श्मशान जाने तक चुनवा लड़ने की इच्छा रखते हैं हरदा, फिर क्यों किया हरिद्वार से लड़ने से इंकार, जानिए

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श्मशान जाने तक चुनवा लड़ने की इच्छा रखते हैं हरदा, फिर क्यों किया हरिद्वार से लड़ने से इंकार, जानिए

Harish

हरीश रावत ने सात ही ये भी कहा कि वे लड़ने से नहीं डरते हैं, वो तो आखिरी वक्त तक चुनाव लड़ने की इच्छा रखते हैं। अगर मेरे जाने का वक्त भी आ गया और मुझे श्मशान ले जाया जा रहा हो औऱ उस वक्त  चुनाव की घोषणा हो जाए तो मैं कहूंगा मेरा जाना रोक दो मैं एक और चुनाव लड़ लेता हूं।


 

हरिद्वार (उत्तराखंड पोस्ट) उत्तराखंड में टिकट बंटवारे में एक बार फिर से हरीश रावत की ही चली है। एक गुट के भारी विरोध के बावजूद हरीश रावत अपने बेटे विरेंद्र को टिकट दिलाने में कामयाब रहे हैं।

अब हरीश रावत ने बेटे को टिकट मिलने पर उठ रहे सवालों का जवाब दिया है। साथ ही हरदा ने बताया कि पार्टी आलाकमान चाहते था कि वे (हरीश रावत) हरद्वार लोकसभा सीट से खुद चुनाव मैदान में उतरें। हरदा ने कहा कि उन्होंन अपने खराब स्वास्थ्य का हावाला देते हुए आलाकमान से चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया और अपने बेटे वीरेंद्र रावत की पैरवी की।

हरीश रावत ने सात ही ये भी कहा कि वे लड़ने से नहीं डरते हैं, वो तो आखिरी वक्त तक चुनाव लड़ने की इच्छा रखते हैं। अगर मेरे जाने का वक्त भी आ गया और मुझे श्मशान ले जाया जा रहा हो औऱ उस वक्त  चुनाव की घोषणा हो जाए तो मैं कहूंगा मेरा जाना रोक दो मैं एक और चुनाव लड़ लेता हूं।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि पार्टी ने अपने स्तर पर संतुष्ट होने के बाद ही वीरेंद्र रावत के नाम पर हामी भरी। इस दौरान हरीश रावत ने कहा कि वीरेंद्र रावत ने 1998 से निरंतर कांग्रेस कार्यकर्ता के रूप में उत्तराखंड में काम किया है और 2009 से निरंतर हरिद्वार में काम किया है, गांव-गांव लोगों के दु:ख-सुख में खड़े रहे हैं।

हरीश रावत ने आगे कहा कि वीरेंद्र रावत 1996 में दिल्ली के सबसे बड़े महाविद्यालय दयाल सिंह डिग्री कॉलेज के अध्यक्ष रहे हैं, दिल्ली NSUI के महासचिव रहे हैं, उत्तराखंड में युवक कांग्रेस, कांग्रेस सेवादल और अब उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष हैं।

हरदा ने बेटे को टिकट मिलने पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए आगे कहा- पार्टी हाई कमान ने बेटे वीरेंद्र रावत के बारे में खूब जानकारी एकत्रित की, जब निश्चित हो गया कि पुत्र नहीं कार्यकर्ता भारी है, तब विरेंद्र रावत का हरिद्वार लोकसभा प्रत्याशी के रूप में चयन हुआ।

हरीश रावत ने कहा कि विरेंद्र बेटे भी हैं, शिष्य भी हैं, मगर मैं एक बात पूरी दृढ़ता से कहना चाहूंगा कि सेवा, समर्पण, समन्वय, समरचता और विकास की सोच के मामले में विरेंद्र मुझसे 19 साबित नहीं होंगे बल्कि कालांतर में 21 साबित होंगे।

हरीश रावत को बेटे की जीत का पूरा भरोसा है, हरीश रावत ने बेटे को टिकट मिलने से पहले ही पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए कहा था कि हरिद्वार लोकसभा सीट से बीजेपी का रावत यानि त्रिवेंद्र सिंह रावत हारेगा और कांग्रेस का रावत यानि वीरेंद्र रावत जीतेगा, हरीश रावत ने ये दावा हरिद्वार लोकसभा सीट से अपने बेटे को टिकट मिलने से चंद घंटे पहले किया था।

अपने रिटायरमेंट से पहले हरदा ने 2022 के विधानसभा चुनाव में अपने बेटी अनुपमा रावत को हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा से टिकट दिलाकर और फिर चुनाव जिताकर राजनीतिक करियर पटरी पर ला दिया है तो अब हरीश रावत ने हरिद्वार लोकसभा सीट से अपने बेटे वीरेंद्र रावत को भी टिकट दिलाकर राजनीतिक करियर पटरी पर लाने की कोशिश की है।

हरदा के बेटे को टिकट मिलने के बाद अब राजनीतिक गलियारों में ये कयास लगाए जा रहे हैं कि हरीश रावत ने अब अप्रत्यक्ष रूप से अपनी राजनैतिक पारी समाप्ति की घोषणा कर दी है क्योंकि आगामी विधानसभा चुनाव 2027 में होंगे जबकि लोकसभा चुनाव अब 2029 में होंगे और हरीश रावत 75 साल की उम्र पूरी कर चुके हैं, मतलब अपने बेटे को हरिद्वार से सांसद बनाने के लिए इस चुनाव में पूरी जी जान लगाएंगे औऱ हरदा ने इसकी भी तैयारी कर ली है।

ऐसे में देखना रोचक होगा कि आखिर हरिद्वार से इस बार बीजेपी का रावत यानि त्रिवेंद्र सिंह रावत जीतेगा या फिर कांग्रेस के रावत को जनता चुनेगी। आपको क्या लगता है, कमेंट बॉक्स में जरुर बताएं और हां इस वीडियो को लाईक और शेयर जरुर करें। साथ ही हमारे यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करें और फेसबुक पेज को लाइक और फॉलो करना न भूलें। इंस्टाग्राम में अगर आप एक्टिव हैं तो उत्तराखंड पोस्ट को यहां भी हर अपडेट के लिए फॉलो कर सकते हैं। धन्यवाद

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