शहीद DSP अमन को था पुलिस में शामिल होने का जुनून, ठुकरा दी थी दो सरकारी नौकरी

482

कुलगाम (उत्तराखंड पोस्ट) जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में रविवार को आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में शहीद हुए डीएसपी अमन ठाकुर के परिवार में अब उनके जाने के बाद बुजुर्ग माता-पिता, पत्नी सरलादेवी के साथ 6 वर्षीय बेटा आर्य हैं। जम्मू-कश्मीर के डोडा क्षेत्र में रहने वाले ठाकुर 2011 बैच के जम्मू-कश्मीर पुलिस सेवा के अधिकारी थे।

महज 40 वर्ष की आय़ु में देश के लिए शहीद होने वाले अमन ठाकुर अपनी बहादुरी के लिए जाने जाते थे। ठाकुर को पुलिसबल में शामिल होने का जुनून किस कदर सवार था, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वे दो सरकारी नौकरियां छोड़कर पुलिस में शामिल हुए थे।

पहली नौकरी उन्हें समाज कल्याण विभाग में मिली थी। इसके बाद वह एक सरकारी कॉलेज में लेक्चरर के पद पर नियुक्त हुए थे, जो जंतु विज्ञान में स्नातकोत्तर की डिग्री के कारण मिली थी।

पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह ने बताया कि वह हमेशा जोश से लबरेज रहते और सामने से अपनी टीम का नेतृत्व करते। दक्षिण कश्मीर के आतंकवाद प्रभावित कुलगाम जिले में उनके कार्यकाल के दौरान ठाकुर कई तिमाही से बहादुरी का पुरस्कार जीत रहे थे।

एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि वह अपने दृढ़ संकल्प और बहादुरी के लिए जाने जाते हैं। अपने मददगार स्वभाव और पेशेवर रुख के कारण बेहद कम समय में ही उन्होंने इलाके के स्थानीय लोगों का प्यार, सम्मान और प्रशंसा हासिल की।

उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें हाल में डीजीपी पदक एवं प्रशंसा पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। बहादुरी और आतंकवाद विरोधी अभियानों में उनके साहस के लिए उन्हें शेर-ए-कश्मीर वीरता पदक से सम्मानित किया गया।

वीडियो | जो लौट के घर न आए, उत्तराखंड के इन वीर सपूतों को शत् शत् नमन

Follow us on twitter –https://twitter.com/uttarakhandpost

Like our Facebook Page – https://www.facebook.com/Uttrakhandpost/