जानिए क्या है वोट प्रतिशत बढ़ने के मायने, किसकी बनेगी सरकार ?

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उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में 70 में से 69 विधानसभा सीटों पर शाम पांच बजे तक चुनाव आयोग के अनुसार 68 फीसदी वोट पड़े हैं। हालांकि मतदान प्रतिशत के अंतिम आंकड़े अभी आना बाकी है। अब ख़बरें एक क्लिक पर इस लिंक पर क्लिक कर Download करें Mobile App –https://play.google.com/store/apps/details?id=app.uttarakhandpost

उत्तराखंड के चुनावी इतिहास को देखा जाए तो यहां हर बार पिछली बार से ज्यादा मतदान होता है। इस बार भी मतदान का प्रतिशत बढ़ा है। खास बात ये है कि यहां मतदान प्रतिशत बढ़ने के साथ ही हर बार सरकार बदलती है।

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2002 के विधानसभा चुनाव में उत्तराखंड की 54.34 फीसदी जनता ने ही अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। पहली बार विधानसभा चुनाव में जनता ने कांग्रेस को बहुमत दिया और नारायण दत्त तिवारी के नेतृत्व में कांग्रेस ने यहां पांच साल तक सरकार चलायी।

2002

साल 2007 में विधानसभा चुनाव हुए तो उत्तराखंड की जनता ने कांग्रेस को बाहर का रास्ता दिखाया और भाजपा को पहाड़ी राज्य की बागडोर थमा दी। इस बार राज्य की जनता ने 59.45 फीसद मतदान किया और भुवन चंद्र खंडूड़ी राज्य के चौथे मुख्यमंत्री बने।

2007

2012 के चुनाव में उत्तराखंड की जनता ने एक बार फिर सत्ता में बैठी पार्टी को बाहर का रास्ता दिखा दिया। हालांकि इस बार जनता ने किसी को भी स्पष्ट बहुमत नहीं दिया, लेकिन 66.17 फीसद जनता ने अपने मताधिकार का पालन किया। कांग्रेस को 32 और भाजपा को 31 सीटें मिलीं, जबकि 7 सीटें अन्य पार्टियों और निर्दलियों को मिलीं। असल में सत्ता की कुंजी इन्हीं अन्य विधायकों के पास थी और उन्होंने पीडीएफ नाम से एक संगठन बनाकर कांग्रेस को समर्थन दिया।

2012

अब इस बार फिर से मतदान प्रतिशत बढ़ा है तो देखना यह होगा कि क्या हरीश रावत का करिश्मा कांग्रेस के लिए कुछ काम करता है या फिर भाजपा एक बार फिर से उत्तराखंड की सत्ता में आती है।

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