उत्तराखंड की दीपावली : पटाखे फोड़ कर नहीं, भैलो नृत्य कर मनाया जाता है दीपोत्सव

देहरादून [उत्तराखंड पोस्ट ब्यूरो] उत्तराखंड हर लिहाज़ से देश के बाकी हिस्सों से भिन्न है। यहां दीपावली को इगास-बग्वाल के नाम से भी जाना जाता हैं। इस दिन उत्तराखंड की बरसों पुरानी परंपरा भैलो खेलने का रिवाज़ है। यही वजह है कि इस दिन का लोग बेसब्री से इंतजार करते हैं, क्योंकि दीपावली पर लोग भैलो
 

देहरादून [उत्तराखंड पोस्ट ब्यूरो]  उत्तराखंड हर लिहाज़ से देश के बाकी हिस्सों से भिन्न है। यहां दीपावली को इगास-बग्वाल के नाम से भी जाना जाता हैं। इस दिन उत्तराखंड की बरसों पुरानी परंपरा भैलो खेलने का रिवाज़ है। यही वजह है कि इस दिन का लोग बेसब्री से इंतजार करते हैं, क्योंकि दीपावली पर लोग भैलो खेलकर या नृत्य कर अपनी खुशी एक दूसरे के साथ बांटते हैं।

भैलो का मतलब

चलिए अब आपको भैलो का मतलब बताते हैं। दरअसल भैलो एक रस्सी से है, जो पेड़ों की छाल से बनी होती है। बग्वाल के दिन लोग रस्सी के दोनों कोनों में आग लगा देते हैं और फिर रस्सी को घुमाते हुए भैलो खेलते हैं।

बरसों पुरानी परंपरा

यह परंपरा उत्तराखंड के हर कोने में बरसों से चली आ रही है। ना सिर्फ भैलो बल्कि दीपावली के दिन उत्तराखंड का हर व्यक्ति यहां की लोक संस्कृति में मशगूल रहता है। पुरुष और महिलाएं अलग-अलग समूह में पारंपरिक चांछड़ी और थड्या नृत्य में दीपावली के गीत गाते हैं।

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