कोरोना को हराने को बांटी जा रही थी 'जादुई' दवा, लग गई 10 हजार लोगों की लाइन

देश में कोरोना के मामले अब तेजी से घटने शुरू हो गए हैं। हालांकि कोरोना की थमती रफ्तार के बावजूद मौत का आंकड़ा डराने लगा है। स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय (Health Ministry) के आंकड़ों के मुताबिक देश में कुल संक्रमित मरीजों की संख्‍या 2 करोड़ 62 लाख 89 हजार 290 हो गई है।
 
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नेल्लोर (उत्तराखंड पोस्ट)
देश में कोरोना के मामले अब तेजी से घटने शुरू हो गए हैं। हालांकि कोरोना की थमती रफ्तार के बावजूद मौत का आंकड़ा डराने लगा है। स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय (Health Ministry) के आंकड़ों के मुताबिक देश में कुल संक्रमित मरीजों की संख्‍या 2 करोड़ 62 लाख 89 हजार 290 हो गई है।

कोरोना से बचने के लिए देश में तेजी से वैक्सीनेशन जारी है। लेकिन कोरोना से बचाव को लेकर कई और दावे किए जा रहे हैं। अब आंध्र प्रदेश के नेल्लोर जिले में एक आयुर्वेदिक दवा से कोरोना के इलाज का दावा किया जा रहा है। इस दवा की मांग इतनी ज्यादा बढ़ गई है कि आंध्र प्रदेश सरकार ने इस आयुर्वेदिक दवा की इलाज की क्षमता जांचने के लिए इसे भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) में भेजने का फैसला किया है।

दरअसल, आंध्र प्रदेश के नेल्लोर स्थित कृष्णापट्टनम गांव में कोरोना से लड़ने के लिए लोगों को एक जादुई आयुर्वेदिक दवा दी जा रही है। ये खबर लोगों में आग की तरह फैल रही है।

एक समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक इस कारण कृष्णपट्टनम गांव में इस दवा को खरीदने के लिए दस हजार लोगों की लाइन लग गई। शुक्रवार को आंध्र प्रदेश सरकार ने इस आयुर्वेदिक दवा का एफीकेसी रेट और संपूर्ण जानकारी के लिए इसे भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) भेजने का फैसला किया है।

इस दवा का वितरण आयुर्वेदिक चिकित्सक बी आनंदैया द्वारा किया जा रहा है, जो कभी गांव के सरपंच हुआ करते थे और बाद में मंडल परिषद के सदस्य बने।

आपको बता दें कि आयुष विभाग के आयुर्वेदिक चिकित्सकों की एक टीम ने कुछ दिन पहले कृष्णपट्टनम गांव का दौरा किया और दवा के बारे में जांच-पड़ताल कर एक रिपोर्ट तैयार की। चिकित्सकों ने इस रिपोर्ट को सरकार को सौंपा और बताया कि दवा बनाने की विधि, उपचार प्रक्रिया और उसके बाद के प्रभावों का वैज्ञानिक लेवल पर अध्ययन किया जाना चाहिए। चिकित्सकों की टीम ने दावा करते हुए कहा कि दवा लेने वालों में से किसी ने भी साइड एफेक्ट्स की शिकायत नहीं की है।

कहा जा रहा है कि आनंदैया ने प्राकृतिक जड़ी-बूटियों, शहद और मसालों का इस्तेमाल करके पांच अलग-अलग दवाएं तैयार की थीं। इस दवा को उन्होंने कोरोना वायरस से संक्रमित रोगियों, संदिग्धों और फेफड़ों की समस्याओं से झूझ रहे लोगों को दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, एक कोविड-19 मरीज की आंख में इस दवा की दो बूंदें डालने के बाद उसके शरीर में ऑक्सीजन का लेवल एक घंटे में 83 से बढ़कर 95 हो गया।

एसपीएस नेल्लोर जिला चिकित्सा, स्वास्थ्य अधिकारी और नेल्लोर राजस्व मंडल के अधिकारी भी आधिकारिक टीम का हिस्सा थे।

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