इस बार भी नहीं टूटा मिथक, गंगोत्री से ही निकली सत्ता की गंगा

उत्तराखंड में सत्ता का रास्ता गंगोत्री से होकर ही निकलता है। इस बार के चुनाव में सबकी निगाहें इस ओर थी की क्या इस बार ये मिथक टूटेगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब ख़बरें एक क्लिक पर इस लिंक पर क्लिक कर Download करें Mobile App –https://play.google.com/store/apps/details?id=app.uttarakhandpost

इस बार भी गंगोत्री से जीतने वाली पार्टी ही सत्ता में कबिज हुआ है। गंगोत्री से भाजपा प्रत्याशी ने जीत दर्ज की और राज्य में दो तिहाई बहुमत से भाजपा सरकार बनाने जा रही है। भाजपा ने राज्य की 70 विधानसभा सीटों में से 57 सीटों पर जीत दर्ज की है।

गंगोत्री के नतीजे | गंगोत्री सीट से इस बार भारतीय जनता पार्टी के गोपाल सिंह रावत ने जीत दर्ज की। गोपाल सिंह ने कांग्रेस के विजयपाल सिंह सजवान को  9610 वोटों से पराजित किया। गोपाल सिंह रावत की ये जीत इसलिए भी अहम है क्योंकि इस बार टिकट न मिलने पर भजपा के बागी सूरत राम नौटियाल उन्हें इस सीट पर चुनौती दे रहे थे। लेकिन गंगोत्री की जनता ने जीत का सेहरा गोपाल सिंह रावत के सिर बांधा। हालांकि सूरत राम नौटियाल निर्दलीय ताल ठोकने के बावजूद 9491 वोट हासिल करने में सफल रहे लेकिन गोपाल सिंह रावत की जीत की राह में रोड़ा नहीं बन पाए।

क्या है ये मिथक | गंगोत्री विधानसभा सीट से दरअसल ये मिथक जुड़ा हुआ है कि इस सीट को जीतने वाली पार्टी की राज्य में सरकार बनाती है। पिछले सभी चुनाव के नतीजे भी इस बात की तसदीक करते हैं कि गंगोत्री जीतने वाला ही सत्ता हासिल करता है।

राज्य गठन से पहले से ही ये मिथक गंगोत्री सीट के साथ जुड़ा हुआ है, लिहाजा हर बार हर किसी की निगाह इस सीट पर रहती है और हर राजनीतिक दल इस सीट को हर हाल में जीतने की कोशिश करता है। बहरहाल इस बार के विधानसभा चुनाव में भी गंगोत्री से निकलने वाली सत्ता की गंगा का मिथक नहीं टूटा, जिससे एक बार फिर से लोगों का इस मिथक पर भरोसा बढ़ गया है।

जानिए क्यों- मां गंगा का उद्गम स्थल ही नहीं, ये है सत्ता की भी गंगोत्री

EVM चमत्कार और मोदी क्रांति को स्वीकार करता हूं: रावत