अफगानिस्तान से उत्तराखंड लौटे लोग, हरदा ने फूल मालाओं से किया स्वागत

अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद स्थिति बहुत खराब हो गई हैं। वहां, कई लोग भारत के भी फंसे हुए था। उत्तराखंड के भी कई तालिबानियों के कब्जे में फंस गए थे, जो अब छूट कर वापस उत्तराखंड पहुंच गए हैं। कजाकिस्तान होकर रविवार की रात को लौटे 16 लोग अपने परिजनों से मिलकर फफक पड़े। इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और कांग्रेस की प्रदेश महासचिव गोदावरी थापली ने ठाकुरपुर में सभी लोगों को फूल मालाओं से स्वागत किया और उन्हें स्वदेश लौटने पर बधाई दी।
 
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देहरादून (उत्तराखंड पोस्ट)
अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद स्थिति बहुत खराब हो गई हैं। वहां, कई लोग भारत के भी फंसे हुए था। उत्तराखंड के भी कई तालिबानियों के कब्जे में फंस गए थे, जो अब छूट कर वापस उत्तराखंड पहुंच गए हैं। कजाकिस्तान होकर रविवार की रात को लौटे 16 लोग अपने परिजनों से मिलकर फफक पड़े। इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और कांग्रेस की प्रदेश महासचिव गोदावरी थापली ने ठाकुरपुर में सभी लोगों को फूल मालाओं से स्वागत किया और उन्हें स्वदेश लौटने पर बधाई दी।

अफगानिस्तान में फंसे भारतीयों में से 60 लोग अब तक दून लौट चुके हैं। इनमें से 16 लोग रविवार देर रात ठाकुरपुर (प्रेमनगर) पहुंचे। इनमें से कुछ डेनमार्क की एक कंपनी में सुरक्षाकर्मी थे। जबकि, कुछ लोग दूसरी अन्य कंपनियों में सुरक्षाकर्मी के रूप में कार्य करते थे।  इनमें से ज्यादातर पूर्व सैनिक हैं। अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा होने के बाद कंपनी की ओर से भी उन्हें भारत भेजने के लिए प्रयास हो रहे थे।

नौकरी के लिए विदेश जाने वाले देहरादून निवासी अरविंद खड़का और अफगानिस्तान में लगभग 15 साल तक कंपनी में सुपरवाइजर के पद पर तैनात रहे शैलेंद्र थापा लगातार डेनमार्क और भारतीय दूतावास के संपर्क में रहे। देहरादून लौटे इन लोगों ने बताया कि शनिवार को वह काबुल एयरपोर्ट से भारतीय विमान में सवार हुए थे। भारतीय विमान पहले कजाकिस्तान पहुंचा और उसके बाद दिल्ली के लिए उड़ान भरी।

उन्होंने बताया कि तालिबानियों ने उन्हें अनावश्यक घर से बाहर न निकलने की बात कही थी। वहां मौजूद पाकिस्तान के कुछ लोगों ने उन्हें प्रताड़ित करने की कोशिश की। एयरपोर्ट पर एक लाख से भी अधिक लोगों की भीड़ थी इन लोगों ने बताया कि वह पिछले तीन दिन से काबुल एयरपोर्ट पर थे। डेनमार्क एंबेसी और भारत सरकार के साथ ही कुछ ब्रिटिश लोगों ने भी उनके खाने-पीने से लेकर अन्य जरूरी व्यवस्थाएं की।

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