उत्तराखंड | मजदूरों को एक-एक लाख रुपए देगी धामी सरकार, टनल के मुहाने पर स्थापित होगा बाबा बौखनाग का मंदिर

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उत्तराखंड | मजदूरों को एक-एक लाख रुपए देगी धामी सरकार, टनल के मुहाने पर स्थापित होगा बाबा बौखनाग का मंदिर

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अभियान के सफल होने के बाद मुख्यमंत्री ने कई बड़े ऐलान किए हैं। उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि सभी 41 मजदूरों को उत्तराखंड सरकार 1-1 लाख रुपए की राहत राशि देगी। इसके साथ ही वह इन मजदूरों की कंपनियों से अनुरोध करेंगे कि इन्हें 15 या 30 दिन के लिए बिना तनख्वाह काटे अवकाश भी दिया जाए। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अब टनल के मुहाने पर बाबा बौखनाग का मंदिर भी स्थपित किया जाएगा।


उत्तरकाशी (उत्तराखंड पोस्ट) 17 दिन की कड़ी मशक्कत के बाद 41 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालने वाला ऑपरेशन सिलक्यारा किसी सुरंग या खदान में फंसे मजदूरों को निकालने वाला देश का सबसे लंबा रेस्क्यू ऑपरेशन बना गया है। इससे पहले वर्ष 1989 में पश्चिमी बंगाल की रानीगंज कोयला खदान से दो दिन चले अभियान के बाद 65 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाला गया था।

मजदूरों को एक-एक लाख रुपये

अभियान के सफल होने के बाद मुख्यमंत्री ने कई बड़े ऐलान किए हैं। उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि सभी 41 मजदूरों को उत्तराखंड सरकार 1-1 लाख रुपए की राहत राशि देगी। इसके साथ ही वह इन मजदूरों की कंपनियों से अनुरोध करेंगे कि इन्हें 15 या 30 दिन के लिए बिना तनख्वाह काटे अवकाश भी दिया जाए। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अब टनल के मुहाने पर बाबा बौखनाग का मंदिर भी स्थपित किया जाएगा।

इसके साथ ही सीएम ने ऐलान किया है कि अब राज्य में जितनी भी टनल निर्माणाधीन हैं और उनकी समीक्षा की जाएगी। हालांकि केंद्र सरकार और केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्रालय इसके लिए पहले ही आदेश जारी कर चुका है, लेकिन राज्य सरकार भी अपने स्तर पर इन सभी टनलों की समीक्षा कराएगी। जिससे आगे से ऐसी आपदा का सामना ना करना पड़े।

वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिलक्यारा रेस्क्यू ऑपरेशन की सफलता के लिए बचावकर्मियों की सराहना की। उन्होंने कहा, 'मैं इस बचाव अभियान से जुड़े सभी लोगों के जज्बे को सलाम करता हूं। उनकी बहादुरी ने हमारे मजदूर भाइयों को नया जीवन दिया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फोन पर सभी मजदूरों से बात की। उन्होंने मजदूरों के बाहर आने पर खुशी जाहिर की और रेस्क्यू ऑपरेशन में शामिल सभी लोगों का अभिवादन किया।

21 घंटे में की 12 मीटर खुदाई

इससे पहले, सिल्क्यारा साइड से हॉरिजॉन्टल ड्रिलिंग में लगे रैट माइनर्स, हादसे के 17वें दिन दोपहर 1.20 बजे खुदाई पूरी कर पाइप से बाहर आ गए। उन्होंने करीब 21 घंटे में 12 मीटर की मैन्युअल ड्रिलिंग की। 24 नवंबर को मजदूरों की लोकेशन से महज 12 मीटर पहले ऑगर मशीन टूट गई थी। जिससे रेस्क्यू रोकना पड़ा था।

इसके बाद सेना और रैट माइनर्स को बाकी के ड्रिलिंग के लिए बुलाया गया था। मंगलवार सुबह 11 बजे मजदूरों के परिजन के चेहरों पर तब खुशी दिखी, जब अफसरों ने उनसे कहा कि उनके कपड़े और बैग तैयार रखिए। जल्द ही अच्छी खबर आने वाली है।

उत्तरकाशी टनल में रैट माइनर्स ने कैसे काम किया

रैट माइनर्स 800MM के पाइप में घुसकर ड्रिलिंग की। ये बारी-बारी से पाइप के अंदर जाते, फिर हाथ के सहारे छोटे फावड़े से खुदाई करते थे। ट्राली से एक बार में तकरीबन 2.5 क्विंटल मलबा लेकर बाहर आते थे। पाइप के अंदर इन सबके पास बचाव के लिए ऑक्सीजन मास्क, आंखों की सुरक्षा के लिए विशेष चश्मा और हवा के लिए एक ब्लोअर भी मौजूद रहता था।

रैट होल माइनिंग क्या है?

रैट का मतलब है चूहा, होल का मतलब है छेद और माइनिंग मतलब खुदाई। मतलब से ही साफ है कि छेद में घुसकर चूहे की तरह खुदाई करना। इसमें पतले से छेद से पहाड़ के किनारे से खुदाई शुरू की जाती है और पोल बनाकर धीरे-धीरे छोटी हैंड ड्रिलिंग मशीन से ड्रिल किया जाता है और हाथ से ही मलबे को बाहर निकाला जाता है।

रैट होल माइनिंग नाम की प्रकिया का इस्तेमाल आमतौर पर कोयले की माइनिंग में खूब होता रहा है। झारखंड, छत्तीसगढ़ और उत्तर पूर्व में रैट होल माइनिंग जमकर होती है, लेकिन रैट होल माइनिंग काफी खतरनाक काम है, इसलिए इसे कई बार बैन भी किया जा चुका है।

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