उत्तराखंड के पैडमैन की डॉक्यूमेंट्री लांच, दूर की मासिक धर्म से जुड़ी भ्रांतियां, यहां देखें

उत्तराखंड के पैड मैन के नाम से मशहूर हो चुके अल्मोड़ा के सोबन सिंह जीना परिसर से समाजशास्त्र में स्नातकोत्तर कर रहे आशीष पंत सेनेटरी पैड को लेकर ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को इस विषय में जागरूक कर रहे है। अब आशीष की डॉक्यूमेंट्री भी लांन्च हो गयी है।
 
उत्तराखंड के पैडमैन की डॉक्यूमेंट्री लांच, दूर की मासिक धर्म से जुड़ी भ्रांतियां, यहां देखें

अल्मोड़ा (उत्तराखंड पोस्ट) उत्तराखंड के पैड मैन के नाम से मशहूर हो चुके अल्मोड़ा के सोबन सिंह जीना परिसर से समाजशास्त्र में स्नातकोत्तर कर रहे आशीष पंत सेनेटरी पैड को लेकर ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को इस विषय में जागरूक कर रहे है। अब आशीष की डॉक्यूमेंट्री भी लांन्च हो गयी है। 15 अप्रैल को सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र विभाग और पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के संयुक्त तत्वावधान में ब्लीडिंग राइट विषय पर डॉक्यूमेंट्री का लोकार्पण किया गया।

समाजशास्त्र से स्नातकोत्तर तृतीय सेमेस्टर के छात्र आशीष पन्त द्वारा मासिक धर्म विषय पर लघुशोध कार्य किया गया। जिस पर पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के विद्यार्थी राहुल जोशी और उनकी टीम ने दिया डॉक्यूमेंट्री का रूप दिया गया। जिसका अनावरण सोबन सिंह जीना परिसर के दृश्यकला संकाय के सभागार में मुख्य अतिथि प्रोफेसर नरेंद्र सिंह भंडारी, शोध एवं प्रसार निदेशालय के निदेशक प्रोफेसर जगत सिंह बिष्ट, परिसर निदेशक प्रोफ़ेसर नीरज तिवारी, समाजशास्त्र विभाग की अध्यक्ष प्रोफेसर इला साह, कला संकायाध्यक्ष प्रोफेसर पुष्पा अवस्थी आदि अतिथियों ने लोकार्पण किया।

नीचे देखें ‘पैडमैन’ की डॉक्यूमेंट्री-

समाजसेवी नीलिमा भट्ट ने कहा कि सरकारी विभागों, स्कूल्स में पैड नहीं मिलते हैं। यह चिंतनीय है। गाँवों में कोविड-19 के समय बंद था। तो किशोरियों को पैड की उपलब्धता नहीं थी। मासिक धर्म को लेकर बातचीत होनी चाहिए। समाजसेवी और सेवानिवृत्त चिकित्सक डॉ ऊषा उप्रेती ने कहा कि  आशीष पंत ने बहुत बेहतर कार्य किया है। उन्होंने कहा कि मासिक धर्म एक प्राकृतिक स्राव है। उन्होंने कहा कि इस विषय में बातचीत करने पर झेंपना नहीं है। स्वच्छ्ता रखनी है, जननांगों को निरंतर साफ करना है, पैड को हर चार घंटे में साफ करना है। उन्होंने मासिक धर्म की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया।

परिसर निदेशक प्रोफेसर नीरज तिवारी ने कहा कि आशीष पंत और प्रोफेसर इला साह के कार्यों की सराहना की। उन्होजे कहा कि समाज में कई समस्याएं व्याप्त हैं। ऐसे में मासिक धर्म पर यह कार्य सराहनीय है। उन्होंने कहा कि आज भी पर्वतीय अंचल में मासिक धर्म को लेकर महिलाओं के लिए बहुत बड़ी समस्या है।  उन्होंने मासिक धर्म को लेकर कई अनुभव साझा किए। आज मासिक धर्म और स्वास्थ्य को लेकर समाज में जागरुकता आ गयी है। उन्होंने कहा कि मासिक धर्म को लेकर डर, झेंप की जरुरत नहीं है। यह प्राकृतिक प्रक्रिया है। इसलिए घबराने की जरुरत नहीं है।

मुख्य अतिथि के रूप में सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर नरेंद्र सिंह भंडारी ने कहा कि समाजशास्त्र और पत्रकारिता विभाग के द्वारा एक महत्वपूर्ण विषय पर उत्कृष्ट कार्य किया गया है। समाज में एक नयापन लाने के लिए ऐसे शोध कार्य हैं। समाज के लिए हमारा विश्वविद्यालय जिम्मेदारी से कार्य कर रहा है। अभी जल संरक्षण, स्वच्छ्ता, वनारोपण आदि पर समाज के बीच जाकर कार्य किये जा रहे हैं।  उन्होंने कहा कि समाज में नीड बेस्ड रिसर्च की जरुरत है। समाज में कार्य करते रहें।  अकादमिक शोध से हटकर समाज की आवश्यकता को ध्यान में रख  कर ऐसे शोध जरूरी है।हम भविष्य में भी ऐसे कार्य करेंगे।  उन्होंने प्रोफेसर इला साह, आशीष पंत, राहुल जोशी के कार्य की सराहना की।

आशीष पंत ने जानकारी देते हुए बताया कि लघुशोध कार्य को डॉक्यूमेंट्री का रूप दिया गया है। 14 फरवरी 2021 को दौलाघट इंटर कॉलेज में इस विषय पर एक जागरूकता शिविर लगाया गया। उन्होंने बताया कि समाजशास्त्र विभाग की अध्यक्ष  प्रो. इला साह के निर्देशन में महिला स्वास्थ्य एवं मासिक धर्म विषय पर लघु शोध किया है। आज भी ग्रामों में मासिक धर्म पर कसाई भ्रांतियां व्याप्त हैं।

समापन करते हुए समाजशास्त्र विभाग की अध्यक्ष प्रोफेसर इला साह ने कहा कि मासिक धर्म को लेकर ग्रामीण अंचलों में जागरुकता आनी चाहिए। इसके लिए हम भविष्य में कार्य करेंगे। उन्होंने कहा कि मासिक धर्म को लेकर हम समाज में जागरुकता उत्पन्न कर सकते हैं। पितृसत्तात्मक समाज में हम विरोध नहीं कर पाते या फिर हम कलह उत्पन्न नहीं चाहते,इसलिए हम बात नहीं कर पाते। आज गांवों में माताओं, बेटियों को मासिक धर्म को लेकर बताए जाने की आवश्यकता है।

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