महाशिवरात्रि आज |  ऐसे करें जलाभिषेक, पूरी होगी मनोकामनाएं

आज 11 मार्च गुरुवार को देश भर में महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जायेगा. हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था, जिसे महाशिवरात्रि के रूप में हर वर्ष मनाया जाता है। 
 
महाशिवरात्रि आज | ऐसे करें जलाभिषेक, पूरी होगी मनोकामनाएं
 

देहरादून (उत्तराखंड पोस्ट) आज 11 मार्च गुरुवार को देश भर में महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जायेगा. हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था, जिसे महाशिवरात्रि के रूप में हर वर्ष मनाया जाता है।

इस बार महाशिवरात्रि का पर्व पर विशेष योग बन रहा है। इस दिन शिव योग के साथ  सिद्ध योग भी बन रहा है. ऐसी मान्यता है कि इस दिन जलाभिषेक करने से शिव भक्तों पर शिव भगवान की कृपा बरसेगी. उनकी कृपा से शिव भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है।

इस बार महाशिवरात्रि पर त्रयोदशी और चतुर्दशी तिथियां पड़ रही हैं। इस लिए जलाभिषेक का महत्त्व और भी बढ़ गया है। हिंदू धर्मशास्त्रों के अनुसार, महाशिवरात्रि पर्व पर त्रयोदशी व चतुर्दशी में जलाभिषेक का विधान बताया गया है। त्रयोदशी तिथि 10 मार्च को दोपहर बाद 2.40 मिनट से शुरू हो रही है और यह 11 मार्च को 2.40 बजे त्रयोदशी समाप्त होगी उसके बाद तुरंत बाद चतुर्दशी प्रारंभ हो जाएगी।

शिवालयों में त्रयोदशी का जलाभिषेक 11 मार्च को सुबह 4.01 बजे से शुरू होकर पूरे दिन चलता रहेगा। वहीं चतुर्दशी का जलाभिषेक इसी दिन अर्थात 11 मार्च को अपराह्न तीन बजे से शुरू होकर शाम तक चलेगा। महाशिवरात्रि का निशीथ काल, जो कि इस दिन का सर्वोत्तम समय होता है, 11 मार्च को रात 12 बजकर 6 मिनट से 12 बजकर 55 मिनट तक रहेगा।चूंकि महाशिवरात्रि का पर्व रात्रि में मनाया जाने वाला पर्व है इस लिए महाशिवरात्रि का पूजन चारों पहर करने का विशेष महत्त्व है.

ऐसे करें शिव की पूजा

  • सबसे पहले सुबह उठकर स्नान जरूर करें तथा स्वच्छ कपड़े भी पहनें.
  • महाशिवरात्रि के पर्व पर भगवान शिव की पूजा में दूध का विशेष महत्त्व है।
  •  दूध में गाय के दूध का विशेष महत्व है. क्योंकि गाय का दूध सबसे अधिक पवित्र और उत्तम माना गया है।
  • महाशिवरात्रि के दिन महादेव की पूजा करते समय बिल्वपत्र, शहद, दूध, दही, शक्कर और गंगाजल से जलाभिषेक करना चाहिए। 
  • 108 बेल पत्तों में से एक-एक पता ओम नम: शिवाय का जाप करके शिवलिंग पर चढ़ाएं।
  • बेल पत्तों में से एक-एक पता ओम नम: शिवाय का जाप करके शिवलिंग पर चढ़ाएं।
  • महाशिवरात्रि के दिन रात्रि जागरण का भी विधान है।
  • शास्त्रों के अनुसार, महाशिवरात्रि का पूजा निशील काल में करना उत्तम माना गया है।

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