आना चाहते हैं तो हम उनका स्वागत करेंगे।

बहरहाल चुनावी साल में रोजगार के बड़े- बड़े वादों के साथ अब नेताओं के दल बदल के दावों ने राज्य की सियासत में गर्मी बढ़ा दी है। ऐसे में ये देखना रोचक होगा कि इन नेताओं के दावों में कितना दम है।

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