उत्तराखंड | फर्जी डिग्री से नौकरी कर रहा था प्रधानाध्यापक, दो-तीन साल का बचा था कार्यकाल

बताया जा रहा है कि बर्खास्त प्रधानाध्यापक का अब सिर्फ दो-तीन साल का ही कार्यकाल बचा था। डीईओ बेसिक पदमेंद्र सकलानी ने बताया कि बर्खास्त प्रधानाध्यापक को ग्रेच्युटी और अन्य देयकों का भुगतान नहीं होगा और पेंशन भी नहीं मिलेगी।
 
उत्तराखंड | फर्जी डिग्री से नौकरी कर रहा था प्रधानाध्यापक, दो-तीन साल का बचा था कार्यकाल

बागेश्वर (उत्तराखंड पोस्ट) उत्तराखंड के बागेश्वर से बड़ी ख़बर है। बागेश्वर जिले में जिला शिक्षा अधिकारी (बेसिक) ने एक प्रधानाध्यापक को बर्खास्त कर दिया है।

दरअसल शिक्षा विभाग ने राजकीय प्राथमिक विद्यालय गढ़सेर के प्रधानाध्यापक प्रेम सिंह दोसाद की बीएड डिग्री को सत्यापित करने के लिए कुमाऊं विश्वविद्यालय भेजा था। यहां से शिक्षा विभाग को जानकारी मिली की ये डिग्री फर्जी है।

इसके बाद एक्शन लेते हुए जिला शिक्षा अधिकारी (बेसिक) ने फर्जी डिग्री से नौकरी पाने पर राजकीय प्राथमिक विद्यालय गढ़सेर के प्रधानाध्यापक प्रेम सिंह दोसाद को बर्खास्त कर दिया है। आपको बता दें कि  30 साल बाद शिक्षा विभाग ने प्रेम सिंह दोसाद की बीएड डिग्री को मिलान के लिए कुमाऊं विश्वविद्यालय भेजा थी। मार्च में कुमाऊं विवि ने राजकीय प्राथमिक विद्यालय गढ़सेर के प्रधानाध्यापक प्रेम सिंह दोसाद की बीएड की डिग्री का मिलान न होने की जानकारी शिक्षा विभाग को दी थी।

दोसाद ने वर्ष 1991 में बीएड की डिग्री हासिल करने का जिक्र किया था, लेकिन विवि के पास दोसाद को वर्ष 1991 में बीएड की डिग्री जारी करने का कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं है। इस पर डीईओ बेसिक ने दोसाद को नोटिस भिजवाया कि वह एक अप्रैल तक लिखित में अपना पक्ष रखें लेकिन प्रधानाध्यापक ने अपना पक्ष नहीं रखा और सात अप्रैल तक समय मांगा। सात अप्रैल को प्रधानाध्यापक डीईओ बेसिक के सामने उपस्थित हुए, लेकिन बीएड की डिग्री के संबंध में कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर पाए। इस पर उन्हें बर्खास्त कर दिया।

बताया जा रहा है कि बर्खास्त प्रधानाध्यापक का अब सिर्फ दो-तीन साल का ही कार्यकाल बचा था। डीईओ बेसिक पदमेंद्र सकलानी ने बताया कि बर्खास्त प्रधानाध्यापक को ग्रेच्युटी और अन्य देयकों का भुगतान नहीं होगा और पेंशन भी नहीं मिलेगी।

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