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उत्तराखंड में कोरोना का कहर बढ़ा, लगने वाला है मिनी लॉकडाउन !

सर्वदलीय बैठक में मौजूद रहे स्वास्थ्य सचिव अमित नेगी ने बताया कि प्रदेश में कोरोना की गति पिछले वर्ष की अपेक्षा तीन गुना बढ़ी है। इस संबंध में टेस्ट, ट्रेस और ट्रीट पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पहले 10-12 हजार टेस्ट प्रतिदिन हो रहे थे, अब यह संख्या 25 हजार प्रतिदिन हो गई है। राज्य के मैदानी जनपदों में समस्या अधिक है। राज्य में आर्थिक गतिविधियां अधिक प्रभावित ना हों, इसके लिए मिनी लॉकडाउन पर ध्यान दिया जा रहा है।
 
उत्तराखंड में कोरोना का कहर बढ़ा, लगने वाला है मिनी लॉकडाउन !

देहरादून (उत्तराखंड पोस्ट) उत्तराखंड में लगातार कोरोना का कहर बढ़ता जा रहा है। प्रदेश में लगातार कोरोना के केस बढ़ रहे है। पिछले 24 घंटे में प्रदेश में कोरोना के 5084 मामले सामने आए। इसी के साथ प्रदेश में कुल मरीजों की संख्या 147433 पहुंच गई है। वहीं 81 संक्रमित मरीजों की मौत हुई।

कोरोना संक्रमण की रोकथाम को लेकर सचिवालय में वर्चुअल माध्यम से आयोजित सर्वदलीय बैठक में विपक्ष ने सुझावों के बहाने व्यवस्था की खामियों को सामने रखा, लेकिन सरकार को पूर्ण सहयोग का भरोसा भी दिलाया। वहीं मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने कहा कि प्रदेश में ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है। कोरोना वायरस की चैन तोड़ने के लिए भी कारगर प्रयास किए जा रहे हैं। जन जागरूकता से हम इस पर नियंत्रण पा सकते हैं। कोरोना रोकथाम में प्रयुक्त होने वाली दवा व इंजेक्शन आदि की कालाबाजारी रोकने के लिए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं।

त्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत ने कहा कि प्रवासियों के लिए मैदानी जिलों में क्वारंटीन सेंटर बनाए जाएं। स्वास्थ्य की बुनियादी सुविधाओं को सरकार 25 प्रतिशत तक बढ़ाए। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने कहा कि पर्वतीय जिलों में लोगों को पर्याप्त उपचार नहीं मिल पा रहा है और मैदानी जिलों में संसाधन कम पड़ रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश ने बुनियादी सुविधाओं को बढ़ाने पर जोर दिया। 

सर्वदलीय बैठक में मौजूद रहे स्वास्थ्य सचिव अमित नेगी ने बताया कि प्रदेश में कोरोना की गति पिछले वर्ष की अपेक्षा तीन गुना बढ़ी है। इस संबंध में टेस्ट, ट्रेस और ट्रीट पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पहले 10-12 हजार टेस्ट प्रतिदिन हो रहे थे, अब यह संख्या 25 हजार प्रतिदिन हो गई है। राज्य के मैदानी जनपदों में समस्या अधिक है। राज्य में आर्थिक गतिविधियां अधिक प्रभावित ना हों, इसके लिए मिनी लॉकडाउन पर ध्यान दिया जा रहा है।

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