"यशपाल का जाना तो सिर्फ ट्रेलर हैं, उत्तराखंड में पिक्चर अभी बाकी है"

गोदियाल ने कहा कि यशपाल आर्य भाजपा में लंबे समय से बैचेनी महसूस कर रहे थे। करीब चार माह पहले उन्होंने पूर्व सीएम हरीश रावत से मिलकर कांग्रेस पार्टी में वापसी की इच्छा जताई थी। उनके साथ दो अन्य विधायकों की भी ज्वानिंग होनी थी, लेकिन किन्हीं कारणों से वह आज टल गई।
 
Dhami

 

देहरादून (उत्तराखंड पोस्ट) उत्तराखंड में चुनावी साल में राजनेताओं का दल बदल का सिलसिला जारी है। अब उत्तराखंड की राजनीति में बड़े दलित चेहरे यशपाल आर्य की विधायक पुत्र संजीव आर्य के साथ कांग्रेस में घर वापसी से जहां सत्ता परिवर्तान का दावा कर रही कांग्रेस के नेता उत्साहित हैं, वहीं ये बीजेपी के लिए चुनावी साल में बड़ा झटका माना जा रहा है।

अब कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल का तो ये तक कहना है कि यशपाल आर्य की बेटे संजीव आर्य के साथ कांग्रेस में घर वापसी महज एक ट्रेलर है, असली पिक्चर तो अभी बाकी है।

गोदियाल ने कहा कि यशपाल आर्य भाजपा में लंबे समय से बैचेनी महसूस कर रहे थे। करीब चार माह पहले उन्होंने पूर्व सीएम हरीश रावत से मिलकर कांग्रेस पार्टी में वापसी की इच्छा जताई थी। उनके साथ दो अन्य विधायकों की भी ज्वानिंग होनी थी, लेकिन किन्हीं कारणों से वह आज टल गई। उन्होंने पूरे विश्वास के साथ कहा कि यह तो सिर्फ ट्रेलर है, पिक्चर अभी बाकी है। भाजपा के कई विधायक उनके संपर्क में हैं, जल्द ही उनकी कांग्रेस पार्टी में एंट्री होगी।

गोदियाल ने कहा कि भाजपा में तमाम विधायक दमघोंटू माहौल में बैचेन हैं। वह लगातार हमारे संपर्क में हैं। बहुत जल्दी कुछ अन्य भाजपा नेताओं की पार्टी में एंट्री होगी। गोदियाल ने कहा कि पार्टी में उनके आने से कार्यकर्ताओं के मनोबल में गुणात्मक वृद्धि हुई है। वह वहां कई चीजों से आहत थे। पार्टी ने उन्हें जो सपने दिखाए थे, उनकी अनदेखी की गई। जिससे आहत होकर उन्होंने घर वापसी की है।

आपको याद दिला दें कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने पिछले माह राज्यसभा सांसद व भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनिल बलूनी के बयान पर पलटवार करते हुए 15 दिन में बड़े बदलाव के संकेत दिए थे। यशपाल आर्य की पार्टी में वापसी को उनके इसी बयान से जोड़कर देखा जा रहा है।

दरअसल बलूनी ने कहा था कि पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और उनके इर्द-गिर्द एक-दो लोगों को छोड़कर हर कांग्रेसी भाजपा में आने का इच्छुक है, लेकिन अब भाजपा में हाउस फुल है। इस पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने पलटवार किया था। जिसमें उन्होंने कहा था कि 15 दिन का समय दिजिए, पता चल जाएगा, किसके यहां हाउसफुल का बोर्ड लगता है और किसका घर खाली होता है।

हरीश रावत ने भी बलूनी के बयान पर चुटकी ली थी। हरदा ने कहा था उज्याड़ू बल्द से बहुत जल्दी मेरे प्रिय अनुज (अनिल बलूनी) घबरा गए हैं। भाजपा में रह कर बलूनी बेशक दल-बदल कराने में पारंगत हो गए हैं, लेकिन उनकी सलाह है कि वह दूसरे के घर में झांकने से अच्छा है कि अपने घर को बचा कर रखें।

बहरहाल चुनावी साल में राजनीतिक दलों में अपने सियासी फायदे के लिए नेताओं के दल बदल का सिलसिला नया नहीं है। 2017 में कांग्रेस की पूरी पलटन ही बीजेपी में शामिल हो गई था तो अब 2022 के चुनाव से ऐन पहले यशपाल औऱ उनके बेटे के कांग्रेस में चले गए हैं। चुनावी साल में और भी नेता अपने सियासी फायदे के लिए दल बदल करते दिखें तो हैरान होने की जरुरत नहीं है। सवाल, बस यही है कि चुनाव में मतदान के वक्त जनता क्या सियासी मुनाफे के लिए दल बदल करने वाले नेताओं को सबक सिखाएगी।

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