शिक्षकों के लिए बनाए गए लोगो को सुप्रीम कोर्ट ने दी मान्यता? 

जमाना सोशल मीडिया का है, ऐसे में सोशल मीडिया में हर रोज हजारों- लाखों ख़बरें बहुत तेजी से वायरल होती हैं। वायरल फर्जी ख़बरों से उत्तराखंड पोस्ट आपको सावधान करता रहा है ताकि कभी आप इन फेक खबरों को शेयर कर मुसीबत में न फंस जाएं।

 
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देहरादून (उत्तराखंड पोस्ट) जमाना सोशल मीडिया का है, ऐसे में सोशल मीडिया में हर रोज हजारों- लाखों ख़बरें बहुत तेजी से वायरल होती हैं। वायरल फर्जी ख़बरों से उत्तराखंड पोस्ट आपको सावधान करता रहा है ताकि कभी आप इन फेक खबरों को शेयर कर मुसीबत में न फंस जाएं।

एक और खबर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही। दावा किया जा रहा है शिक्षकों की कार पर लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने लोगो को मान्यता दे दी है। कहा गया है कि- सुप्रीम कोर्ट ने इस लोगो को मान्यता दे दी है। जैसे डॉक्टर्स और वकील के पास कार पर लगाने के लिए लोगो होता है ठीक उसी तरह अब टीचर्स इस लोगो को अपनी गाड़ी पर लगा सकते हैं। आखिर इस दावे का सच क्या है ? आईए आपको बताते हैं।

ख़बर में किया जा रहा दावा: शिक्षकों की कार पर लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने लोगो को मान्यता दे दी है। कहा गया है कि- सुप्रीम कोर्ट ने इस लोगो को मान्यता दे दी है। जैसे डॉक्टर्स और वकील के पास कार पर लगाने के लिए लोगो होता है ठीक उसी तरह अब टीचर्स इस लोगो को अपनी गाड़ी पर लगा सकते हैं।

सच क्या है ? -  इस दावे की पड़ताल कर सच बताते हुए केंद्र सरकार की एजांसी पीआईबी फैक्ट चेक ने बताया कि वायरल दावा पूरी तरह गलत है। सुप्रीम कोर्ट ने इस लोगो को कोई मान्यता नहीं दी है। ऐसे में एक फर्जी मैसेज को शेयर न करें।

इस लोगों के बारे में और जानकी मिली है कि इस लोगो को पंजाब के लुधियाना के कासाबाद स्थित गवर्नमेंट सीनियर सेकंडरी स्कूल के प्रिंसिपल राजेश खन्ना ने साल 2017 में डिजाइन किया था। खन्ना ने बताया कि वे कई सालों से टीचिंग प्रोफेशन में हैं और उन्होंने यह लोगो टीचर्स को समर्पित करते हुए डिजाइन किया था। उन्होंने कहा कि मुझे लगता था कि जिस तरह डॉक्टर्स, लॉयर्स व सीए आदि का अपना अपना लोगो होता है और वे इसे शान से अपनी गाड़ी पर भी लगाते हैं, ऐसे ही टीचर्स का भी लोगो होना चाहिए, ताकि टीचर्स को भी पहचान मिल सके। वायरल पोस्ट के साथ किए जा रहे दावे के बारे में खन्ना ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इस लोगो को कोई मान्यता नहीं दी है। ऐसे में एक फर्जी मैसेज को शेयर न करें।

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