फर्जीवाड़ा करने वाले 30 रोडवेज कंडक्टर बर्खास्त, जानें पूरा मामला

देहरादून (उत्तराखंड पोस्ट ब्यूरो) रोडवेज प्रबंधन ने शनिवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए संविदा व विशेष श्रेणी के 30 कंडक्टरों को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया। साथ ही पांच नियमित कंडक्टर को निलंबित करने के साथ चार्जशीट देकर विभागीय कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं।

दरअसल इन परिचालकों पर सांसद कोटे के टिकट बनाने का आरोप है। प्रारंभिक जांच के बाद सौंपी गई रिपोर्ट में कुल 35 कंडक्टर की भूमिका संदिग्ध पाई गई। इनकी टिकट मशीन से सांसद कोटे के सर्वाधिक टिकट बने। कुल 3.21 लाख रुपये के मामले में करीब डेढ़ लाख रुपये के टिकट इन्हीं के जरिये बने। इनसे इस राशि की रिकवरी भी की जाएगी।

जिन परिचालकों के खिलाफ कार्रवाई हुई है उनमें अल्मोड़ा-2, पर्वतीय डिपो-4, हल्द्वानी डिपो-9, हरिद्वार जेएनएनयूआरएम डिपो-1, काशीपुर डिपो-1, काठगोदाम जेएनएनयूआरएम डिपो-1, काठगोदाम डिपो-1, कोटद्वार डिपो-1, लोहाघाट डिपो-1, पिथौरागढ़ डिपो-7, रानीखेत डिपो-1, रुद्रपुर डिपो-2 और टनकपुर डिपो-4 शामिल हैं।

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गौरतलब है कि उत्तराखंड परिवहन निगम में एक जनवरी 2018 से 31 मार्च तक के विशेष श्रेणी के यात्रियों की समीक्षा में सांसद कोटे में बने टिकट संदिग्ध पाए गए थे। इस अवधि में सांसद कोटे में 22 डिपो में सांसद कोटे में तीन माह में 4257 टिकट बनाने का आरोप है।

डाटा रिकार्ड की जांच में पाया गया कि ज्यादातर टिकट 23 मार्च के बाद बने, जब मशीनों को अपडेट करने के साथ ही बुजुर्गजन कोटे के नंबर पर सांसद कोटे का नंबर दर्ज हुआ। रोडवेज प्रबंधन इसे मानवीय चूक मान रहा था, मगर उच्च स्तरीय दबाव के चलते कंडक्टरों के विरुद्ध कार्रवाई करनी पड़ी।

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