उत्तराखंड | क्या हरीश रावत को डांट पड़ी ? पूर्व सीएम ने खुद बताई अंदर की बात

हरीश रावत ने साथ ही कहा कि अब कुछ लोग, देहरादून से लेकर दिल्ली तक यह जताने की कोशिश कर रहे हैं कि मुझे कोई डांट पड़ी है तो मैं उनसे कहना चाहता हूं "अगुआई" शब्द  विनम्रता दर्शाता है और नेतृत्व शब्द कुछ बड़ा उद्बोध दिखाता है। इसलिये मैंने अगुआई शब्द का उपयोग किया। मगर अगुआई और नेतृत्व में अंतर क्या है! क्या ये मुझे, वाणी बहादुरों और कलम बहादुरों को समझाना पड़ेगा?
 
harish rawat

 

देहरादून (उत्तराखंड पोस्ट) उत्तराखंड में चुनावी मौसम में नेताओं के बयानों का सिलसिला जारी है। अब पूर्व सीएम हरीश रावत ने अपने ही एक बयान पर सफाई दी है औऱ साथ ही विरोधियों पर निशाना भी साधा है।

हरदा ने कहा कि मुझे बचपन से लेकर अभी तक यह सीख मिली है कि विनम्रता, आभूषण है, हिमालय भी यही सिखाता है। पिछले दिनों दिल्ली में पार्टी के नेतृत्व में निर्णय लिया कि विधानसभा चुनाव में पार्टी के अभियान का नेतृत्व पूर्णतः के हाथ में होगा।

पूर्व सीएम ने आगे कहा कि शब्द नेतृत्व का उपयोग किया और तदनुसार उत्तराखंड कांग्रेस के अध्यक्ष और CLP के नेता ने प्रेस को कहा भी, वही छपा भी। क्योंकि शब्द बार-बार नेतृत्व आ रहा था तो मुझे लगा कि जनता कहीं इस शब्द को मेरा अहंकार न समझ ले कि मेरे नेतृत्व में चुनाव लड़ा जायेगा, तो मैंने नेतृत्व के बजाय अगुआई शब्द का उपयोग किया।

हरीश रावत ने साथ ही कहा कि अब कुछ लोग, देहरादून से लेकर दिल्ली तक यह जताने की कोशिश कर रहे हैं कि मुझे कोई डांट पड़ी है तो मैं उनसे कहना चाहता हूं "अगुआई" शब्द  विनम्रता दर्शाता है और नेतृत्व शब्द कुछ बड़ा उद्बोध दिखाता है। इसलिये मैंने अगुआई शब्द का उपयोग किया। मगर अगुआई और नेतृत्व में अंतर क्या है! क्या ये मुझे, वाणी बहादुरों और कलम बहादुरों को समझाना पड़ेगा?

आपको बता दें कि हरीश रावत ने नेतृत्व शब्द का प्रयोग करने पर जब सार्वजनिक माफी मांगी तो विपक्षियों ने कहा कि हरदा को कांग्रेस आलाकमान से फटकार पड़ी है। अब हरदा ने विरोधियों को अपनी इस पोस्ट के जरिए विरोधियों पर निशाना साधा है।

 

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