अन्नदाता ने दे दी जान, मुख्यमंत्री का किसानों को कर्ज माफी से साफ इंकार

देहरादून [उत्तराखंड पोस्ट] उत्तराखंड में कर्ज के बोझ तले दो किसानों ने भले ही कोई रास्ता न सूझने पर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली हो लेकिन उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने साफ कर दिया है कि उनकी सरकरार फिलहाल किसानों को कोई राहत देने के मूड में नहीं है।  (उत्तराखंड पोस्ट के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं, आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं)

मुख्यमंत्री रावत की दलील है कि आजकल किसानों के क़र्ज़ माफ़ी को लेकर बहुत बहस चल रही है ;हम बुद्धिजीवी वर्ग से आग्रह करते हैं कि वो किसान की कमायी बढ़ाने की तरफ़ ध्यान दें। रावत ने आगे कहा कि हमारे यहां किसानों का 12000 करोड़ का बक़ाया है और राज्य की आय मात्र 19 हजार करोड़;ऐसे में किसानों के क़र्ज़े की माफ़ी की मांग को पूरा करना कठिन है; हम इसकी बजाय किसान की आय बढ़ाने पर बल देंगे और खेती से कमायी दोगुनी करने का प्रयास करेंगे; इसी क्रम में सीमांत किसानों को एक लाख तक के क़र्ज़ मात्र दो प्रतिशात ब्याज पर दिया जाएगा- किसान की कमायी बढ़ाना हमारी प्राथमिकता है।

गौरतलब है कि दो जून को बेरीनाग जिले में एक किसान ने बैंक के कर्ज के बोझ तले दबे होने के चलते अपनी दीवन लीला समाप्त कर ली तो शनिवार रात तो खटीमा में एक किसान ने भी बैंक का नोटिस मिलने के बाद मौत को गले लगा लिया।

दो किसानों की आत्महत्या के बाद लगा था कि त्रिवेंद्र सरकार किसानों के कर्ज माफी के मुद्दे पर कोई ठोस पहल करेगी लेकिन मुख्यमंत्री ने ऐसी किसी संभावना को साफ नकार दिया है, जिससे किसानों में निराशा जरुर होगी, वो भी ऐसे वक्त में जब, यूपी, पंजाब के बाद महाराष्ट्र सरकार ने अपने राज्यों में किसानों को कर्ज माफी पर बड़ी राहत दी है।

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