मंत्रोच्चारण के साथ रवाना हुई भगवान केदारनाथ की डोली, 17 मई को खुलेंगे कपाट

शुक्रवार को मंत्रोच्चारण के बीच भगवान केदारनाथ की चल उत्सव विग्रह डोली आज शुक्रवार को केदारनाथ धाम के लिए प्रस्थान कर गई है। इस दौरान पंचकेदार गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर परिसर के 50 मीटर के दायरे में प्रवेश निषेध रहा। डोली के धाम पहुंचने के साथ ही धारा 144 स्वत: समाप्त हो जाएगी।
 
मंत्रोच्चारण के साथ रवाना हुई भगवान केदारनाथ की डोली, 17 मई को खुलेंगे कपाट

ऊखीमठ (उत्तराखंड पोस्ट) शुक्रवार को मंत्रोच्चारण के बीच भगवान केदारनाथ की चल उत्सव विग्रह डोली आज शुक्रवार को केदारनाथ धाम के लिए प्रस्थान कर गई है। इस दौरान पंचकेदार गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर परिसर के 50 मीटर के दायरे में प्रवेश निषेध रहा। डोली के धाम पहुंचने के साथ ही धारा 144 स्वत: समाप्त हो जाएगी।

केदारनाथ के लिए प्रशासन द्वारा देवस्थानम बोर्ड के 14 अधिकारी/कर्मचारी व 14 हक-हकूकधारियों को अनुमति दी गई है। हक-हकूकधारी केदारनाथ डोली पहुंचाने के बाद वापस आ जाएंगे। भारत व राज्य सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन के तहत सभी धार्मिक गतिविधियों का संपादन किया जाएगा। बताया कि धार्मिक आस्था के साथ कोरोना से बचाव के लिए जरूरी इंतजाम किए गए हैं। बता दें कि कोविड महामारी के बीच आगामी चारधाम यात्रा को उत्तराखंड सरकार ने रद्द कर दिया है। चारों धाम के कपाट अपने तय समय पर खुलेंगे। लेकिन केवल पुजारी और पुरोहित ही धामों में पूजा अर्चना करेंगे। यात्रियों को वहां जाने की अनुमति नहीं होगी। 

बता दें कि केदारनाथ धाम के कपाट 17 मई को मेष लग्न में सुबह पांच बजे खोले जाएंगे। भगवान बद्री विशाल के कपाट श्रद्धालुओं के लिए 18 मई प्रातः 4:15 पर खोल दिए जाएंगे। गाडू घड़ा यात्रा 29 अप्रैल को सुनिश्चित की गई है।

वहीं, पंचकेदार गद्दीस्थल ओंकोरश्वर मंदिर ऊखीमठ में भगवान केदारनाथ के क्षेत्रपाल बाबा भैरवनाथ की पूजा-अर्चना शुरू हो गई है। कोरोना संक्रमण के कारण इस वर्ष भी आराध्य की पूजा में सीमित लोग ही शामिल हुए। पूजा में पुजारी शिव शंकर लिंग, टी-गंगाधर लिंग एवं शिव लिंग ने धार्मिक परंपराओं का निर्वहन किया। मंदिर के वेदपाठी विश्वमोहन जमलोकी एवं यशोधर मैठाणी के वेद मंत्रोच्चारण के बीच बाबा भैरवनाथ का महाभिषेक पूजन किया गया। इसके बाद पूरी व काली दाल की पकौड़ी का भगवान को भोग लगाया गया और केदारनाथ यात्रा के सकुशल संचालन की कामना की गई। 

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