उत्तराखंड कांग्रेस में टिकट के लिए घमासान, चुनाव से पहले चिंता में क्यो है दिग्गज?

उत्तराखंड में आगामी विधानसा चुनाव में अब वक्त कम बचा है। माना जा रहा है कि जनवरी के दूसरे हफ्ते में चुनाव आयोग चुनाव तारीखों का ऐलान कर सकता है। ऐसे में राजनीतिक दल जहां जोर-शोर से चुनाव पर्चार में जुटे हैं, वहीं राजनीतिक दलों के दिग्गज नेता अपने साथ -साथ अपने परिवार के लोगों के लिए टिकट की भी जुगत में लगे हैं और चाहते हैं कि उनके परिवार के लोगों को भी चुनावी टिकट मिले।
 
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देहरादून (उत्तराखंड पोस्ट
) उत्तराखंड में आगामी विधानसा चुनाव में अब वक्त कम बचा है। माना जा रहा है कि जनवरी के दूसरे हफ्ते में चुनाव आयोग चुनाव तारीखों का ऐलान कर सकता है। ऐसे में राजनीतिक दल जहां जोर-शोर से चुनाव पर्चार में जुटे हैं, वहीं राजनीतिक दलों के दिग्गज नेता अपने साथ -साथ अपने परिवार के लोगों के लिए टिकट की भी जुगत में लगे हैं और चाहते हैं कि उनके परिवार के लोगों को भी चुनावी टिकट मिले।

खबर कांग्रेस से मिल रही है कि कांग्रेस के कई दिग्गज अपने साथ-साथ परिवार के लोगों के लिए टिकट चाहते हैं। दरअसल ये बात इसलिए सामने आ रही है क्योंकि पंजाब विधानसभा चुनाव में प्रत्याशियों के लिए कांग्रेस की तरफ से ये फैसला लिया गया था कि एक परिवार से एक ही व्यक्ति को टिकट मिलेगा। वहीं उत्तराखंड के लिए पार्टी ने अभी तक इस तरह का कोई फैसला नहीं लिया है, लेकिन प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने मांग की है कि ये नियम उत्तराखंड में लागू नहीं हो।

उत्तराखंड में कांग्रेस के कई कद्दावर नेता अपने परिवार के अन्य सदस्यों के लिए टिकट मांग रहे हैं। सूत्रों के अनुसार उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत अपने अलावा अपनी बेटी के लिए विधानसभा का टिकट मांग रहे हैं तो वहीं नेता विपक्ष प्रीतम सिंह भी अपने बेटे के लिए टिकट की मांग कर रहे हैं। उत्तराखंड कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष यशपाल आर्य भी अपने साथ अपने बेटे के लिए टिकट की मांग कर रहे हैं।

वहीं ‘एक परिवार-एक टिकट’ के सवाल पर उत्तराखंड कांग्रेस के अध्यक्ष गणेश गोदियाल कहते हैं मैं समझता हूं कि जहां एक परिवार से दो व्यक्ति राजनीति क्षेत्र में हैं और टिकट के बाद जीतने की संभावना रखते हैं, तो ऐसे मामले में विचार हो सकता है और ऐसा कोई नियम नहीं होगा कि कोई जन सेवा करें और एक परिवार से हो तो उसे टिकट नहीं मिले। अगर ऐसा कोई नियम बन रहा है या बना है तो इस पर विचार की आवश्यकता है।

गणेश गोदियाल की बात से ये तो साफ है कि जीतने की संभावना रखने वाले और दो लोग एक परिवार से हैं तो उन्हें टिकट देने में कोई गुरेज नहीं होना चाहिए। ऐसे में देखने वाली बात ये होगी कि टिकट बंटवारे के वक्त जीतने की संभावना वाली बात पर कहीं नेताओं की जुगत न भारी पड़ जाए।

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