इन्हें हल्के में लेना BJP-कांग्रेस को पड़ सकता है भारी !

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में राज्य की दोनों प्रमुख पार्टियों में बड़ी संख्या में टिकट न मिलने से नराज बागी उम्मीदवार ताल ठोक रहे हैं। इस चुनाव में बागी न सिर्फ भाजपा और कांग्रेस के कई दिग्गजों नेताओं का भविष्य तय करेंगे बल्कि ये भी तय करेंगे की राज्य में किसकी सरकार बनेगी। ऐसे में इन
 
इन्हें हल्के में लेना BJP-कांग्रेस को पड़ सकता है भारी !

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में राज्य की दोनों प्रमुख पार्टियों में बड़ी संख्या में टिकट न मिलने से नराज बागी उम्मीदवार ताल ठोक रहे हैं। इस चुनाव में बागी न सिर्फ भाजपा और कांग्रेस के कई दिग्गजों नेताओं का भविष्य तय करेंगे बल्कि ये भी तय करेंगे की राज्य में किसकी सरकार बनेगी। ऐसे में इन बागियों को हल्के में लेना भाजपा और कांग्रेस दोनों को भारी पड़ सकता है। अब ख़बरें एक क्लिक पर इस लिंक पर क्लिक कर Download करें Mobile App –https://play.google.com/store/apps/details?id=app.uttarakhandpost

इन्हें हल्के में लेना BJP-कांग्रेस को पड़ सकता है भारी !

बागियों की संख्या के लिहाज से देखें तो बागियों से भाजपा से ज्यादा कांग्रेस परेशान है। चुनाव से पहले ही कांग्रेस के दस विधायक बागी होकर भाजपा का दामन थाम कर भाजपा के टिकट पर मैदान में हैं तो टिकटों के ऐलान के बाद कांग्रेस में 24 नेताओं ने बगावत का झंडा बुलंद किया हुए है। ये 24 कांग्रेस के बागी 21 विधानसभा सीटों पर कांग्रेस का गणित गड़बड़ा रहे हैं।

इन 21 सीटों पर 24 के फेेर में फंसी कांग्रेस, गड़बड़ा सकता है जीत का गणित !

भाजपा में हालांकि कांग्रेस की तुलना में बागियों की संख्या कम है। भाजपा में टिकट न मिलने से नाराज होकर पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार के खिलाफ ताल ठोकने वाले  बागियों की संख्या 17 है। 16 विधानसभा सीटों पर ये 17 बागी भाजपा की जीत की उम्मीदों पर ग्रहण लगा सकते हैं। इनमें भी वे उन सीटों पर बगावत ज्यादा है जहां पर भाजपा ने कांग्रेस से भाजपा में आए बागियों को टिकट दे दिया।

इन 16 विधानसभा सीटों में अपनों से घिरी BJP, मुश्किल हुई जीत की राह !

भाजपा और कांग्रेस में बगावत का आलम तो ये है कि दोनों ही पार्टियों के सेनापति को उनकी सीटों पर अपने ही सिपाही से बगावत का सामना करना पड़ रहा है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय अपनी सहसपुर विधानसभा में बागी की चुनौती का सामना कर रहे हैं तो भाजपा के अजय भट्ट अपनी रानीखेत विधानसभा में बागी कि चुनौती से परेशान हैं।

अपने ही सिपाही से घिरे सेनापति, सेना का क्या होगा ?

कांग्रेस के 24 बागी और भाजपा के 16 बागियों में से कई बागी अपनी-अपनी सीटों पर मजबूत पकड़ रखते हैं ऐसे में वे इन सीटों पर जीत दर्ज कर सबको चौंका भी सकते हैं।

उत्तराखंड में वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य के हिसाब से देखें तो भाजपा और कांग्रेस में कांटे की टक्कर नजर आ रही है। यानि स्थिति 2012 के विधानसभा चुनाव के नतीजों की तरह होने से इंकार नहीं किया जा सकता। अगर ऐसी स्थिति बनती है तो फिर बागी होकर चुनाव लड़ने वाले जो निर्दलीय जीतकर आएंगे वे किंगमेकर की भूमिका में होंगे।

…तो इस बार फिर से निर्दलीय और छोटे दल बनेंगे किंग मेकर !

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