भारत में कब कम होंगे कोरोना के केस ? कब आएगा पीक ? यहां जानिए

भारत में कोरोना का कहर थमने का नाम नही ले रहा है। हर रोज लाखों नए केस सामने आ रहे है। अब सवाल यह है कि क्या कोरोना अपने पीक पर है या अभी पीक पर आना बांकि है? कोरोना के केस कब कम होंगे और मौत का आंकड़ा कब कम होना शुरू होगा ? इन सभी सवालों के जवाब नई दिल्ली स्थित एम्स के डायरेक्ट रणदीप गुलेरिया ने दिए है।
 
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नई दिल्ली (उत्तराखंड पोस्ट) भारत में कोरोना का कहर थमने का नाम नही ले रहा है। हर रोज लाखों नए केस सामने आ रहे है। अब सवाल यह है कि क्या कोरोना अपने पीक पर है या अभी पीक पर आना बांकि है? कोरोना के केस कब कम होंगे और मौत का आंकड़ा कब कम होना शुरू होगा ? इन सभी सवालों के जवाब नई दिल्ली स्थित एम्स के डायरेक्ट रणदीप गुलेरिया ने दिए है।

गुलेरिया ने कहा, 'भारत एक बड़ा देश है, इसलिए यहां अलग-अलग समय पर कोरोना का पीक आएगा। पश्चिम भारत में कोरोना के केस बढ़ने के बाद कुछ हद तक कम होने शुरू हो गए हैं। अगर हम महाराष्ट्र की बात करें तो यहां बढ़ते हुए मामलों को देखकर यही लगता है कि यहां कोरोना पीक पर आ चुका है।'

गुलेरिया ने कहा, 'अगर हम राजधानी दिल्ली या आस-पास के राज्यों जैसे क्षेत्रों की बात करें तो यहां पीक आने में अभी थोड़ा समय और लग सकता है। शायद इस महीने के मध्य तक इन इलाकों में भी कोरोना का पीक आ जाए। हालांकि ये भी मायने रखता है कि हम कोरोना संक्रमण को कंट्रोल करने के लिए कितने सही कदम उठाते हैं।' उन्होंने पूर्वी भारत में कोरोना के फैलने को लेकर भी चिंता जाहिर की है।

गुलेरिया ने बताया कि असम और बंगाल जैसे राज्यों में अब कोरोना के मामले तेजी से बढ़ना शुरू हो चुके हैं, जोकि चिंता का विषय है। कोरोना का खतरा हर जगह अलग-अलग समय पर बढ़ेगा, लेकिन इसे लेकर सतर्कता बरती जाए तो इस महीने के आखिर तक संक्रमितों की संख्या कम हो सकती है। तीसरी लहर के खतरे पर डॉ. गुलेरिया ने कहा, 'बिल्कुल, कोरोना की तीसरी लहर का भी खतरा हो सकता है। अगर हम ज्यादा से ज्यादा लोगों को वैक्सीनेट करने में कामयाब होते हैं तो तीसरी लहर मौजूद लहर जितनी खतरनाक साबित नहीं होगी।'

सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया के मुताबिक, भारत में जुलाई तक वैक्सीन की कमी रहेगी और इतनी बड़ी जनसंख्या को वैक्सीनेट करना आसान नहीं होगा। इस विषय पर बोलते हुए डॉ. गुलेरिया ने कहा, 'ये वाकई चिंता का विषय है। हालांकि सीरम इंस्टिट्यूट और भारत बायोटेक नए प्लांट भी लगा रहे हैं। इसे लेकर कुछ कंपनियों के साथ समझौते भी किए जा रहे हैं। वैक्सीन बनाना एक मुश्किल काम है, इसलिए इसमें थोड़ा समय भी लग सकता है।' गुलेरिया ने कहा, 'वैक्सीन के अभाव से बचने के लिए हम विदेशी वैक्सीन का भी सहारा ले सकते हैं। स्पुतनिक, फाइजर और मॉडर्ना जैसी वैक्सीन जिन्हें रेगुलेटरी अप्रूवल मिल चुका है, उन्हें भी पूल में शामिल किया जाना चाहिए। साथ ही साथ भारत बायोटेक और सीरम इंस्टिट्यूट की वैक्सीन का प्रोडक्शन भी बढ़ना चाहिए। तभी हम पूरे देश में लोगों को वैक्सीनेट करने में सफल हो पाएंगे।'

गुलेरिया ने बताया कि कोरोना की दूसरी लहर का वैज्ञानिकों को पहले से ही अंदाजा था। हालांकि, वायरस म्यूटेट होकर इतना ज्यादा इंफेक्शियस हो जाएगा, इसकी जानकारी किसी को नहीं थी। भारत में प्रतिदिन चार लाख मामले आने की आशंका थी, लेकिन ये मामले इतनी तेजी से बढ़ेंगे, ये किसी को नहीं पता था। पिछली बार मामले धीमी रफ्तार से बढ़े थे तो हेल्थ केयर सिस्टम को तैयारी करने का समय मिल गया था। कोरोना के 10-20 हजार मामले बढ़कर अचानक साढ़े तीन-चार लाख तक पहुंच गए। इससे अस्पतालों पर मरीजों का बोझ अचानक से बढ़ गया। आईसीयू बेड, ऑक्सीजन और दवाओं की कमी से स्थिति गंभीर होती चली गई। कोरोना की दूसरी लहर इतनी तेजी से आई कि देश के हेल्थ केयर सिस्टम को तैयारी का बिल्कुल समय नहीं मिला। अब सभी अस्पताल इसे लेकर गंभीरता से काम कर रहे हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा मरीजों का इलाज किया जा सके।

गुलेरिया के मुताबिक, कोरोना की मौजूदा लहर से निपटने के लिए हेल्थ केयर सिस्टम को दुरुस्त करने के साथ-साथ कुछ कई और भी चीजें करने की जरूरत है। ये वायरस ह्यूमन टू ह्यूमन ट्रांसफर हो रहा है। अगर लोगों को मिलने ही न दिया जाए तो संक्रमण की चेन अपने आप टूट जाएगी। इसलिए एक सख्त लॉकडाउन की जरूरत है, जिसमें सिर्फ जरूरी लोगों को ही बाहर निकलने की इजाजत होनी चाहिए। ये लॉकडाउन करीब दो हफ्ते का होना चाहिए। सिर्फ वीकेंड पर लॉकडाउन लगाने से कोई फायदा नहीं होगा।

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